किस्मत लव सब है मेरे पास- विवेक ओबरॉय

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यह बहुत व्यंग्यपूर्ण है कि अपने रोल को आसान बनाने के लिए मुझे बतौर अभिनेता किस्मत लव पैसा दिल्ली के किरदार के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी
विवेक ओबरॉय ने पिछले दिनों ज्योति वेंकटेश से हुई एक मुलाकात में बताया कि फिल्म किस्मत लव पैसा दिल्ली में उनका किरदार फिल्म एक चालीस की लास्ट लोकल के किरदार जैसा अलग है और उनके कंफर्ट लेवल से बाहर है लेकिन फिर भी उन्होंने इस रोल को करने का फैसला किया क्योंकि उन्हें फिल्म की स्क्रिप्ट काफी पसंद आई थी और वह इस रोल को खोना नहीं चाहते थे।
॰ आप किस्मत लव पैसा दिल्ली को किस तरह से बयान करेंगे?
– मैं कहूंगा कि किस्मत लव पैसा दिल्ली एक अपूर्वानुमेय फिल्म है जो आपको काफी हंसाएगी भी। यह एक ऐसी फिल्म है जो बताती है कि एक रात में क्या होता है। यह एक कॉमेडी फिल्म है। यह फिल्म कोई प्रेम कहानी नहीं है लेकिन फिर भी फिल्म में प्यार है।
॰ आपको नहीं लगता कि केएलपीडी एक अप्रिय और भद्दा शीर्षक है?
– यह बिलकुल भी अप्रिय या फिर भद्दा शीर्षक नहीं है। केएलपीडी का पूरा मतलब किस्मत लव पैसा दिल्ली है।
॰ क्या यह सच है कि जब आपको फिल्म एक चालीस की लास्ट लोकल ऑफर की गई थी तो आपने संजय खंडूरी को मना कर दिया था?
– जी हाँ, जब मुझे संजय खंडूरी ने अपनी पहली फिल्म एक चालीस की लास्ट लोकल ऑफर की थी तो मैंने उन्हें मना कर दिया था। उस रोल को अभय देओल ने निभाया था। मैंने मना इसलिए नहीं किया था कि मैं ऐसे डायरेक्टर के साथ काम नहीं करना चाहता था जो अपनी पहली फिल्म बना रहा था बल्कि वह किरदार मेरे कंफर्ट ज़ोन के बाहर था, इसलिए मैंने फिल्म नहीं की।
॰ जब आपने एक चालीस की लास्ट लोकल देखी तो क्या आपको अपने फैसले पर पछतावा हुआ?
– मैं यह ज़रूर कबूल करूंगा कि मुझे वह फिल्म बहुत पसंद आई थी और मुझे महसूस हुआ था कि मैंने गलत फैसला लिया था। मेरा नुकसान अभय देओल का फायदा बन गया। मैंने संजय को बताया कि मुझे अफसोस है कि मैंने उनकी फिल्म एक चालीस की लास्ट लोकल में काम नहीं किया।
॰ आपको फिर संजय खंडूरी की फिल्म केएलपीडी कैसे मिल गई?
– एक चालीस की लास्ट लोकल की रिलीज़ के तीन साल बाद संजय ने मुझे केएलपीडी की स्क्रिप्ट के पहले दस मिनट बताए और बाकी मुझे पढ़ने के लिए कहा। मैंने सिर्फ दस मिनट की कहानी सुनते ही फिल्म के लिए हाँ कह दी और यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि बाकी की फिल्म में क्या है। मैंने संजय को कहा कि मैं इस फिल्म को करना चाहता हूँ और मैंने अपने दोस्त अमित को इसे प्रोड्यूस करने के लिए कहा। मैं कभी भी स्क्रिप्ट के सिर्फ दस मिनट सुनकर उसे फाइनल नहीं करता लेकिन इस फिल्म को किया। अमित ने मुश्किल समय में हमेशा मेरा सच्चे दोस्त की तरह साथ निभाया है।
॰ क्या केएलपीडी भी आपके कंफर्ट ज़ोन के बाहर की फिल्म नहीं है?
– आप केएलपीडी को एक चालीस की लास्ट लोकल का एक तरह से सीक्वेल कह सकते हैं और हाँ यह भी वैसे मेरे कंफर्ट ज़ोन के बाहर की फिल्म है लेकिन मैंने इसे करने का फैसला किया क्योंकि मुझे इसकी स्क्रिप्ट बहुत पसंद आई और मैं इसे खोना नहीं चाहता था।
॰ बतौर अभिनेता क्या आप स्क्रिप्ट में अपनी राय देने पर विश्वास रखते है?
– मैं फिल्ममेकिंग के क्रिएटिव काम में अपनी अड़चन डालने को सही नहीं मानता क्योंकि मुझे लगता है कि हर डायरेक्टर का अपना नज़रिया होता है लेकिन हाँ एक फिल्म में अपने किरदार में मैं बतौर एक्टर अपनी ज़रूरत के हिसाब से बदलाव करता हूँ।
॰ आपका केएलपीडी में रोल क्या है?
– इस फिल्म में मैं लोकेश दुग्गल नाम यानि लक्की नाम के एक उत्तर भारतीय लड़के का किरदार निभा रहा हूँ। वह दिल्ली का पंजाबी लड़का है जो दिल से बहुत अच्छा है और वह अपने दोस्तों में सबसे अच्छा दिखने में विश्वास रखता है। मुझे बतौर अभिनेता इस किरदार पर बहुत काम करना पड़ा। मैं दिल्ली में करीब 15 दिनों तक रहा और कई जगह पर गया। मैंने कैम्पस में काफी दिन बिताए और वहां के युवओं की बॉडी लैंग्वेज को समझा। मैंने अपनी पूरी जि़ंदगी में सही हिंदी सीखने की भरपूर कोशिश की है लेकिन इस फिल्म के लिए मुझे अपनी हिंदी को खराब करने के लिए काम करना पड़ा ताकि मैं अपने रोल को एक नया लिहाजा दे सकूं।
॰ केएलपीडी के आपके रोल का सबसे मुश्किल पहलू क्या रहा?
– मुझे पूरी तरह से नॉन टिपिकल हीरो का रोल करना पड़ा। मुझे यह हर पल कोशिश करनी पड़ी कि मैं इस रोल में कड़ा ना दिखूं। मुझे डरा हुआ दिखना था।
॰ मल्लिका सहरावत के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
– मल्लिका बहुत मस्त लड़की है। हमने सही कैमिस्ट्री दिखाने के लिए काफी काम किया। मुझे मल्लिका के साथ फिल्म में काम करके बहुत मज़ा आया। मैंने उससे मज़ाक किया और कई बार शूटिंग पर उसकी टांग भी खींची। मल्लिका वैसे बहुत कड़क दिखती है लेकिन उसे भूत से डर लगता है। जब हम कमालिस्तान में शूटिंग कर रहे थे तो मैं उसे यह कहकर डराता था कि रात को स्टूडियो में मीना कुमारी की आत्मा भटकती है और मैं उसे कहता था कि अगर रात को वह अपने बाल बांधकर नहीं रखेगी तो आत्मा उसके शरीर में उसके बालों के जरिए घुस जाएगी।
॰ शादी के बाद बतौर इंसान और अभिनेता आप किस तरह से बदले है?
– शादी आपको शांत करती है और आपकी जि़ंदगी में ठहराव लाती है। शादी के बाद आपको अहसास होता है कि आपकी जि़ंदगी में काम से ज़्यादा भी कुछ और महत्व चीज़ है। मैं शादी के बाद शूटिंग खत्म होने का इंतज़ार करता हूँ ताकि मैं जल्दी से प्रियंका के पास जाऊं। मैं और प्रियंका बहुत खुश है कि हम दोनों अगले साल फरवरी में माता पिता बन जाएंगे।
॰ आपके पास बाकी कौन सी फिल्में है?
– केएलपीडी के बाद मैं जयंताभाई की लव स्टोरी, जि़ला गाजि़याबाद, शेर और कृष 3 जैसी फिल्में कर रहा हूँ। इसके अलावा इंद्र कुमार की फिल्म मस्ती का सीक्वेल ग्रांड मस्ती पर काम शुरू हो चुका है।


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Mayapuri

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