गुलाबी मौसम में दीपावली की झिलमिलाती रोशनी से नहाई ये बॉलीवुड की हसीनाएं

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दीपावली की जगमगाहट पुरे देश में रौशन है, बॉलीवुड में भी इस त्योहार की झिलमिलाहट सबकी आँखों में साफ़ नज़र आ रही है। स्वप्न नगरी की ललनाएँ दीपावली के साथ अपने को जोड़ कर बचपन की यादों से लेकर आज के इरादों के साथ इस पर्व का आह्वान कर रही है। चलिए इन अभिनेत्रियों से जानें दीपोत्सव पर इनके मन की बात।

दीपिका पादुकोण:–

 

 

बचपन से ही दीपावली त्यौहार मुझे बहुत-बहुत पसंद है। मेरा मन तो यह भी सोच सोच कर उजाले से भर जाता है कि हमारा पूरा परिवार रोशनी के नाम से आलोकित है, देखिए पापा का नाम प्रकाश, मां का नाम उज्वला, बहन का नाम अनीशा और मेरा नाम दीपिका। सब रोशनी से जुड़े नाम है, यह एक प्यारा सा कनेक्शन है हमारा दीपावली के साथ जो कि अपने आप में रोशनी का त्योहार है। हम दीपावली के त्यौहार बहुत जोश और जोर-शोर से मनाते हैं, कुछ वर्ष पहले तक मैं कोई भी फेस्टिवल के लिए क्वालिटी टाइम नहीं निकाल पाती थी, शूटिंग के कारण अपने फैमिली तक से दूर रहना पड़ता था, उसके बाद मैंने पक्का कर लिया कि ऐसा आगे कभी नहीं होने दूंगी। मैं हमेशा कोशिश करती हूं कि बेंगलुरु वाले अपने पेरेंट्स के घर पर जाकर दीपावली मनाऊँ। अगर ऐसा ना भी हो सके तो मेरे पेरेंट्स आ जाए मुंबई में मेरे साथ दीपावली मनाने। इस बार दीपावली त्यौहार में और भी आनंद आएगा क्योंकि अब रणवीर और रणवीर के पेरेंट्स तथा मैं और मेरे पेरेंट्स एक साथ मिलकर एक बड़ी फैमिली की तरह दीपोत्सव मनाएंगे। आज भी दीपावली पर हम वही सब करेंगे जो बचपन से करते आए हैं। बचपन में मम्मी के साथ घर की साफ सफाई करती थी, मम्मी के साथ किचन में भी उन्हें हेल्प करती थी, घर की सजावट, दीयों को लाइन से लगाने में, उन्हें प्रज्वलित करने में मॉम की मदद की थी और दरवाजे पर रंगोली बनाने में मेरी बहन अनीशा मेरी मदद करती थी। अब भी वही सब करूंगी, कुछ भी नहीं बदलेगा और कुछ बदलना भी नहीं चाहिए।। वही-वही रिचुएल्स और कस्टम्स होनी चाहिए जो हर बार होता आया है। इसी में मजा है। मैं मॉम को हेल्प करूंगी और अपना नया घर भी डेकोरेट करके दीप जलाऊँगी, रंगोली सजाऊँगी, दीपावली को लक्ष्मी पूजा भी होगी जो बचपन से हमारे घर पर होती आई है। इस बार मेरे नए घर परिवार में भी पूजा का आयोजन है। पूजा के बाद हम लोग अपने रिश्तेदारों और बॉलीवुड के कलीग्स की दीपावली पार्टियों में जाएंगे, मिठाई और गिफ्ट्स बाटेंगे। उस दिन मैं बिना किसी परहेज के, तरह तरह की फेस्टिवल स्वीट्स जरूर खाऊंगी। मेरी मॉम हर दीवाली पर ट्रेडिशनल मंगलोरिअन मिठाइयां घर पर अपने हाथों से बनाती है। मैं सिर्फ एन्जॉय करुँगी और कुछ नहीं करूंगी। आप सब मायापुरी के पाठकों को दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
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प्रियंका चोपड़ा:–

अपने देश से दूर रहती हूं लेकिन दिल से एक पल के लिए भी अपने को दूर महसूस नहीं किया। हर भारतीय त्योहार मेरे दिल में हलचल मचा देती है और मेरा मन करता है मैं अपने त्योहारों की असली रंगीनियत और फ्लेवर पाने के लिए उड़ कर अपने देश लौट आयूँ जहां मेरा बचपन गुजरा है, कितनी तमाम सारी पल-पल की यादें दिल में संजोकर रखी है मैंने। पापा मम्मी और भाई के साथ भारत के कई शहरों में मनाई दीपावली, घर के आंगन में पापा के साथ बैठकर बनाई थी रंगोलियां, मेरे पापा आर्मी के प्रसिद्ध डॉक्टर थे, साथ ही वे एक उम्दा कलाकार भी थे। बहुत कलात्मक रंगोली बनाते थे, अपनी लिटिल गर्ल (मुझे) रंगोली बनाना उन्होंने ही सिखाया था। आंगन के कोने में दीपोत्सव वाला घरौंदा बनाया, उसे दीपों से सजाया, वह सब परंपराएं आज कहीं खो गई है। फिर भी अभी भी सब कुछ नहीं खोया। चाहे मुंबई में रहूं या विदेश में, मैं दीपावली त्यौहार जरूर मनाती हूँ। मेरे हस्बैंड निक को मैंने दीपावली के रस्मों रिवाजों के बारे में बताया और पौराणिक कथाएं भी सुनाई। वे भारतीय कल्चर और परंपराओं से इमोशनली बहुत जुड़ गए हैं। हम इस बार कोई पटाखा नहीं छोड़ेंगे। बचपन में खूब फोड़े थे। जब जागो तब सवेरा। पॉल्युशन के चलते कहीं तो कैंची चलाना ही पड़ेगा। इस बार मैं दीपावली पर मुंबई में ही हूं तो दीपावली की खुशबु हवाओं में महसूस कर रही हूं। द स्काई इस रियली पिंक।”
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आलिया भट्ट:—

दीपावली उजालों का त्योहार है और हमें तो अपने घर को दीपों और फेयरी लाइट्स से सजाने का कोई मौका ही चाहिए। मैं इंतजार ही करती रहती हूं उत्सुकता से कि कब दिवाली का त्यौहार आए और मैं अपने सारे डेकोरेटिव लाइट्स बाहर निकालकर घर सजाऊं। घर कितना प्रीटी दिखता है उस दिन। जहां तक घर की साफ सफाई की बात है तो वह मैं साल भर, हर रोज करती हूं। मुझे अपने घर को साफ रखने का जुनून सा रहता है। हां सिर्फ मेरा वार्डरोब अस्त व्यस्त रहता है जिसे मैं दीपावली से पहले सवांर लेती हूं। दीपावली के दिन हम करण जौहर के ऑफिस में सुबह होने वाली पूजा में शामिल होते हैं, फिर वही लंच रहता है, वहां से जिम चली जाती हूं और फिर घर लौट कर दोपहर को अपने पाली हुई बिल्लियों के साथ खेलती हूं। रात को दीपावली पार्टी या गेट टुगेदर में आनंद मनाती हूं। इस त्यौहार की यह खासियत मुझे बहुत पसंद है कि यह पूरे परिवार, रिश्तेदार, दोस्त सहेलियों को एक छत के नीचे ले आती है और हम एक दूसरे से मिल लेते हैं वरना साल भर मिलने का वक्त ही कहां मिलता है। मुझे मिठाइयों का बहुत क्रेज है, लेकिन सिर्फ एक दिन, वह है दीपावली के दिन मैं जमकर मिठाइयां और भारतीय पकवानों का आनंद लेती हूं और अगले दिन जमकर ज्यादा देर तक वर्कआउट करके फैट्स को बर्न कर देती हूँ। दीपावली के ऑकेशन में मुझे इतने गिफ्ट्स मिलते हैं कि कमरा भर जाता है, फिर अगले चार दिनों तक गिफ्ट खोल खोल कर देखते में लगता है। मैं जरूरतमंदों को वह बाँट देती हूं। खुद मैं सिर्फ उनको दीपावली गिफ्ट देती हूं जिनके घर में पालतू जीव जन्तु होते हैं और वो गिफ्ट उनके पाले जीव जंतु के लिए होती है ताकि जिस तरह हम दीपावली एंजॉय करते हैं उनके पेट्स भी एंजॉय करें क्योकिं पेट्स तो हमेशा परेशान रहते हैं पटाखों के धमाकों और धुएं से। अच्छा हुआ बड़े पटाखे फोड़ने पर बैन लग गया लेकिन छोटे पटाखे भी आवाज और प्रदूषण फैलाते हैं। मेरी बिल्लियां बहुत डर जाती है। मैं बचपन में पटाखे फोड़ती थी लेकिन थोड़ी बड़ी होते ही जब इसके बेड इफेक्ट्स का अहसास हुआ तो कभी हाथ भी नहीं लगाया। एक बार दीपावली की रात बचपन में जब मैं छः साल की थी तो दीपावली की रात मैंने देखा एक बेंच पर सुलगते फुलझड़ी पर कोई इंसान बैठने वाला था उसे बचाने के लिए मैंने वह फुलझड़ी हाथ से हटाने की कोशिश की और गलती से गलत जगह पकड़ लिया तो मेरी उंगली जल गई। अब तो दीपावली में मैं सिर्फ सजावट, पूजा और सब से मिलने जुलने में इंजॉय करती हूं। जी नहीं मैं कार्ड नहीं खेलती।
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सोनम कपूर आहूजा:–

दीपावली मेरे लिए, सारे रूटीन वर्क ताक पर रखकर आनंद और फैमिली टाइम मनाने का त्यौहार है। चाहे हम कितना भी व्यस्त हो लेकिन दीपावली के यह 5 दिन या फिर कम से कम लक्ष्मी पूजन के दिन परिवार के सभी सदस्यों को छुट्टी लेकर घर पर उपस्थित होना ही चाहिए। पढ़ाई पूरी करने के बाद मेरी कोई भी दिवाली आज तक ऐसी नहीं गई जिसे मैंने अपने घर पर अपने परिवार के साथ ना मनाया हो। मैं 5 दिन की ब्रेक ले ही लेती हूं। मेरे लिए दीपावली हमेशा एक कोजी अफेयर रहा है, रौशनी, दीपावली डेलीकेसीज और सेलिब्रेशन के साथ। लेकिन हां वक्त के साथ-साथ काफी बदलाव आए हैं हमारे दिवाली त्योहार मनाने के स्टाइल में। बचपन में खूब पटाखे फोड़ते थे, लेकिन अब बिल्कुल नहीं फोड़ते। स्कूल कॉलेज के दौरान मैंने कई दीपावली अपने बोर्डिंग स्कूल में मनाऐं। उसके बाद जब पढ़ाई पूरी करके लौटे तो घर परिवार, और बचपन की सहेलियों के साथ दीपावली मनाते थे। अक्सर हम अपने ग्रैंडपेरेंट्स, अंकल,आंटी और कज़न्स के घर पर जाकर उनके साथ दीपावली मनाते थे। आज भी वैसा ही करते हैं। दीपावली मेरे लिए एक  स्पेशल याद लेकर आती है, वह है मेरी पहली फिल्म ‘सांवरिया’ जो दीपावली के दिन रिलीज हुई थी। दिवाली के दिन गिफ्ट का आदान-प्रदान होता ही है और मेरी मॉम हर साल अपने नियर एंड डियर वन्स को कोई ना कोई स्पेशल गिफ्ट देती है। मुझे बहुत उत्सुकता रहती है यह देखने के लिए उन्होंने सब को क्या गिफ्ट दिया। दीपावली पर हम पूरे परिवार के साथ बैठकर पूजा करते हैं। मुझे एकदम ट्रेडिशनल तरीके से, भारतीय पोशाक और ज्वेलरी में सज धज कर दीवाली मनाने का आनंद आता है। अब तो मेरे डियर हब्बी, आनंद आहूजा और उनके नियर एंड डियर लोग भी जुड़ गए हैं मेरे दीपावली सेलिब्रेशन में। बस, आनंद ही आनंद है। मेरे प्रिय फैंस और मायापुरी के पाठकों को हैप्पी दिवाली।
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अनुष्का शर्मा कोहली:—

दीपावली त्यौहार मेरे लिए साल का वह स्पेशल दिन है जब हम अपने परिवार और फ्रेंड्स के साथ एंजॉय करते हैं, मुझे घर की सजावट करने में और दीपों से घर को जगमगाने में बहुत आनन्द आता है। 2016 के आसपास का वक्त जब मैं तीन तीन फिल्मों में एक साथ शूटिंग कर रही थी, मेरे लिए बहुत हेक्टिक वक्त था और मैं अपने पैरंट्स, फ्रेंड्स और रिश्तेदारों के साथ क्वालिटी टाइम नहीं बिता पा रही थी, कोई त्यौहार भी  नहीं मना पा रही रही। उसके बाद से मैंने फैसला कर लिया कि ऐसा नहीं होना चाहिए, जिंदगी के कुछ हसीन वक्त अपने और अपने परिवार के लिए भी बचा के रखना चाहिए। मेरे पापा आर्मी में थे इसीलिए घर परिवार से दूर होते थे लेकिन दीपावली पर घर जरूर आते थे और मेरी मां बहुत खुश होती थी, इसलिए वो सारी दीपावली हमारे लिए स्पेशल होती थी, परिवार भरा पूरा  लगता था। वो दिपावलियां, जब पापा घर आते थे वह मेरे यादगार दिवाली होती थी। विवाह के बाद अपने नए परिवार के साथ दीपावली सेलिब्रेशन मुझे नई खुशियां दे रही है। जहां तक पटाखों पर लगे बैन की बात है तो पटाखों का दिवाली की रौनक और एक्साईटमेंट से कुछ लेना-देना नहीं। मैं खुद पिछले कई सालों से पटाखों के खिलाफ कैम्पेन चला रही हूं ताकि हमारा एनवायरनमेंट नॉइज़ एंड स्मोक पॉल्युशन से बच सकें तथा जीव-जंतुओं को पटाखों से दहशत ना हो। इसपर हमने एक वीडियो भी जारी किया था। इस दीवाली पर अगर हम मुंबई में रहे तो बॉलीवुड की शानदार पार्टियों में जरूर शामिल होंगे। अगर बाहर रहें तो अपने परिवार के साथ दीपावली मनाएंगे। मैं अपने फैंस और पाठकों को हैप्पी एंड प्रॉस्पेरिस दीपावली की शुभकामनाओं के साथ यह भी अर्ज करती हूं कि आप लोग सेफ तरीके से दीपावली त्यौहार मनाएं तथा दूसरों के लिए तकलीफ का सबब ना बने। अपने पड़ोसियों के प्रति रिस्पेक्ट रखें और जीव-जंतुओं को हानि न पहुंचे इसका ख्याल जरूर रखें।
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श्रद्धा कपूर:–

दीपावली का त्योहार खुशियां लेकर आती है हम सबके घर में। यह वह वक्त है जब घर में तरह-तरह के फरसान और मिठाइयां बनने की खुशबू फैली रहती है और मुझे तरह-तरह के स्नैक्स चट करने का मौका मिलता है, जैसे यम्मी चकली, करंजी, शंकरपाली, मसाले चिउडे वगैरह। दीपावली पूरी तरह से फैमिली टाइम है जब फैमिली तथा फ्रेंड्स से मिलना, सब साथ बैठकर पूजा करना, घर का बना लज़ीज़ खाना खाना और बस फैमिली मूड में रहना। एक कम्युनिटी फीलिंग में मस्त रहती हूं मैं। बचपन में पटाखों के नाम पर फुलझड़ी जलाया करती थी लेकिन जैसे-जैसे बड़ी होती गई, फुलझड़ी जलाना भी छोड़ दिया। हमारे घर पर कोई भी पटाखे नहीं जलाता। हम लोग दीपावली के साथ पटाखों के संबंध को नहीं मानते। हमें हमारे एनवायरनमेंट और पशु पक्षियों की सेफ्टी का ख्याल रखना चाहिए। मैं दीपावली के अवसर में बुराइयों पर अच्छाईयों की जीत को ध्यान में रखते हुए अपनी पर्सनाल्टी को भीतर से सही रखने का प्रयत्न करती हूं और अपनी अंदरुनी खुशी को बरकरार रखती हूं। जब रोशनी और उजाले की बात हो रही है तो बता दूं कि मेरी जिंदगी में मेरे पेरेंट्स ही मेरे लिए रोशनी और उजाला लेकर आती है। जब भी मैं किसी परेशानी में होती हूं तो झट अपने पेरेंट्स से सलाह लेने पहुंच जाती हूं। उनका होना ही मेरी जिंदगी को रोशनी से भर देती है। दीपावली मैसेज के तौर पर आप सब से गुजारिश है कि पटाखे ना जलाएं और अपने परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताइये। चाहे कोई त्यौहार हो या ना हो, इस दुनिया में परिवार का साथ ही एक बहुत बड़ा उत्सव है। खुश रहिए और दीपावली खूब एंजॉय कीजिए।
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कृति सनोन:—

जब मैं अपने पेरेंट्स के साथ दिल्ली में रहती थी तो मेरी हर दिवाली अपने परिवार के साथ ही मनती थी, फिर जब करियर के कारण मुंबई में शिफ्ट हो गई तो त्यौहार के वक्त मन अपने घर जाने के लिए मचलने लगता था तो मैं ऐन वक्त पर सब काम छोड़ छाड़ कर दिल्ली चली जाती थी ताकि हर त्यौहार अपने पेरेंट्स, सिबलिंग, रिश्तेदारों और बचपन की सहेलियों के साथ मना सकूँ, लेकिन धीरे-धीरे जब यहाँ मुंबई के खूबसूरत वातावरण और बेहतरीन अच्छे लोगों के साथ कंफर्टेबल महसूस करने लगी हूं तो मुंबई में दीपावली मनाने लगी हूं। ऑप्शन है मेरे पास,  चाहे तो दिल्ली में अपने घर पर जाकर दीपावली मनाऊँ या यहां मुंबई के घर पर इस त्योहार का आनंद लूँ। दिल्ली के घर में मैं अपनी बहन के साथ दरवाजे पर रंगोली बनाने की होड़ में रहती थी, फैमिली और फ्रेंड्स के साथ मिलने जाती थी, घर पर भी दिवाली पार्टी होती थी, कार्ड पार्टी भी रखी रखी जाती थी। अब जब मुंबई में रहना होता है तो मेरे पेरेंट्स दिल्ली से मुंबई, मेरे साथ दिवाली मनाने आ जाते हैं। हम दोनों बहने (नुपुर और मैं) यहां भी दरवाजे पर रंगोली बनाते हैं, मेरे पेरेंट्स जब दीपावली पर दिल्ली से मुंबई आते हैं तो अपने साथ ढेर सारी दिल्ली की मिठाइयां भी ले आते हैं जो मैं सबको बांटती भी हूं और खुद भी रेलिश करती हूं। मुझे दीपावली त्यौहार बहुत पसंद है, इस फेस्टिवल में बड़ी पॉजिटिविटी और खुशियां है। चाहे मैं दिल्ली में दीपावली मनाऊँ या मुंबई अंधेरी स्थित अपने घर में, मैं उसी बचपन की दीपावली जैसी ही खूबसूरत तरीके से मनाती हूं आज भी हर दीपावली। यह त्योहार मेरे लिए फैमिली ओकेशन है। बचपन में अपने रिश्तेदारों और फ्रेन्डस के साथ सार्वजनिक गार्डन में जाकर हम सब खूब पटाखें फोडते थे, लेकिन अब शगुन के तौर पर फुलझड़ियां जलाती हूं लेकिन मौज, मस्ती, खाने खिलाने  का पूरा मजा लेती हूं। आप सब पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

सारा अली खान:—

दीपावली मेरा फेवरेट त्यौहार है। बचपन से ही मैं दिवाली का बहुत शौक से इंतजार किया करती थी, मम्मी जब घर को मनपसंद रंगों के बल्ब और दीयों से सजाती थी तो मैं भी उनके साथ हाथ बटाने लग जाती थी। यह त्यौहार मुझे खुशियों और एनर्जी का संदेश देती है। मैं पटाखे की शौकीन तो नहीं थी फिर भी एकदम बचपने में मैं बोल्ड तरीके से पटाखे चलाती थी और मम्मी को मेरी बहुत फिक्र होती थी। जब बड़ी हुई तो पढ़ने के लिए विदेश चली गई, छुट्टियों में दिवाली पर आना होता था तो और ज्यादा जोश से दिवाली मनाती थी। वापस जाने का मन ही नहीं होता था। अब जब मैं बॉलीवुड में आ चुकी हूं तो बॉलीवुड की दिवाली में जमकर शिरकत करती हूं। पूजा के बाद अपने नए-नए बेस्ट कपड़ों में पार्टी में जाकर सब से मिलना बतियाना, मुझे दीपावली के खुशियों का एहसास दिलाती है। हां मुझे तरह-तरह के दीपावली डिशेज खाने में बहुत मजा आता है, मिठाइयों को भी मैं नहीं छोड़ती। इस एक दिन में मिठाइयां खाना माफ है। ओके अब दीपावली की तैयारियों में जाना है। हैप्पी दीपावली टू यू ऑल।

सोनाक्षी सिन्हा:—

दिवाली मेरे और मेरे परिवार के लिए स्पेशल अोकेशन है। दो भाइयों, लव और कुश के साथ बड़े होते हुए हमने हर त्योहार बहुत खुशी मस्ती में, हंसते खिलखिलाते मनाया। दिवाली मेरे लिए पहले भी टुगेदर्नेस को सेलिब्रेट करने का त्यौहार था और आज भी वही है। मेरे पापा विश्व के चाहे जिस कोने में हो लेकिन दीपावली के दिन घर लौट आतें हैं। उस रात हमारे घर में लक्ष्मी जी की पूजा रखी जाती है, उसके बाद शुरू होता है पड़ोसी, रिश्तेदार. फ्रेंड्स से मिलने मिलाने का कार्यक्रम। वे लोग  भी हमारे घर आते हैं। हम सब साथ में डिनर करते हैं। खूब धूमधाम रहती है। हाँ, आठ साल की उम्र तक मैंने भी पटाखे फोड़े थे, फिर एक दिन अचानक एहसास हुआ कि पटाखों का धुआं किसी के लिए भी अच्छा नहीं होता, शायद स्कूल में पढ़ी होगी। तबसे मैंने पटाखे फोड़ना छोड़ दिया। शगुन के तौर पर बस एक फुलझड़ी जला लेती हूं। आप सबको दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
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