अर्जुन माथुर इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स वेब सीरीज, ‘मेड इन हेवन’ के लिए बेस्ट परफॉरमेंस एक्टर श्रेणी में नोमिनेट किये गए

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Made_in_Heaven

– लिपिका वर्मा

इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स के लिए बेस्ट परफॉरमेंस एक्टर श्रेणी में नोमिनेट किये गए, क्या कहना चाहेंगे आप?

– मैंने यह एक्सपेक्ट नहीं किया था। मुझे यह मालूम था की मेरी परफॉर्मेंस को विचारार्थ प्रस्तुत किया गया था। बस यही जानकारी मुझे तब दी गई थी। मुझे बहुत अच्छा लगा की नॉमिनेट किया गया हूँ। किंतु सबमिशन के समय से ही मैंने इस पर कोई विचार नहीं किया। इस के बारे में कुछ भी नहीं सोचा था मैंने। मैं यहाँ पर काम बहुत समय से करते हुये काफी बिजी हूँ। मैं इस बारे में कतई भी चिंतित नहीं रहा।

ज्यों ही नॉमिनेशंस घोषित किये गए अर्जुन उसके बाद, सबसे पहले -क्या करना चाहते हैं ?

– मुझे इतने ढेर सारे एसएमएस मिले हैं, उनका हर रात बैठ कर मुझे जवाब देना होगा यह बहुत ही बड़ी ज़िम्मेदारी है मैंने काफी रिप्लाई तो दे ही दिए हैं किंतु कुछ और भी बाकि हैं। कम से कम मैं जिन्हें जानता हूँ और उनके क्लोज हूँ उनका तो रिप्लाई देना बनता है। यदि रिप्लाई नहीं देता हूँ तो यह अशिष्टता का एहसास होगा मुझे। मैंने यही निर्णय लिया है कि रोज़ाना इन मेसेजस का रिप्लाई तो करूँगा ही।

सबसे अच्छा मैसेज कौन-सा लगा आपको?

– मेरे ख्याल से सभी मैसेज में कुल मिला कर यही लिखा हुआ था, “यह तो फाइनली होना ही था। इस लड़के को पहचान लिया है अब उन्होंने भी। जब आपके स्र्पोटर्स जिन्होंने शुरुआती दौर से आपको सपोर्ट किया हो और उन्हें ऐसा लगने लगता है कि यह हमारा लड़का है, तो बेहद ख़ुशी होती है और अच्छा भी लगता है।

अपनी बॉलीवुड जर्नी को कैसे देखते हैं आप?

– मेरी बॉलीवुड जर्नी लंबी और अद्वितीय है। मैंने ईमानदारी से अपना काम किया है इसीलिए यह जर्नी सफल भी रही। हालाँकि यह जर्नी मेरी स्लो (धीमी) एंड स्टेडी (स्थिर) गति से आगे बढ़ती रही। क्या मुझे बॉलीवुड में एक बेहतरीन तरीके से स्वागत मिल पाया है ? मैं यही कहूँगा कि -यह सब मेरे टैलेंट और मेरिट की वजह से हो पाया है। यही तरीका है हम सभी के लिए। हाँ, यह जरूर है कि सभी को 100 करोड़ फिल्म में लांच नहीं मिल पाता है। हर किसी को अलग अलग परिस्तिथियों और मुश्किलों से गुजरना पड़ता है। अतः हर किसी की जर्नी की तारीफ करना बनता है। जब हम अपनी जर्नी किसी दूसरे के साथ तुलना करने लगते हैं तब प्राॅब्लम्स होती है। बॉलीवुड में जम पाना थोड़ा टफ है। मेरी जर्नी जैसा कि मैंने कहा धीरे-धीरे किंतु स्थिरता से आगे बढ़ती चली गई, अतः यह जर्नी मेरे लिए बहुत मूल्यवान है।

बतौर असिसटेंट डायरेक्टर, “मंगल पांडे“ क्यों हो गया न, और ‘बंटी और बबली’ में काम किया आपने, कुछ अनुभव शेयर कीजिए ?

– मेरी पहली फिल्म, “क्यों हो गया न“ से मुझे ढेरों प्रैक्टिकल अनुभव प्राप्त हुआ। मैं किसी कॉलेज में न तो गया हूँ और न ही मुझे मालूम है कि फ़िल्में कैसे बनती है। सो सबसे पहले अन्य लोगों की तरह मैंने भी बतौर असिसटेंट डायरेक्टर काम किया और उसके बाद सोचा कि अब मुझे क्या करना है। दरअसल, मुझे मालूम था कि एकिं्टग ही करनी है लेकिन बिहाइंड दी सीन्स काम करके मुझे ढेरों ज्ञान भी प्राप्त हुआ। यह मेरी ख़ुश क़िस्मती थी कि मुझे डायरेक्टर समीर कार्णिक के साथ पहली फिल्म में काम करने का मौका मिला। बस इसके बाद नेट वर्किंग द्वारा मैंने आगे काम पाया। सो यह समझ पाया कि जरा भी डिले हो तो प्रोड्यूसर को कितना नुकसान होता है। इसीलिए मैं यहाँ एक समझदार एवं कुशल एक्टर बन पाया हूँ। मैं दूसरों के समय की कीमत समझता हूँ बतौर एक्टर और सही समय काम डिलीवर करने की कोशिश करता हूँ और इस कोशिश में सफल भी रहा हूँ।

फिल्म “क्यों हो गया है न“ में ऐश्वर्य राय बच्चन के साथ काम किया है। कोई अनुभव शेयर करना चाहोगे आप?

– ओह माय गाॅड !! हंस कर बोले, “ मैंने उनकी एक साड़ी खो दी थी। यह मेरा काम करने का पहला अवसर था। बतौर असिसटेंट मुझे कस्टूयूम डिपार्टमेंट हैंडल करने दिया गया था। मुझे कपड़े यहाँ से वहां ले जाने पड़ते थे। साथ ही ट्रायल के लिए भी ले जाने होते थे कपड़े। और मार्किट से लाने होते थे। यह बहुत ही कीमती साड़ी थी। मुझे कार्णिक समीर से झाड़ बहुत पड़ी थी। पर वह साड़ी तो नहीं मिली किंतु उसको हमें रिप्लेस करना पड़ा।

ओ टी टी प्लेटफॉर्म के बारे में क्या कहना है, क्या यह सभी एक्टर्स और टेक्निशंस के लिए एक वरदान की तरह है ?

– जी हाँ ओ टी टी प्लेटफॉर्म पर काम करना एक वरदान की तरह ही है हम सभी के लिए। मैं वेब सीरिज़, “मेड इन हेवन“ में बतौर मेन लीड किरदार कर रहा हूँ। ओ टी टी प्लेटफॉर्म फिल्म मेकर एवं निर्देशकों के लिए बहुत अच्छा साबित हुआ है। यह अच्छे कंटेंट और बेहतर किरदारों को उसके तह तक जाकर बेहतर तौर से लिखते है और उससे अच्छी तरह दिखाने में सफल भी हुए है। बतौर एक्टर्स हम उन किरदारों को अच्छी तरह से निभा भी पाते हैं। मुझ जैसे एक्टर्स ऐसे किरदारों में कास्ट किये जा रहे है । बिग बजट हो पाना मुश्किल होता है। क्योंकि स्क्रीन मिलना मुश्किल हो जाता है। और बॉक्स ऑफिस का प्रेशर भी होता है फिल्ममेकर्स पर। सो इस प्लेटफॉर्म पर हम सभी एक्टर्स एवं टेक्निशंस को काम मिल पा रहा है यह हमारे लिए बेहद अच्छी बात है। इन प्लेटफॉर्म पर बेहतर कंटेंट और टैलेंट को काम करने के मौके भी प्राप्त हो रहे हैं। खासकर उन टैलेंट को जो बॉलीवुड में काम करने का इंतजार किये बैठे हैं।


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Mayapuri

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