हलाहलः शिक्षा तंत्राघोटालों पर चोट करती रहस्य प्रधान फिल्म

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हलाहल

स्टारः चार स्टार
निर्माताः जीशान कादरी
निर्देशकः रणदीप झा
कलाकारः सचिन खेडेकर, वरुण सोबती, मनु ऋषि चड्ढा, जयदीप अहलावत, अर्चना शर्मा, सानिया बंसल, द्विवेदु भट्टाचार्य व अन्य
अवधिः एक घंटा 36 मिनट

ओटीटी प्लेटफॉर्म: इरोज नाउ

किसी भी देश या समाज का विकास व उन्नति तभी संभव है, जब उस देश या समाज में रहने वाले हर इंसान का विकास और प्रगति हो। हर इंसान के विकास और प्रगति के लिए शिक्षा अत्यावश्यक है। मगर जब देश का पूरा शिक्षा तंत्र ही भ्रष्ट हो, जिस पर पूरी तरह से भ्रष्ट नेताओं और धंधेबाजों का कब्जा हो ,ऐसे में किसी प्रतिभावान बच्चे से उसका शिक्षा पाने का मौलिक ‘हक खींच लेना आसान हो जाता है।

यह हकीकत है। हमारे सामने मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले सहित शिक्षा जगत से जुड़े कई घोटाले उदाहरण के तौर पर मौजूद है। ऐसे ही शिक्षण संस्थाओं और शिक्षा तंत्र पर कुठाराघात करने वाली फिल्म ‘‘हलाहल‘‘ लेकर आए हैं लेखक जीशान कादरी और निर्देशक रणदीप झा, जो कि 21सितंबर से ‘‘इरोज नाउ‘‘ पर देखी जा सकती है।

‘‘हलाहल‘ यानी की जहर शिक्षण संस्थाओं की लंबी चैड़ी फीस ना दे पाने वाले हर गरीब व प्रतिभावान लड़के और लड़की के साथ साथ उनके माता-पिता को भी पीना पड़ रहा है। यही कड़वा सच फिल्म ‘‘हलाहल‘‘ का मुख्य हिस्सा है। जिसे मर्डर मिस्ट्री के साथ पेश किया गया है। इस कहानी में ऐसे मोड़ है कि लोग सोचने पर विवश हो जाएंगे।

कहानीः

फिल्म की कहानी गाजियाबाद के हाईवे से शुरू होती है,जहां एक लड़की अर्चना एक लड़के अशीश से रुकने के लिए कह रही है।अर्चना कहती है कि ‘अशीश रुक जाओ, सब ठीक हो जाएगा।‘ पर अचानक एक ट्रक अर्चना को रौंद देता है। अशीश भाग खड़ा होता है। उस ट्रक में सवार तीन लोग उतरते हैं, और अर्चना शर्मा को मृत देखकर उस पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा देते हैं। पता चलता है कि अर्चना शर्मा ‘गाजियाबाद मेट्रो मेडिकल कॉलेज‘ की छात्रा होने के साथ ‘ ए सी ई कोचिंग अकादमी‘ में पढ़ाती भी थी।

अर्चना शर्मा के पिता डॉक्टर शिव शर्मा (सचिन खेडेकर) रोहतक में रहते हैं और उन्हें अपनी बेटी की मौत की खबर से सदमा लगता है। वह तुरंत पुलिस स्टेशन पहुंचते हैं, जहां उन्हें बताया जाता है कि उनकी बेटी अर्चना ने आत्महत्या कर ली। डॉक्टर शिव को इस बात पर यकीन नहीं होता। डॉक्टर शिव के अनुसार उनकी बेटी अर्चना आत्महत्या नहीं कर सकती। मगर ‘गाजियाबाद मेट्रो मेडिकल कॉलेज‘ के डीन डॉ आचार्य द्वारा तैयार की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी यही कहती है कि अर्चना ने आत्महत्या की है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखकर डॉक्टर शिव शर्मा को एहसास हो जाता है कि यह आत्महत्या नहीं है, क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अर्चना का ब्लड ग्रुप गलत लिखा होता है। शिव शर्मा प्रतिज्ञा करते हैं कि वह अर्चना की मौत की सच्चाई सबके सामने लाकर रहेंगे। डॉक्टर शिव शर्मा अपनी तरफ से जांच शुरू करते हैं।

अर्चना शर्मा के बैंक खाते में 12 लाख से अधिक रकम देखकर भी डॉक्टर शिव शर्मा चैकते हैं। उधर उसी पुलिस स्टेशन में एक भ्रष्ट पुलिस इंस्पेक्टर युसूफ अंसारी (वरुण सोबती) भी है, का जो कि महज पैसे लेकर सारे काम करता है। पुलिस इस्पेक्टर युसूफ हर किसी से पैसे लेते हुए नजर आता है। शिव शर्मा सबसे पहले तो डॉक्टर आचार्य से मिलकर सच जानने की कोशिश करते हैं और उन्हें धमकाते हैं कि उन्होंने सच नहीं बताया,तो वह इस मुद्दे को मेडिकल काउंसिल में उठाएंगे। उसके बाद डॉक्टर आचार्य के इशारे पर पर कुछ गुंडे शिव शर्मा पर हमला कर देते हैं।

इस बीच डॉक्टर शिव शर्मा एक हवलदार के कहने पुलिस इंस्पेक्टर युसूफ अंसारी से उनके घर पर मिलते हैं और कहते हैं कि वह आशीश को तलाश कर लें आए, इसके लिए एडवांस में युसुफ को दो लाख रुपए देते हैं। इसके बाद शिव शर्मा व युसुफ जांच शुरू करते हैं, जांच के दौरान शक के घेरे में कई लोग आते हैं।कुछ छात्राओं की भी मौत होती है, कई लोगों की भी हत्याएं हो जाती हैं, जिन पर शक है। तमाम घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं।फिर जो सच सामने आता है,वह बहुत भयानक होता है। उसके बाद इस मसले से जुड़े हर इंसान की जिंदगी बदल जाती है।

लेखन व निर्देशनः

इस मकसदपूर्ण मनोरंजक फिल्म की कसी हुई पटकथा में रहस्य रोमांच के जो मोड़ हैं,वह दर्शकों को बांध कर रखते हैं। इतना ही नही फिल्म का क्लाइमेक्स, रहस्य और जो अंत है, उसकी कल्पना तो दर्शक कर ही नहीं पाता। जबकि फिल्म का क्लाइमैक्स हमारे भारतीय समाज का ऐसा बड़ा कड़वा सच है, कि दर्षक को अपने अंदर झाॅक कर देखने पर मजबूर होना पड़ता हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर करारा चोट करती यह फिल्म इस बात पर रोशनी डालती है कि बच्चे को शिक्षा दिलाना हर इंसान के लिए हलाहल जहर पीने जैसा है। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से चर्चा में आए लेखक, अभिनेता, निर्देशक, निर्माता जीशान कादरी ने कुछ कमियों के बावजूद बतौर निर्माता व लेखक अपनी नई फिल्म ‘हलाहल’ में गाजियाबाद को परदे पर चमका दिया है। निर्देशक रणदीप झा का निर्देशन सराहनीय है।

अभिनयः

डॉक्टर शिव शर्मा के किरदार में अभिनेता सचिन खेडेकर ने कमाल का अभिनय किया है. एक पिता का दर्द, भूमाफिया से भिड़ने का जज्बा, अपने ही व्यवसाय से जुड़े लोगों पर सवालिया निशान लगाता डॉक्टर षिव और फिर बेटी अर्चना की असलियत सामने आने पर घुटनों के बल आ गया इंसान,इन सारे पड़ाव को सचिन खेड़ेकर ने अपने शानदार अभिनय से जिस तरह से साकार किया है कि पर्दे पर उन्हें देखते हुए लोग भूल जाएंगे कि वह सचिन खेडेकर को देख रहे हैं, बल्कि उन्हें तो हर जगह डॉ शिव शर्मा ही नजर आएंगे।

वह एक उम्दा कलाकार हैं, इस बात को उन्होंने इस फिल्म में भी साबित करके दिखाया है। भ्रष्ट पुलिस इंस्पेक्टर रूआबदार मूंछें, चेहरे से झलकता कमीनापन,हर काम में सिर्फ पैसे का लालच और अपने वरिष्ठ से भिड़ जाने के रोमांच को वरूण सोबती ने बेहतरीन तरीके से अपने अभिनय से परदे पर उकेरा है। राज्य के उपमुख्यमंत्री विजेंद्र सिंह फोटो उर्फ भाई साहब के छोटे किरदार में मनुश्री चड्ढा एक बार फिर दर्शकों का दिल जीत लेते हैं। इसके अलावा अन्य कलाकार भी अपनी अपनी जगह सही है।


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Mayapuri

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