पछत्तर वर्षीय बुज़ुर्ग ने प्रवासी मज़दूरों की मदद के के लिए ऑक्सफैम की ट्रेलवाकर चुनौती का सामना किया

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Mahadeo Tandel with Family

महादेव तांडेल एक पछत्तर वर्षीय उत्साही बुज़ुर्ग हैं जो अपने स्वास्थ्य के प्रति बहुत जागरूक हैं और रोज़ लगभग दस किलोमीटर तक चलते हैं. ऑक्सफैम की वर्चुअल ट्रेलवाकर चुनौती के माध्यम से उन्हें मालूम हुआ की इस महामारी के दौर में वह स्वयं किस तरह प्रवासी मज़दूरों की मदद करने में भागीदारी कर सकते हैं. वे कहते हैं, “जब मैंने प्रवासी मज़दूरों को लॉकडाऊन के समय मीलों तक पैदल चल कर अपने गांव वापस लौटते देखा , तो मेरा मन विषाद से भर गया. इनमें से बहुतों के पास न पैसे थे और न रोज़गार और मुझे लगा की ऑक्सफैम वर्चुअल ट्रेलवाकर के ज़रिये मैं न सिर्फ उनकी मदद कर पाऊँगा बल्कि यह भी जान पाऊँगा की उन पर इतनी देर तक और दूर तक चल कर क्या गुज़री. इस लिए मेरे परिवार और मैंने इस चुनौती में हिस्सा लिया.”

महादेव जी के परिवार के सदस्य इस प्रयास का हिस्सा बनने की वजह से एक दूसरे के और करीब आये और इस चुनौती को पूरा करके उन्हें न सिर्फ उपलब्धि का एहसास हुआ बल्कि ऑक्सफैम के ज़रिये मज़दूरों की मदद करके संतोष भी महसूस हुआ.

ऑक्सफैम की वर्चुअल ट्रेलवाकर चुनौती उनत्तीस नवंबर को समाप्त हो रही है. इस अभियान से जुटाई गयी राशि न सिर्फ कोविड -१९ सम्बंधित राहत कार्य के काम आएगी बल्कि ऑक्सफैम के #RightsOverProfits अभियान को भी सशक्त करेगी. यह अभियान सरकार के सामने कुछ खास मांगे रख रहा है. जैसे की सरकार निजी स्वास्थय सेवाओं को विनयमित करे ताकि सभी मरीज़ों को सही और सस्ता इलाज मिले। साथ ही मांग की जा रही की जन स्वास्थ्य सेवाओं को हर एक भारतीय के लिए बेहतर और सुलभ बनाया जाये.

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Mayapuri