मौसमी चटर्जी ‘धर्मा’ के सेट पर

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मायापुरी अकं 4,1974

फिल्म ‘धर्मा’ के जयंती समारोह में मौसमी चटर्जी से हमारी मुलाकात हो गई। हमने उससे कहा कि, ‘कहते है। फिल्म वालों को आपसे बड़ी शिकायते है। आप डेट देकर भी सैट पर नही आती जिससे उनका काफी नुकसान होता है। आखिर आप ऐसा क्यों करती है ?

‘कोई भी जान-बूझकर किसी को नुकसान नही पहुंचाता लेकिन यहां लोग बातों का बतंगड़ बनाना जानते है। किसी की परेशानी नही समझते। यहां स्वार्थ बहुत है। हर कोई अपने में मस्त है। दूसरे की परवाह नही है। मौसमी ने बताया।

‘सुना है आपकी ससुराल वालों से नही बनती इस वजय से आप मानसिक तौर पर बड़ी परेशान रहती है.क्या यही सही है ? हमने दूसरा प्रश्न किया।
‘ऐसी कोई बात नही है, हेमंत दा आजकल कलकत्ता में बंगला फिल्मों में संगीत दे रहे है। इसीलिए वह वही अधिक रहते है ?

‘हमने समझा हेमंत दा पहले आपका बिजनिस देखते थे और अब यह काम आपके पति ने अपने हाथ में ले लिया है इसीलिए वह नाराज है? हमने कहा।

‘नाराज होते तो वह हमसे मिलते नही। किन्तु वह कलकत्ता से जब भी समय मिलता है हमारे पास आ जाते है। रही बिजनिस की बात तो बिजनिस दिलीप का दिलीप मुखर्जी देखते है। वह मेरा ही नही विनोद का भी काम देखते है.वह फिल्म वालों को अच्छी तरह जानते है क्योंकि वे स्वंय भी किसी जमाने में

‘अफसाना नामक फिल्म बना चुके है। जिसमें मीना कुमारी और प्रदीप कुमार ने काम किया था। मौसमी ने कहा,

‘किसी समय आपकी और जया भादुड़ी की आपस में बनती नही थी। लेकिन अब सुना है आप दोनों की दोस्ती हो गई है। इसका कारण शायद यह तो नही कि जया ने फील्ड लगभग छोड़-सी दी है और आपके लिए मैदान साफ हो गया है? हमने चुटकी ली।

‘ऐसी बात नही है। मेरा जया से कोई गम्भीर किस्म का झगड़ा नही हुआ था। इसीलिए मैं जया को
उसकी लड़की की मुबारकबाद देने गई थी। हमारी आपस में कोई होड़ नही है।’ मौसमी ने बताया।

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Mayapuri