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मुमताज बनी श्रीमती माधवानी

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mumtaz ki party me shashi kapoor and shammi kapoor

मायापुरी अकं 4,1974

ओबरॉय शेरागटन में हुये एक फिल्मी समारोह में हमारी भेंट श्रीमती मयूर माधवानी (दुर्बल स्मरण शक्ति के पाठकों के लिए मुमताज) से हो गई। श्रीमती माधवानी यानी मुमताज पहले से कुछ लम्बी दिख रही थी (अरे बाबा, यह गलत मत समझो, यह शादी का नही, हाई-हील सैंडिल का कमाल है मुमताज ने हम पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा मैं सब जानती हूं आप लोग मेरे बारे में क्या-क्या लिखते है ? मैं अकेली आई हूं। मयूर साहब अपने काम में बिजी थे। इसी बात पर कई पत्रिकाओं को मुझमें और मयूर में खटपट नजर आने लगी हुआ यह कि मुझे घर वालों की याद आई और मैं चली गई।

वैवाहिक जीवन को लेकर मुमताज ने बताया शादी के बिना जीवन अधूरा है जीवन का वास्तविक आनंद शादी के बाद ही अनुभव होता है (मुमताज यह तुम कह रही हो !)

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