रोटी कपड़ा और मकान के अंदर की कहानी

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मायापुरी अंक 9.1974

एक नई फिल्म आई है ‘रोटी, कपड़ा और मकान इस के नायक मनोज कुमार जो फिल्म के निर्माता, निर्देशक वगैरह भी है, भारतीय फिल्म मान्यतानुसार हीरो बनने का लोभ न रोक पाए। उन के इस कार्य से फिल्म पिटेगी तो नही, हो सकता है बॉक्स ऑफिस हिट भी हो जाए पर वैसी हिट नही होगी जैसी उपकार हुई थी। वैसे इस फिल्म में वह सारा मसाला है जिस ने उपकार को सुपर हिट बनाया था।

इस फिल्म में मनोज कुमार शुरू से आखिर तक फिल्म पर छाए रहने की कोशिश की और ‘भारत’ के माध्यम से सारी घटनाओं को अपने चारों और घटता दिखाया। इस की जगह अगर वे अमिताभ वाला रोल लेकर अपना रोल अमिताभ को दे देते तो निश्चित मानिए यह फिल्म भी वर्ष की दूसरी सुपर हिट फिल्म सिद्ध होती।

आप कल्पना कीजिए कि इस फिल्म में ‘आनन्द का अमिताभ बाबू मोशाय वाले अन्दाज में होता और वह मनोज का रोल करता मनोज ‘उपकार में मध्यांतर के बाद किए सैनिक वाले रोल को नए अंदाज में पर्दे पर उतारता और इस रोल को कुछ और लम्बा करके उभारता तो क्या यह फिल्म वर्ष की सुपर हिट सिद्ध न होती ?

यदि हमारे हीरो भाई इन पिटी अथवा सुपर हिट से मात्र हिट रहे गई फिल्मों की गति से सबक लें और अपने को शुरू से आखिर तक दर्शकों के सामने रखने का मोह त्याग सके तो कोई कारण नही कि भारतीय फिल्मों का स्तर न सुधर सके।


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Mayapuri

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