‘‘हमारी फिल्म पति पत्नी के प्यार की कथा है..’’ आनंद एल राय, निर्देशक फिल्म ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’’

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लगभग चार साल पहले प्रदर्शित सफलतम फिल्म‘‘तनु वेड्स मनु’’से निर्देशक आनंद एल राय ने सिनेमा को एक नई विधा से परिचित कराया था.पहली बार उन्होेने अपनी इस फिल्म में बालीवुड की हीरोईन को उसकी चिरपरिचित अंदाज से इतर रूप में पेश किया था.उसके बाद प्यार में अलगाव के दर्द से युवा पीढ़ी को गुजारने के लिए उन्होने ‘रांझणा’बनायी,जिसने सफलता के नए मापदंड तय किए.अब एक बार फिर वह ‘‘तनु वेड्स मनु’’का सिक्वल ‘‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’’लेकर आ रहे हैं.आनंद एल राय का मानना है कि यह फिल्म पति पत्नी के प्यार की कहानी है.

सीक्वल बनाने में चार साल का वक्त क्यों लगा?

सच कहूं तो ‘‘तनु वेड्स मनु’के बाद मैं कुछ और करना चाह रहा था.मेरे मन ने ‘रांझणा’बनाने के लिए कहा.मैं देखना चाह रहा था कि मेरे जैसा इंसान जो कि बहुत सारी चीजों में उलझा रहता है,फिर भी बहुत संतुष्ट रहता है,तो एक स्टेबिलिटी चाहिए थी.मेरे जैसा इंसान,जो रिश्तो  से,दोस्तों से, जिंदगी में हमेशा संतुष्ट रहता हो,वह आदमी मौत से कैसे डील करेगा? यानी कि ‘तनु वेड्स मनु’के बाद मेरा मन ‘रांझणा’के बारे में बात करने का था,इसलिए उस वक्त मैंने रांझणा’बनायी .‘रांझणा’ में काफी कुछ था.इसे बनाने के बाद मुझे लगा कि अब वापस एक अन लर्निंग प्रोसेस की तरफ जाना चाहिए.मैं पुनः एक प्रेम कहानी सुनाना चाहता था.दूसरी बात मुझे नहीं लगता कि चार साल का अंतराल कोई अंतराल है.सब कुछ किरदारों के पसंद या नापसंद का मसला होता है.

मगर दर्शकों ने‘तनु वेड्स मनु’को काफी पसंद किया था.ऐसे में उसका सिक्वअल तुरंत आना चाहिए..?

आप सच कह रहे हैं.‘तनु वेड्स मनु’के किरदारों को लोगों ने काफी पसंद किया.उसके बाद मुझे उसका सिक्वअल तुरंत बना लेना चाहिए था.पर उस वक्त मुझे लगा कि पहले ‘रांझणा’पर काम करना चाहिए.इसलिए मैंने पहले ‘रांझणा’बनायी. मगर ऐसा नही है कि उस वक्त मैं ‘तनु वेड्स मनु’के किरदारों को लेकर फिल्म नहीं बना सकता था.पर मैंने अपने मन की सुनी.मुझे जो ‘ग्रोथ’मिलनी चाहिए थी,वह मुझे मिल चुकी है.‘रांझणा’के बाद मुझे लगा कि अब मैं पुनः ‘तनु वेड्स मनु’के किरदारों को लेकर फिल्म बना सकता हूं.तो अब मैं ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’लेकर आया हॅूं.

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क्या इधर से उधर कूदने में तकलीफ नहीं हुई?

यदि किसी को लग रहा है कि मैं इधर से उधर कूद रहा हूं,तो ऐसा नहीं है.‘तनु वेड्स मनु’के बाद ‘रांझणा’ बनाना.उसके बाद फिर से ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’बनाना निर्देशक के तौर पर मेरी ग्रोथ है.कहानी सुनाने का एक और तरीका है मेरा.मैं उतना ही बदला हूं,जितना कि चार साल में हम सभी लोग बदले हैं.उसी के अनुरूप मैंने किरदारों को बदला है. जब किरदार बदलते हैं,तो स्वाभाविक तौर पर उनका जिंदगी के प्रति नजरिया बदलता है.मैंने यह फिल्म बनाते समय इस बात को ध्यान में रखा कि चार साल में मेरे दर्शक नहीं बदले हैं,तो जो दर्शक चार साल पहले मेरे साथ थे,उनके लिए उसी कहानी को नाप तोल के बनाना एक अलग सी चुनौती रही।

‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’में जो नए किरदार आए हैं.वह कौन से हैं? क्या बदलाव नजर आया?

देखिए,किरदार वही हैं,मगर चार साल का अंतराल इन किरदारों की उम्र,सोच,व्यवहार व जिंदगी के प्रति इनके नजरिए में नजर आएगा.यानी कि उनके अंदर जो चार साल में बदलाव आना चाहिए था,वह आया है.यह किरदार जहां गए,वहाॅं इन्हे जो किरदार मिले,उनमें से जो सबसे महत्वपूर्ण किरदार रहे,वह इस फिल्म का हिस्सा हैं.पहला नया किरदार है हरियाणा की लड़की कुसुम सांगवा उर्फ दत्तो का.वह एथलीट है.हमारी कहानी का अभिन्न हिस्सा होने के साथ कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करती है.फिर कानपुर में चिंटू का किरदार रखा है.जिसे जिषान ने निभाया है.जिशान हमारे साथ फिल्म ‘रांझणा’ कर चुके हैं.इस तरह कहानी में कई नए किरदार भी आए हैं और किरदारों में भी बदलाव आया है.वही बात इस कहानी को नया बना देती है।

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कुसुम उर्फ दत्तो के किरदार में कंगना ही क्यों?

देखिए,यह कंगना रनोट का डबल रोल नहीं है.बल्कि कंगना ने दो अलग अगल किरदार निभाए हैं.अगर मेरा बस चलता और यदि मुझे कंगना जैसी दिखने वाली दूसरी अभिनेत्री मिल जाती,तो मैं उसे कुसुम के किरदार के लिए लेता।

फिल्म में कुसुम का किरदार क्यों? कहीं रिष्ते से इतर झांकने का प्रयास तो नहीं..?

जी नहीं!यह उसके बियाॅड का मसला है.मेरी फिल्म में न तो त्रिकोणीय प्रेम कहानी है और न ही एक्स्ट्रा मार्शियल अफेयर/अवैध संबंध है.कहानी में एक प्योरिटी है.एक नजरिए का अंतर है।

जिंदगी को लेकर जो नजरिया बदला है,वह नजरिया क्या है?

वह नजरिया ही तो मेरी कहानी है.उसके बारे में अगर मैंने थोड़ी भी बात की,तो आप फिल्म देखते समय दो घंटे इंज्वाॅय नहीं कर पाएंगे.
मैं आपसे कहानी नहीं जानना चाहता?मगर मेरी दिक्कत यही है कि आप जिस नजरिए के बारे में जानना चाहते हैं,वही तो हमारी फिल्म की कहानी है।

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आप कह रहे हैं कि यह एक पति पत्नी की प्रेम कहानी है.तो आपको लगता है कि इस समय जो रिश्ते टूट रहे हैं,तो क्या उनके बीच प्यार खत्म हो गया है?या प्यार की परिभाषा बदल गयी है?

नहीं! मेरी कहानी कहती है कि हम बहुत सारे रिश्ते संभाल नहीं पाते हैं. यह जो कहानी है,वह वह दर्शाती रही है कि रिश्ते का टूटने का मतलब यह नही है कि प्यार खत्म हो गया है.हम लोग खुद से बहुत लड़ते हैं. यह वह कहानी है,जहां हम सभी बहुत सारी चीजें इसीलिए कर रहे होते हैं या दूर जा रहे होते है,क्योंकि हम एक तनाव से गुजर रहे होते हैं.क्योंकि आप प्यार कर रहे होते हैं. अगर प्यार ना हो,तो तकलीफ भी ना हो.दूर जाने की तकलीफ रिश्ता टूटने की तकलीफ प्यार की ही तो निशानी है.इसलिए टूटते रिश्ते में प्यार के खत्म हो जाने की बात से मैं सहमत नहीं।

लेकिन हाल फिलहाल में कई शादिंया टूटी हैं.ऐसे लोगों से जब मेरी बातचीत हुई,तो उनका था कि ‘रिश्तों को ढोने का क्या मतलब है? रिश्ते तोड़कर आगे बढ़ जाना चाहिए?

बिलकुल…तो क्या प्यार खत्म हो गया?मैं उल्टा यह कह रहा हूं कि मेरी कहानी में प्यार खत्म नहीं हुआ है.

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विषयवस्तु के अनुसार आपकी फिल्म समसामायिक कैसे है?

देखिए,हमारी फिल्म समसामायिक है.पर महत्वपूर्ण बात यह है हम किन लोगों की बात कर रहे हैं.इन दिनों जो रिष्ते टूट रहे हैं,उसकी भी परिभाषा अलग अलग जगहों पर अलग अलग ही है.आपके और मेरे घरों में तो ऐसा नहीं हो रहा है.तो हमारी फिल्म वर्तमान की ही बात करती है. हम इस चीज से वाकिफ भी हैं।
आज का युवा वर्ग  ‘‘तनु वेड्स मनु’’ से कैसे रिलेट करेगा?

युवा पीढ़ी फिल्म से रिलेट करेगी.वह नए युग में जी रहे है,मगर उनका घर थोड़े ही बदल गया है.नई पीढ़ी एक बदलाव मांग रही है. जो कि एक आम बात है.पर वह बदल गए हैं,यह मैं मान नहीं रहा हूॅं. वह बदलाव मांग रहे हैं.बहुत बढि़या बात है.हमें याद रखना होगा कि नई पीढ़ी बदलाव मांग रही है,पर वह बदले नहीं हैं.दिवाली पर घर पर एक साथ बैठकर पूजा करते हैं.होली घर से ही षुरू करते हैं.यह सब तो बदला नहीं है.दो चार चीजें इधर से उधर हुई हैं,पर हमारी नई पीढ़ी जड़ पर आकर खड़ी हो रही हैं.ऐसा तो है नहीं कि जड़ से टूट गए हैं.यही बात मैंने फिल्म‘‘तनु वेड्स मनु’’में उठायी थी.जब मनु दस साल बाद विदेष से वापस लौटकर आता है,तो एअर पोर्ट पर अपने मां बाप के पैर छूता है.वह अपने माता पिता से हाय बाय नहीं करता है.आखिर 25 साल से जो संस्कार मिले हैं,वह आठ दस साल में कैसे बदल सकते हैं।

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Mayapuri