नवीन निश्चल से मुलाकात

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मायापुरी अंक 6.1974

‘मोन्टी’ फिल्म की शूटिंग जुहू पार्जे स्कीम के एक बंगले में हो रही थी। जब नवीन निश्चल को मिलने वहां पहुंचा तो उस समय लाइटिंग हो रही थी। नवीन बाहिर एक झूले पर बैठा हुआ था। जैसे ही हमारी निगाहें मिली मैने झट से कहा, “हैलो मिस्टर साहिरा बानो”

नवीन गुस्से से लाल हो गया। बोला “यार ! कुछ तो सोच कर बोलो”
“अरे मेरा कोई और मतलब नही था-तुम इस और मूछों के साथ बिल्कुल ‘विक्टोरिया नं.203’ की साहिरा लग रही हो” मैनें उसे ठण्डा करते हुए कहा और उसके साथ बैठ कर झूला झूलने लगा-इतने में गेट पर एक गाड़ी आकर रुकी। उसमें से रनजीत बिन्दू के साथ उतरा। पीछे दो-तीन चमचे भी गाड़ी से निकले। ऐसा लग रहा था स्टार नवीन न होकर रनजीत ही है। बातचीत होने पर पता चला बिन्दू वैसे ही आई है (क्यूं ? यह मुझे से न पूछियेगा.)

रनजीत हमारे साथ ही झूले पर आ गया और प्यारी प्यारी निगाहों से बिन्दू को निहारते हुए नवीन से बोला, ‘जानते हो ! खूबसूरत जिस्म में अकल के लिए जगह नही होती”
नवीन ने मतलब भरी निगाहों से बिन्दू की तरफ देखा। ‘

बिन्दू झेंपते हुए मुस्कुराई और बोली, ‘ये मेरे बारे में नही-किसी फिल्म का डॉयलाग बोल रहा है”
लेकिन रनजीत था कि बड़े अन्दाज से बिन्दू की तरफ देखते हुए यही कहे जा रहा था।
इस बात के पीछे क्या राज है मैं नही जानता।
वह जाने-आप जाने या ऊपर वाला जाने हमें भी कोई अपना राजदां बनाने।


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Mayapuri

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