सिनेमा के 100 सालों पर विशेष पुरानी यादें बतौर कलाकार मैं मतलबी हूँ – बिंदू

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(यह इंटरव्यू ज्योति वेंकटेश ने 32 साल पहले एक पुरानी साप्ताहिक पत्रिका के लिए लिया था और यह इंटरव्यू 3 अक्टूबर 1981 के इश्यू में छापा गया था
करीब एक दशक पहले जब दो रास्ते सिनेमा के पर्दे पर रिलीज़ हुई तो बिंदू बड़े पर्दे पर छा गई। हर कोई अपनी फिल्म में उनके नाम को जोड़ना चाहता था। बिंदु से पहले हिंदी फिल्मों में वैंप के लिए मशहूर हेलेने को बिुदं ने पीछे करके इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई। गौरतलब है 50 के दशक में हेलेन ने कुक्कू को हटाया था और तभी से वह इंडस्ट्री में वैंप के किरदार के लिए बहुत मशहूर थी। आज बिंदू प्रधान रूप में नहीं दिखाई देती है। उनके गुम होने के पीछे लोग सोचते है कि शायद उम्र की वजह से वह कई खो गई है। उनकी जगह कल्पना अय्यर और लीना दास ने ले ली। लेकिन बिंदू कहाँ है? क्या उन्होंने सन्यास ले लिया है? इन सभी सवालों का जवाब ढूंढने के लिए मैं उनके वरली अपार्टमेंट में गया। पर्दे के पीछे बिंदू कोई सेक्सी बिल्ली नहीं बल्कि पूरी घरेलू गुजूबेन लगती है। वह अपने बच्चों के साथ खेल रही थी और टीवी पर फिल्में देख रही थी। उन्होंने शरीर को ढकने वाले पूरे कपड़े पहन रखे थे। उनको देखकर लग रहा था कि क्या वाकई यह वहीं बिंदू है जो थिएटर में अपने सेक्सी अवतार से तहलका मचाती है।
हालांकि बिंदू ने यह नहीं कहा कि उनका फिल्मों से मन उठ चुका है। बिंदू ने बताया कि अगर कोई अच्छा रोल उन्हें मिलता है तो उन्हें उसे करने में कोई परहेज़ नहीं है।
बिंदू ने बताया, ‘मैं एक जैसे रोल करके अपने टैलेंट को व्यर्थ नहीं करना चाहती। मैं ऐसे रोल नहीं करना चाहती जिनमें मैं अपनी छाप ना छोड़ सकूं। जिस दिन से शान रिलीज़ हुई उस दिन से मेरे दोस्तों ने फोन करके मुझे कहा कि क्यों मैंने सिर्फ एक मिनट का पार्टी सीन फिल्म में किया। इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं फिल्मों में मेहमान कलाकार की भूमिका नहीं निभाऊंगी। हालांकि पहले मैंने ऐसी भूमिका की है। अगर आज इंडस्ट्री में वैंप के लिए कोई राह नहीं है तो वह इसलिए कि आज फिल्मों की हीरोइनों ने ऐसे रोल स्वीकार करने शुरू कर दिए है। जब मैंने हवस में शीर्षक भूमिका निभाई तो उस समय कोई भी हीरोइन उस रोल को करने के लिए तैयार नहीं थी। वह एक दूसरे से अच्छे रोल को छीनने में लगी हुई थी।’ बिंदू ने आगे बताया, ‘मुझे लगता है इसकी समस्या यह है कि हमारे लेखक आज उस तरह काम नहीं लिख रहे जैसा उन्होंने कजऱ् में सिम्मी के लिए लिखा था। आज दर्शक नहीं बल्कि प्रोड्यूसर और डायरेक्टर है जो रिस्क लेने से डर रहे है। वह एक जैसे किरदार फिल्मों में परोसते जा रहे है और उससे वह उम्मीद करते है कि दर्शक उन्हें अपना ले। हॉलीवुड में छोटे से किरदार को भी सच में दिखाया जाता है जो फिल्म देखने के बाद भी दर्शक के दिमाग पर हावी रहता है। लेकिन भारत में क्या किसी को मनोज कुमार की क्रांति फिल्म में परवीन बाबी और सारिका का रोल याद है? लोग सिर्फ मनोज कुमार, दिलीप कुमार और हेमा मालिनी के बारे में बातें करते है।
बिंदू ने दर्शकों की जमकर तारीफ की। बिंदू ने बताया, ‘दर्शक बहुत होशियार है और उन्हें पता है कि हम अलग फिल्मों में अलग किरदार निभाते है। इसलिए मुझे लगता है कि अगर मैं एक बार कोई सहानुभूति वाला किरदार करूंगी तो मुझे दर्शक अपनाएंगे।’ बिंदू को कैसे दो रास्ते में बतौर वैंप ब्रेक मिला? मैंने उनसे यह सवाल किया लेकिन मुझे पता था कि यह सवाल उनसे बहुत बारी पूछा जा चुका होगा। बिंदू ने बताया, ‘मैं शादी के बाद एक ब्रेक का इंतज़ार कर रही थी। मेरे पति चंपक झावेरी हमेशा प्रगतिशील रहे है जो मुझे मेरे काम में दिलचस्पी लेने के लिए कहते है। जब मैं लक्ष्मीकांत के घर राज खोसला से मिली तो मैंने उम्मीद छोड़ दी थी। उन्होंने मुझसे बोला कि क्या मैं दो रास्ते में नेगेटिव भूमिका निभाना चाहूंगी। उन्होंने मुझसे वादा किया कि बेशक मुमताज़ फिल्म की हीरोइन होंगी लेकिन जो कहानी फिल्म में बयां की जाएगी उसकी हीरोइन मैं होऊंगी। और फिल्म मेरा किरदार होगी। मैं इस रोल के लिए मान गई।’
लोगों ने बिंदू की एंट्री से कम उम्मीदे लगाई थी क्योंकि उनसे पहले गुजराती कलाकार जैसे आशा पारेख और संजीव कुमार स्क्रीन पर हिंदी बोलते हुए गड़बड़ कर देते थे। ‘‘कटी पतंग’ में मेरे रोल को पसंद किया गया क्योंकि मेरा डांस कहानी के हिसाब से ज़रूरी था। फिल्म कुदरत में मैं कल्पना अय्यर के टैलेंट को बेकार होते देख भयभीत हो गई। उन्होंने फिल्म में सिर्फ डांस किया जिसका कहानी से कोई लेने देना नहीं था। मैंने इंडस्ट्री में डांसर या वैंप बनने के लिए एंट्री नहीं ली थी। मुझे कटी पतंग के बाद डांस करने के लिए ज़ोर किया गया। मैं हेलेन जी को देखकर हैरान रहती थी क्योंकि जहां तक डांस की बात है तो उन्हें कोई टक्कर नहीं दे सकता। कोई हेलेन जी को नहीं हरा सकता। जिस प्रकार से उन्होंने अपनी फिगर को बनाकर रखा मुझे नहीं लगता कि अगले 100 सालों तक कोई दूसरी अभिनेत्री का मुकाबला उनसे किया जा सकता है।’ बिंदू के मुताबिक आज की अभिनेत्रियों के टैलेंट को व्यर्थ किया जा रहा है क्योंकि आज इंडस्ट्री में हीरो पर फिल्में बनाई जाती है और इंडस्ट्री में मर्दो का राज़ है। प्रोड्यूसर हीरो की ज़रूरतों को समझते है लेकिन उन्हें हीरोइन की कोई चिंता नहीं होती। मैं हीरोइनों को बेकार के रोल करने के लिए दोष नहीं दूंगी क्योंकि फिल्म साइन करने से पहले जो कहानी सुनाई जाती है उसे पर्दे पर अलग तरीके से दिखाया जाता है। मैं इस बात का ज़रूर ध्यान रखती हूँ कि मुझे हर डांस में अहमियत मिले। आज भी लोगों को धर्मा, अनहोनी और ज़ंजीर में मेरा डांस याद है। बतौर कलाकार मैं बहुत मतलबी हूँ। मैं नहीं चाहती कि कोई हीरो या हीरोइन मुझसे मेरा सीन छीन ले। मेरा हर फिल्म के हीरो के साथ अच्छा रिश्ता रहा है। शुक्र है कि प्रेस द्वारा मेरा नाम फिल्म के विलने के साथ जोड़ा गया। मुझे वह समय याद है जब अमिताभ ने मुझे कहा था कि क्योंकि उनकी फिल्में एक के बाद एक फ्लाॅप हो रही है तो ‘एक दिन हमें तो लाइन छोड़के जाना पड़ेगा।’ फिर अभिमान और ज़ंजीर आई और उनका करिअर बना। आज अमिताभ को देखो। वक्त वक्त की बात है।
बिंदू ने बताया, ‘धीरे और हल्के से मैं अच्छे किरदार करना चाहती हूँ। ज़रूरी नहीं कि वह माँ के रोल हो। मैं यह साबित करना चाहती हूँ कि मैं यहां सिर्फ सभी को हिलाने नहीं आई हूँ बल्कि दर्शकों को गुदगुदाने भी आई हूँ।’


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Mayapuri

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