सत्यजित राय

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सत्यजित राय को श्रद्धांजलि

सत्यजित राय का जन्म 2 मई 1921 कलकत्ता में हुआ था । उनके पिता का नाम सुकुमार और उनकी माता का नाम सुप्रभा राय था । जिस समय सत्यजित राय केवल तीन साल के थे तभी उनके पिता सुकुमार राय की मृत्यु हो गयी थी और उनके परिवार का गुजारा सुप्रभा सत्यजित राय की अत्यल्प (बहोत कम) कमाई से होता था  ।राय ने कलकत्ता के बल्लीगुंग गवर्नमेंट हाई स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की और प्रेसीडेंसी कॉलेज, कलकत्ता से ही उन्होंने इकनोमिक में बी.ए की पढाई पूरी की।माँ के जबरदस्ती करने के बाद उन्हें शान्तिनिकेतन भेजा गया।शान्तिनिकेतन में सत्यजित राय के कला की काफी प्रशंसा की गयी थी।जहाँ उन्होंने प्रसिद्ध पेंटर नंदलाल बोस और बेनोड़े बहरी मुखर्जी से काफी कुछ सिखा. बाद में उन्होंने मुखर्जी पर आधारित एक डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘द इनर ऑय’ बनाई।1949 में राय ने दूर की रिश्तेदार और लम्बे समय से उनकी प्रियतमा बिजोय राय से विवाह कियाव उनका एक बीटा भी है जिसका नाम सन्दीप राय।

सत्यजीत रॉय ने अपने करियर की शुरुआत 1943 में ब्रिटिश एडवरटाइजिंग एजेंसी डी.जे. केमेर में “जूनियर विसुअलायज़र” के पद पर काम किया और उस काम के लिये उन्हें महीने के 80 रुपये मिलते थे।लेकिन फर्म में ब्रिटिश और भारतीय कर्मचारियों के बीच मासिक भत्ते और अन्य बातों में मतभेद होने के कारण उन्होंने सिग्नेट प्रेस के लिये भी काम किया जिसे डी.के. गुप्ता ने शुरू किया था।जहाँ उन्होंने बहुत से कवर डिज़ाइन किये जैसे जिबनानंदा दास की बनलता सेन और रूपसी बंगला, बिभूतिभूषण बनद्योपाध्याय की चंदर पहर, जिम कॉर्बेट की मनेअटेर्स ऑफ़ कुमाओं (Maneaters of Kumaon) और पंडित जवाहरलाल नेहरु की डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया शामिल है।

 सत्यजीत राय ने 1947 में कलकत्ता फिल्म सोसाइटी की स्थापना की. उन्होंने मिलकर बहोत सी विदेशी फिल्मो को स्क्रीन भी किया है, जिनमे से बहोत सी फिल्मो को राय ने स्वयं देखा और उनपर अभ्यास भी किया है।1950 में डी.जे. केमर ने राय को एजेंसी के मुख्यालय लन्दन भेजा. लन्दन में बिताये तीन महीनो में राय ने 99 फिल्मे देखी. जिनमे मुख्य रूप से वित्तोरियो दे सिका की नवयथार्थवादी फिल्म लाद्री दी ब्रिसिक्लेते (बाइसिकल चोर) जिसने उन्हें अन्दर से काफी प्रभावित किया. सत्यजित राय ने बाद में बताया की जब उन्होंने इन फिल्मो को देखा तभी उन्होंने फिल्म निर्देशक बनने का निर्णय लिया।

  सत्यजीत रॉय एक महान डिरक्टर थे जिन्होंने अपने जीवन में 38 फ़िल्मों का निर्देशन किया, जिनमें फ़ीचर फ़िल्में, वृत्त चित्र और लघु फ़िल्में शामिल हैं। इनकी पहली फ़िल्म पथेर पांचाली (পথের পাঁচালী, पथ का गीत) को कान फ़िल्मोत्सव में मिले “सर्वोत्तम मानवीय प्रलेख” पुरस्कार को मिलाकर कुल ग्यारह अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले। यह फ़िल्म अपराजितो (অপরাজিত) और अपुर संसार (অপুর সংসার, अपु का संसार) के साथ इनकी प्रसिद्ध अपु त्रयी में शामिल है। राय फ़िल्म निर्माण से सम्बन्धित कई काम ख़ुद ही करते थे — पटकथा लिखना, अभिनेता ढूंढना, पार्श्व संगीत लिखना, चलचित्रण, कला निर्देशन, संपादन और प्रचार सामग्री की रचना करना। फ़िल्में बनाने के अतिरिक्त वे कहानीकार, प्रकाशक, चित्रकार और फ़िल्म आलोचक भी थे। राय को जीवन में कई पुरस्कार मिले जिनमें अकादमी मानद पुरस्कार और भारत रत्न शामिल हैं। इनकी मृत्यु 23 अप्रैल 1992 को कोलकत्ता में हुई  ।


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