जया भादुड़ी मिली,मिली के के रूप में

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मायुपुरी अंक 4,1975

मोहन स्टूडियो में फिल्म ‘मिली के सैट पर जया भादुड़ी मिला. सैट पर वह अकेली थी हमने उससे बातचीत के लिए कहा तो वह राजी हो गई। मेकअप रूम में आकर उसने पूछा-कहिए क्या बात है?
हमने कहा ‘अभी तक यह नही पता चला कि आप फिल्मों में अभिनय जारी रखेगी या नही। इस बारे में कुछ बतायें।

‘अब हालात बदल गए है। मैं एक्टिंग या पैसों के लिए काम नही करना चाहती। अब तो कोई बढ़िया रोल होगा तो फिल्म में काम करूंगी। बोगस फिल्मों में काम करने के बजाए अपनी बच्ची की देखभाल बाद बहुत-सी फिल्मों की आफर्स आई थी किन्तु वही घिसे-पिटे रोल थे। मैंने वह सारी ही फिल्में छोड़ दी। एक राजेश खन्ना के साथ भी थी। मैं नही चाहती कि फिल्मों में इतनी व्यस्त हो जाऊं कि घर गृहस्थी का चैन खत्म हो जाए।

हमने सुना था कि ‘बावर्ची में भाई-बहन का रोल करने के बाद राजेश ने आपके साथ काम करने से इन्कार कर दिया था। फिर अब यह कैसी फिल्म थी? हमने जिज्ञासापूर्वक पूछा।
‘मैं खुद राजेश खन्ना के साथ काम नही करना चाहती थी। ‘बावर्ची’ मैं तो ऋषिदा की वजह से मैने हां कर ली थी क्योंकि मैं उन्हें मना नही कर सकती थी जया ने बताया।

‘राजेश खन्ना का तो यह सुनहरा दौर था। हर लड़की उसके साथ काम करना चाहती थी। राजेश के साथ काम न करने का कारण क्या पूछ सकता हूं? हमने पूछा।

‘यह स्वभाव की बात है। हमारा आपसी स्वभाव नही मिलता। वह काम करते समय सामने वाले पर हावी होने की कोशिश करता है। हम दोनों की तबियतों में जमीन-आसमान का अन्तर है। मैं उसे पसन्द नही करती, इसीलिए मैं कभी राजेश खन्ना के साथ काम करने की इच्छुक नही रही। मैं जानती हूं कि मैं क्या हूं और वह क्या है ? वह फिल्म के हर फ्रेम में घुसने की कोशिश करता है और मैं पसन्द नही करती कि कोई मुझे हटा कर आगे आये। इसीलिए मैं कभी राजेश के सामने नही झुकी। ‘बावर्ची’ हमारी पहली और अन्तिम फिल्म है। जया भादुड़ी ने बड़े विश्वासपूर्वक कहा।

‘अभियान’ ‘कोरा कागज’ के बाद ‘दूसरी सीता’ से जो आशाएं बंधी थी वह पूरी न हो सकी। इसका क्या कारण है? क्या आपने उसका विश्लेषण किया है? हमने पूछा।

गुलजार दा बहुत बुद्धिमान और कल्पनाशील निर्देशक है। बढ़िया लेखक भी है। किन्तु लेखक की हैसियत
से दूसरी सीता’ में उन्होंने निराश किया है। ‘दूसरी सीता’ के समय ही उन्होंने अपनी फिल्म ‘अचानक’ शुरू कर दी थी। ‘दूसरी सीता’ और ‘अचानक’ का बुनियादी ख्याल एक ही था। इसलिए उन्होंने ‘दूसरी सीता के कुछ सीन ‘अचानक’ में शामिल कर दिये जिससे फिल्म को आशातीत बॉक्स ऑफिस पर सफलता नही मिल सकी। जया भादुड़ी ने दो टूक राय बताते हुए कहा।


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Mayapuri

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