मनोज कुमार से एक मुलाकात

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मायापुरी अंक 4,1974

हम उस दिन मनोज कुमार के ऑफिस पहुंचे तो पता चला कि वह लैब में एडिटिंग में व्यस्त है। हम सीधे लैब जा पहुंचे। मनोज वहां बड़ा व्यस्त था। फिर मनोज ने अपना काम निबटाकर हमें समय दिया।
हमने मनोज से पूछा, ‘आपकी फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ क्या इंदिरा गाँधी ‘गरीबी हटाओ की देन है?

‘नही इस नारे से बहुत पहले मैं इस फिल्म की घोषणा कर चुका था। इस बीच ब्लैक आउट के दिनों को बना डाला। उसी समय में ‘क्रान्ति’ की कहानी पर भी काम किया था। वह फिल्म अब’ रोटी कपड़ा और मकान के प्रदर्शन के बाद शुरू कर रहा हूं मनोज कुमार ने बताया।

‘फिल्म रिलीज में काफी देर कर दी आपने ? हमने पूछा।
‘आज हालात ऐसे है कि कोई बात विश्वास से नही कही जा सकती, अब गेवाकलर और फ्यूजीकलर पर लोग टूट पड़े है। फ्यूजी कम मिल रहा है। लोग कहते है कि ऐसी ही स्थिति रही तो फिल्मों को भी ब्लैक एन्ड व्हाइट में बनाना पड़ेगा। मनोज ने खेद व्यक्त करते हुए कहा, ‘समझ में नही आता कि इसका अंत क्या होगा ?

‘अपने ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में कोई समाधान तो पेश किया ही होगा हमने पूछा।
‘रोटी कपड़ा और मकान’ के बारे में लोग ऐसा सोचते है कि मैं उन्हें रोटी कपड़ा मकान मुहय्या कराऊंगा।
वह लाइन लगाकर अपनी आवश्यकता की चीजें ले लेगे। लेकिन ऐसा भी नही है कि समस्या का हल न पेश किया हो। मैंने बताया है कि हम लोग ईमानदारी से काम करें और अपने जमीर की आवाज पर अमल करें तो देश का संकट दूर हो जाए। मनोज कुमार ने बताया। ‘लेकिन नीचे से ऊपर तक जहां लोग भ्रष्ट हो, उनके सुधारने में समय तो लगेगा ही. ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में एक सीन है कि शशिकपूर एक पूंजीपति है किन्तु उसके भी कुछ सिद्धान्त है, उसका वकील उससे कहता है कि वह टैक्स भरने के लिए पैसे कर्ज क्यों लेता है शशि कहता है कि सब अगर ऐसा सोचने लगें तो देश का कल्याण कैसे हो। हमारा कर्तव्य है कि हम अपना काम करें और सरकार अपना लेकिन सरकार हमें क्यों देती है ? शशि कहता है किसी ने कहा है कि यह मत सोचो कि देश तुम्हें क्या देता है ? यह सोचो कि तुम देश को क्या देते हो। जब यह बुनियादी बात लोग समझ जाएंगे तो देश सुधर जाएगा। यह कह कर वह अपनी कुर्सी घुमा देता है. अप्रत्यक्ष रूप से यह कहा गया है कि मिनिस्टर बदल जाएं यानि सरकार बदल जाए तो शायद यह निकम्मापन दूर हो जाए। आप फिल्म देखेगे तो अवश्य पसन्द करेगे। मनोज ने कहा।
आये दिन देश में आने वाले संकटों का क्या कारण क्या है ? हमने पूछा।

‘हमारी हुकुमत की गलत पॉलिसियां कुर्सियों पर ऐसे लोग बैठे है जिन्हें अपने विभागों का कोई तजुरबा नही है। इसीलिए वह कोई सही पॉलिसी नही बना पाते। वह अपने स्वार्थ के अलावा कुछ नही जानते। 1930 में जिस नमक के लिए गाँधी जी ने सत्याग्रह किया था आज वही नमक जनता के राज में ढूढे से नही मिल पा रहा है। मिलता है तो लाइन लगा कर इससे बढ़कर ट्रेजिडी और क्या होगी ? मनोज कुमार ने व्यथित स्वर में कहा।

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Mayapuri