देवानन्द इश्क का देवता

1 min


devanand_2074752b

मायापुरी अंक 6.1974

चाये के प्याले हमारे सामने रखे थे. देवआनन्द बड़े जोश से बातें कर रहा था और हम तीनों सामने बैठे सुन रहे थे। जी हां ! हम-तीनों सामने-वह साथ ही थीं (WOMAN’S LIB) और दीन दुनिया भूल कर बस एक टक को देख रही थी।

देव आनन्द पहले गुरूदत्त मरहूम की-फिर इंडस्ट्री की बातें करता रहा और मैं सोच रहा था ऐसी कौन सी बात है जो बीस साल की यह सुंदर लड़की इतने ध्यान से सुन रही है-लेकिन वह तो …..!
“मिस जीनत कहां शूटिंग कर रही है ?” मैंने अपनी मेडम्स को वापिस धरती पर लाने के लिए देव से पूछा। ”महमूद स्टूडियो में !” छोटा सा उत्तर था।

“बात यह है मैं…आप दोनों के बारे में…!

“मैं समझ गया-इससे बेहतर होगा आप मेरी इश्क-इश्क-इश्क के बारे में लिखे। मुझे काटकर देव बोले और फिर बिना पूछे ही अपनी फिल्म के बारे में बताना शुरू कर दिया-बला….बला….बला….! गजब का जोश है इस आदमी में ऐसा लगता है यह आदमी पच्चीस साल के आस पास न होकर पच्चीस साल का नौजवान है। यह सब न जाने कब तक चलता रहता अगर एक हजरत इन साहिब से मिलने न आ जाते। (शुक्रिया दोस्त !) चलते-चलते मैंने पूछा’ वो हमारी INTERVIEW के लिये कब टाईम होगा ?”
“आप अगले हफ्ते टेलीफोन कीजिए.”
“लेकिन इस बार इश्क…इश्क…के बारे में नही बल्कि सिर्फ इश्क के बारे में बातें करेंगे” मैनें कहा –सब हंस पड़े।

बाहिर निकले तो वह ऐसे चल रही थी- जैसे हवा में तैर रही हो।
मैं देव आनन्द से जलता हूं-मुझे उससे नफरत है।
आज दस रोज हो गये है मेरी गर्लफ्रैन्ड ने मुझे टेलिफोन नही किया है। हाले-दिल किसे बतायें क्या…

SHARE

Mayapuri