थैंक्यू मैंशन नाट महमूद

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Mehmood_Ali_-_Actor

मायापुरी अंक 6.1974

फिल्म ‘कुंवारा’ के सैट पर जब मैंने हास्य अभिनेता महमूद को कॉमेडी के बजाय निर्देशन देते हुए देखा तो मैं दंग रह गया। एक कुशल डारेक्टर की तरह काम करते महमूद को देखना मेरे जीवन की एक नई घटना थी।

मुसाफिर साहब एक मिनट” मेरे बगल से कहता हुआ महमूद निकल गया।
महमूद की फिल्में मैं तब से देख रहा हूं जब वह फिल्मों में छोटे-छोटे रोल किया करता था। उस के बाद वह खलनायक हीरो की पिटाई करने वाला। कुछ दिनों बाद वही महमूद फिल्म के पर्दे पर हास्य कलाकार के रूप में पर्दे पर आने लगा। भारतीय फिल्म के इतिहास में सबसे अधिक समय तक हास्य कलाकार के रूप में जीने वाला अभिनेता महमूद ही है।

महमूद से मेरी पहली मुलाकात रोड न. 303 के सैट पर हुई थी। इस फिल्म में वह हास्य कलाकार के स्थान पर वो हीरो का रोल कर रहा था। यही समय था जब महमूद ने हास्य अभिनय के साथ-साथ मेन लीड में रहकर रोमांटिक रोल भी करने शुरू कर दिये थे। आज वही महमूद मेरे सामने डायरेक्टर बना खड़ा था।

शॉट पूरा करके महमूद मेरे बगल में आ बैठा और साथ था उसका पोलियो से ग्रस्त लड़का मैकी जो इसी फिल्म ‘कुवारा बाप’ में प्रमुख निभा रहा था।
“यह मेरे जीवन की एक यादगार फिल्म होगी” मेरे पूछने से पहले महमूद बोला। फिल्म पोलियो समस्या पर आधारित है और इस फिल्म को बनाने का विचार मैकी को देख कर ही आया। कभी-कभी सोचता हूं कि मैकी की ऐसी हालत का गुनहगार मैं ही हूं अगर अपने वयस्त जीवन के कुछ घन्टे निकाल कर मैकी को बचपन में ही पोलियो का टीका लगवा देता तो उसकी ऐसी हालत आज न होती, वह भी आम बच्चों को तरह हंसता-खेलता-कूदता-गाता होता”

कहते-कहते महमूद का गला भर आया और आंखें नम हो गई। इस समय एक्टर महमूद नही, महमूद के रूप में एक बाप बोल रहा था। अपने बेटे के दुख को लेकर”
“इस फिल्म के द्धारा” महमूद शून्य में देखता बोला, “मैं भारत के लाखों दर्शकों तक पोलियो में जीते लोगों का जीवन दिखाना चाहता हूं और आगाह करना चाहता हूं उनकें मां-बापों को मेरे जैसी गल्ती न करने के लिये”

वातावरण बोझिल हो उठा था। बात बदलते हुए मैं बोला, महमूद साहब, यह बताइये कि आपकी नवीनतम फिल्म ‘दुनिया का मेला’ में किसी और कलाकार की छाप क्यों नजर आती है ?
“दरअसल इस फिल्म के लिये मुझे जी. एम. रोशन साहब ने बहुत जोर दिया था कि मैं अपने अभिनय में पुराने हास्य कलाकार चार्ली की छाप लाऊं और वही मैंने किया। वैसे तो चार्ली का मैं बचपन से ही प्रशंसक हूं उसका एक तकिया कलाम जो कभी बहुत मशहूर हुआ था, मैंने “दुनिया का मेला” में यूज किया है, ‘थैक्यू, मैंशन नाट’

“क्या आप अभी भी हास्य कलाकार ही रहना चाहते हैं” मैंने अगला प्रश्न पूछा “या कुछ गम्भीर भूमिकायें करने का विचार है ?”

“बहुत अच्छा सवाल पूछा मुसाफिर जी” महमूद बोला, “अभी कुछ दिन हुए मनोज साहब से बात हुई थी उन्होंने बहुत जोर देकर कहा था कि उनकी अगली फिल्म में मैं किसी ऐसे कलाकार को अभिनीत करूं जो जनता का अपना पात्र हो। जनता के दुख दर्द को पर्दे तक ला सके। मनोज कुमार जी कुछ भी करवा सकते है। एक हास्य कलाकार से गम्भीर भूमिकाये भी करवा सकते है”
फिल्म का अगला शॉट रेडी हो गया था। इससे पहले कि महमूद साहब उठते मैं उठ खड़ा हुआ।
“बहुत समय लिया साहब आपका” मैं बोला
थैंक्यू मेन्शन नाट’ महमूद का छोटा-सा जवाब था।

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Mayapuri