करण जौहर की तरह बनना आसान नहीं…

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आज करण जौहर जो कुछ भी है, वह उनकी उम्र में बनना इतना आसान नहीं है। वह सिर्फ 40 साल के है। करण जौहर मशहूर और इंडस्ट्री में प्यार किए जाने वाले आदमी यश जौहर के अकेले बेटे है। यश जौहर इंडस्ट्री का हिस्सा थे और उन्होंने अपने काम, सच्चाई और ईमानदारी से इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई थी। यश जौहर ने अपनी मुस्कुराहट के साथ नवकेतन(देव आनंद) कंपनी और अजंता आर्ट्स (सुनील दत्त) की कंपनी में प्रोडक्शन कंट्रोलर का काम किया और वह ज़्यादातर हॉलीवुड कंपनियों के चहेते प्रोडक्शन एक्ज़ीक्यूटिव थे, जो अपनी फिल्में भारत में आकर शूट करते थे। एक आदमी जिसने अपने दिल से काम किया और उसने अपना खुद का बैनर धर्मा प्रोडक्शन बनाकर बतौर प्रोड्यूसर अपनी नई शुरूआत की। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण उनका कैंसर से निधन हो गया। लेकिन उनके निधन के बाद धर्मा प्रोडक्शन की देखरेख की चिंता नहीं थी क्योंकि उनके बेटे ने अपने पिता के काम को देखते हुए फिल्म बनाने के सभी गुणों को सीख लिया था। करण में अपने पिता के बैनर और उनके काम को आगे ले जाने की लगन और हिम्मत थी। करण ने इंडस्ट्री में आदित्य चोपड़ा का असिस्टेंट बनकर शुरूआत की। उन्होंने आदित्य के साथ ‘दिलवाले दुल्हिनयां ले जाएंगे’ से काम करना शुरू किया। उन्हें ना सिर्फ डायरेक्शन में दिलचस्पी थी बल्कि उन्होंने फिल्म में एक रोल भी निभाया।

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आदित्य करण का हीरो बन गया और करण ने अपने दोस्त के पद्चिन्हों पर चलने का फैसला किया, जो उसने फिल्म को बनाने में लगाए थे और वह उस फिल्म ने इतिहास बना दिया। आदित्य के साथ करण का काम करना ऐसा था जैसा वह फिल्ममेकिंग की पढ़ाई कर रहे हो। ‘डीडीएलजे’ के अंत तक करण की अपनी स्क्रिप्ट तैयार थी। करण में इतना आत्मविश्वास था जिसके कारण उसने शाहरुख खान और रानी मुखर्जी को अपनी स्क्रिप्ट सुनाई और वह दोनों करण की पहली फिल्म को करने के लिए मान गए लेकिन उसे अभी अपने पिता को मनाना था। एक पिता जिन्होंने अपने आपको प्रोड्यूसर बनाया था, ने शाहरुख खान को अपनी अगली फिल्म के लिए अप्रोच किया लेकिन शाहरुख की फिल्म में काम करने की सिर्फ एक ही शर्त थी कि उस फिल्म को करण डायरेक्ट करेंगे। पिता को अपने हीरो की सलाह को मानना पड़ा और वह सलाह उनके लिए बहुत फायदेमंद साबित हुई। जब करण की पहली फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ रिलीज़ हुई, तो वह फिल्म बहुत हिट हुई और फिल्म ने करण को बहुत बड़ा बना दिया। करण के साथ बड़े बड़े सितारें काम करना चाहते थे। करण ने अपनी सफलता बड़ी फिल्में जैसे ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘कभी अलविदा ना कहना’ और ‘माय नेम इज़ खान’ के साथ बनाई। वह ना सिर्फ डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे बल्कि धर्मा प्रोडक्शन में जो कुछ होता था, वह उसके पीछे का दिमाग थे। करण के काम ने उसके पिता द्वारा शुरू किए गए बैनर को वहां पहुंचा दिया जिसे देखकर उसके पिता बहुत खुश होते।

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करण अलग अलग क्षेत्रों में बढ़ना चाहते थे और उन्होंने फैसला किया कि वह पीछे बैठकर युवा और नए डायरेक्टर्स को मौका देंगे जो फिल्म डायरेक्ट करने के काबिल है। इसमें उनके असिस्टेंट करण मल्होत्रा का नाम शामिल है, जो अग्निपथ के राइटर और डायरेक्टर है। यह फिल्म करण के पिता की फिल्म से प्रेरित थी, जो बॉक्स ऑफिस पर ज़्यादा सफल नहीं हुई थी। करण के पिता का सपना था कि वह इस फिल्म को दोबारा ज़रूर बनाएंगे। यह एक बेटे का भी सपना था कि वह इस फिल्म को दोबारा बनाए लेकिन जब युवा डायरेक्टर करण मल्होत्रा ने ‘अग्निपथ’ के रीमेक को लेकर अपना आइडिया को करण को सुनाया तो धर्मा प्रोडक्शन का कर्ताधर्ता करण जौहर ने बिना समय गवाते हुए अग्निपथ को बनाने की हरी झंडी दे दी। अब इस फिल्म को पूरी दुनिया में पसंद किया गया। इसके बाद करण के एक और असिस्टेंट शकुन बत्रा ने करण जौहर और धर्मा प्रोडक्शन के लिए फिल्म ‘एक मैं एक तू’ बनाई। धर्मा प्रोडक्शन में हो रहे काम को देखकर करण खुश है। उन्हें पता है कि उनके साथ काम करने वाले नौजवान सही है, जो उसके साथ हमेशा है। इसलिए अब उसने अपने पहले प्यार यानि डायरेक्शन के लिए समय निकाल लिया है। अब वह ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ को डायरेक्ट कर रहे है। करण मानते है कि यह फिल्म उनके करिअर की सबसे मुश्किल फिल्म है। फिल्म के बारे में करण का कहना है कि इस फिल्म में कई नए लड़के लड़कियों ने काम किया है जिन्हें उन्होंने खुद उनके रोल के लिए तैयार किया है। फिल्म में कैंपस की जि़ंदगी को दिखाया जाएगा। फिल्म में ऐसे विषय को दिखाया जाएगा, जो इससे पहले किसी डायरेक्टर ने नहीं चुना और ना ही किसी की इस विषय पर फिल्म बनाने की हिम्मत हुई। फिल्म में छात्रों की दुनिया को दिखाया जाएगा, जिन्हें अगर सही समय पर सही शिक्षा नहीं दी जाती तो वह अपना रास्ता भटक जाते है। जिसकी वजह से कई कॉलेज कैंपस में बच्चों के बीच लड़ाईयां होती है।

करण जौहर ऐसा नाम नहीं है जो सिर्फ फिल्मों से जुड़ा रहे, वह जि़ंदगी के अलग अलग क्षेत्रों के बारे में जानना चाहते है। उनकी इसी भावना ने उन्हें ऐसी आवाज़ बना दिया है जो हर अलग प्लैटफॉर्म या फिर स्टेज पर सुनाई देती है। ऐसी सभाओं में उनकी आवाज़ सुनाई देती है जिसमें भारत के प्रधानमंत्री और अलग अलग क्षेत्रों के महान लोग करण के ज्ञान को देखकर हैरान रह जाते है। वह भारत के बेहतरीन एंकर्स में से एक है। वह शो को बेस्ट होस्ट करते है। करण को आज अपनी पहचान और जगह देखकर खुश होना चाहिए लेकिन उनमें कुछ बात है जो उन्हें जि़ंदगी के हर क्षेत्र में कामयाबी दिलाएगा। करण के कई दोस्त है लेकिन अगर एक इंसान की बात की जाए जिसे वह सबसे ज़्यादा प्यार करते है, तो वह उनकी माँ हीरू जौहर। करण जो भी फिल्में बनाते है, उसमें हीरू जौहर को-प्रोड्यूसर होती है। धर्मा प्रोडक्शन की सभी फिल्में वह अपने पिता यश जौहर को समर्पित करते है। अगर किसी एक इंसान को, जिसकी करण बराबरी करना चाहते है, वह है यश चोपड़ा और जिसके जैसे वह निकट भविष्य में पहुंचना चाहते है, वह है आदित्या चोपड़ा। मैं कभी कबार सोचता हूँ कि जि़ंदगी कैसी होती अगर हमारे देश में कई और करण होते। तो फिर जि़ंदगी आज की मौजूदा जि़ंदगी से कई बेहतर होती। जो भी है लेकिन सच्चाई यही है कि करण जौहर जैसा और कोई नहीं है।

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Mayapuri