बारह मन की धोबिन आशा सचदेव

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मायापुरी अंक 9.1974

आशा सचदेव मुझे बड़ी ही मिलनसार और अच्छे स्वभाव वाली लगी। उसकी मां उसको बड़ी बहन लगती है। लेकिन लोग न जाने क्यों उसके बारे में बड़ी बाते करते रहते है। आजकल सबने उसे बारह मन की धोबिन का टाईटल दे रखा है। उसके मोटापे की वजह से बारह मन, और धोबिन….. धोबिन तो वह होती है जो हर किसी के कपड़े धोये…..और आशा सचदेव कपड़े तो नही, हां…खैर छोड़िये !

प्रसिद्ध स्क्रिप्ट राईटर यू. बी माथुर (फिल्में धूप छाओ, लैला मजनू, एक लड़की बदनाम सी) ने किसी प्रोड्यूसर के लिए आशा सचदेव को टेलीफोन किया तो वो घर पर ही मिल गई।

“क्या बात है, आज घर पर ही हो ?”

“हां, मुझे फ्लू हुआ है

“फ्लू –किस से लगा ? यू. बी माथुर शरारात से बोले।

“ओह माथुर साहिब, आप कैसी बातें करते है ?

यू. बी. माथुर ने प्रोड्यूसर के बारे में बताया और कहा उन्हें भेज रहे है तो आशा बोली-

“आप भी आइये ना।

“नही भई, मैं तो नही आऊंगा। “क्यों ?

“अगर मुझे फ्लू हो गया तो किसी को क्या बताऊंगा कि किससे लगा ? हंसते हुए उन्होंने टेली फोन रख दिया।


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Mayapuri

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