80 वर्ष की हुई प्रसिद्ध गायिका आशा भोंसले

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एक समय की परिश्रमी से आज की प्रसिद्ध गायिका बनने का सफर (गायिका के साथ मेरा निजी सहयोग)

इन दिनों, आशा भोंसले उत्साहित और घबराई हुई है क्योंकि वह फिल्म ‘माई’ में माई का किरदार निभाकर अपना पहला बोल्ड कदम लेने जा रही है। उन्होंने करीब पचास साल पहले बनी एक फिल्म में जूनियर कलाकार की भूमिका निभाई थी और हिंदी में ‘माई’ उनकी यह पहली फीचर फिल्म है। आशा का कहना है, ‘मुझे उम्मीद है कि दर्शक मुझे उसी प्रकार का प्यार देंगे जैसा उन्होंने बतौर गायिका मुझे दिया था। मैंने बहुत आसानी से काम किया है और मुझे लगता है बहुत अच्छा किया है, बाकी ऊपरवाले के हाथ में और लोगों के हाथ में है।’

मैंने पहली बार आशा भोंसले की शक्ति को तब महसूस किया जब मैंने अपना बहुत अच्छा मित्र जो एक जाना पहचाना फोटोग्राफर और लेखक था, को खो दिया। मुझे पता था कि वह आशा ताई का प्रशंसक था। (इस तरह से वह आशा जी को बुलाता था और महाराष्ट्र में अलग अलग क्षेत्र के कई लोग उन्हें इसी तरह बुलाते है) मुझे पता था कि वह गायिका आशा भोंसले का बहुत बड़ा प्रशंसक था। उसने अखबारों, पत्रिकाओं के लेखों में खुलकर लिखा और बोला कि कैसे आशा ताई अपनी बहन लता मंगेश्कर से बेहतर गायिका है। हम दोनों में इस विषय को लेकर कई बार बहस होती थी लेकिन इस बार इस बहस ने गंदा रूप ले लिया था। उसने बहस की शुरूआत बहुत ताना देकर की जब उसने कहा, ‘अरे, क्या रे अली, अभी भी लता मंगेश्कर का चमचा बनकर घूमता है क्या?) मैं इस बहस को उस समारोह में बढ़ाना नहीं चाहता था जहां उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेश्कर की याद में समारोह का आयोजन किया गया था। लेकिन वह मुझे छेड़ता गया और मेरा लता मंगेश्कर के प्रति प्यार और सम्मान के लिए मुझे ताना देता गया। उसने मुझसे पूछा कि क्या हम इस मुद्दे पर बहस कर सकते है। मैंने कहा, ‘कही भी, कभी भी लेकिन यहां नहीं।’ लेकिन मेरा वह दोस्त जो अपने व्यवहार और सलाह से लोगों को परेशान करने के लिए भी जाना जाता था, ने इस बहस को जारी रखा। मैंने उसे बताया कि उसकी ‘आशा ताई’ भी महान गायिका है लेकिन उनका लता दीदी के साथ कोई मुकाबला नहीं है। उसका गुस्सा उस पर हावी हो गया और उसने मुझे बुरा भला कहना शुरू कर दिया और जिस बात को मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया वह थी भारत रत्न ‘लता मंगेश्कर’ के प्रति उसके गलत शब्द। मैंने उसे लता मंगेश्कर जैसी महान महिला जिसे भारत और विश्व के लोग पूजते है, के लिए गलत भाषा का इस्तेमाल ना करने की सलाह दी। उसने कहा, ‘पूजा, मेरी बला से’ वह एक महिला है जिसकी महीन आवाज़ है और जिसे वह भजन गाते हुए, रोमांटिक गाने और मशहूर गाना ‘ऐ, मेरे वतन के लोगों’ को गाते हुए इस्तेमाल करती है। उसने आगे कहा कि मेरे जैसे पागल आदमी ने उन्हें इतनी शोहरत दी है। फिर उसने लता जी के प्रति बहुत गलत शब्द कहे जिसे मैं बर्दाश्त नहीं कर सका और मैंने तकरीबन अपना हाथ उठा लिया और वह ऑडीटोरियम से कार में बैठकर चला गया। वह मेरा सामना नहीं कर सकता था क्योंकि उसके पास कुछ नहीं सिर्फ उसकी आशा ताई के प्रति उसका अंधविश्वास था। और वह मुझसे उस विषय पर और बहस नहीं कर सका जिसे हमने शुरू किया था क्योंकि मुझे लता मंगेश्कर के गानों के बारे में पूरी जानकारी थी और उसके पास बहस करने के लिए कुछ नहीं था। हम कभी दोबारा नहीं मिले और मैं उसका शुक्रगुज़ार हूँ क्योंकि वह मेरी जि़ंदगी की सबसे बड़ी समस्या था और इसका कारण उसका आशा ताई के प्रति महान प्यार और लता जी के प्रति नफरत थी जिसके लिए उसके पास कोई ठोस सबूत नहीं था।

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उस दिन एक राजनीतिज्ञ मीटिंग थी जिसे ‘सम्राट’ कहे जाने वाले एक नेता ने आयोजित किया था। इस समारोह में आशा मेहमान थी जिन्हें इस समारोह में सम्मानित किया जाना था। वह उस समारोह में लेट पहुंची और उसने सम्राट या फिर किसी दूसरे नेता की तरफ नहीं देखा क्योंकि हमेशा उन सभी के खिलाफ मानी जाती है क्योंकि उसे पता था कि वह सब लोग लता दीदी के प्रशंसक है। वह सारा समय बेचैन थी जबकि नेता बोले जा रहे थे। जो कोई भी उन्हें करीब से देखता वह भांप लेता कि आशा को उनमें से किसी के भाषण को सुनने में दिलचस्पी नहीं थी। इसके बाद उनकी बारी थी और मैंने पहली बार देखा कि वह कितनी बहादुर और कुंद थी। आशा ने मराठी में कहा कि वह इस मीटिंग में इसलिए आई है क्योंकि यह लोग उसकी बहन लता दीदी को इस समारोह में लाने के लिए नाकामयाब रहे। उसने यह भी कहा कि उसे राजनीति से नफरत है और उसने राजनेताओं और जिसे पूरा महाराष्ट्र सम्राट मानता है और पूरा देश जिससे डरता है, को देखते हुए माफी मांगी और कहा, ‘मुझे राजनेताओं के प्रति बुरा लगता है जो झूठ बोलते है और गरीब लोगों से झूठे वायदे करते है और खुद को अमीर बनाते है। मैंने साधारण और यहां तक की अनपढ़ आदमी को भी नेता बनते हुए देखा है और कैसे वह शिक्षित आदमी के भविष्य का फैसला करते है। मैंने इन नेताओं को छोटे बच्चों के भविष्य के साथ खेलते हुए देखा है। मैं कभी नेता नहीं बनूंगी और अगर मेरा कोई मित्र या रिश्तेदार राजनीति में जाता है तो मुझे उससे नफरत होगी। हम जो कहते है कि ‘मेरा भारत महान’, यह तभी महान हो सकेगा जब हमारे पास असली में कुछ महान नेता होंगे जिन्हें सच में लोगों और देश की उन्नति की चिंता होगी। मुझे जो कहना था, वह मैंने कह दिया। मुझे बुरा नहीं लगेगा कि अगर आप मुझे अवार्ड नहीं देंगे जिसे आपने मुझे देने के लिए यहां बुलाया था।’ इस समारोह के बाद सम्राट ने अपने सभी सीनियर नेताओं की मीटिंग बुलाई और उन्हें कहा कि वह आगे से आशा भोंसले को किसी भी समारोह में आमंत्रित ना करे क्योंकि वह उनकी पार्टी की छवि को बिगाड़ सकती है।

‘आशा ताई’ ने कभी अपने अतीत की कहानी नहीं छुपाई। एक बार अपनी पुरानी यादों को याद करते हुए उन्होंने मुझे अपने पहले के दिनों के बारे में बताया। वह जब चार साल की थी तब उन्होंने अपने पिता को खो दिया था और वह स्कूल नहीं गई क्योंकि उनकी माँ खर्च नहीं उठा सकती थी। उन्होंने बताया कि उनकी बहन लता ने मराठी मीडियम स्कूल में सिर्फ दूसरी कक्षा तक पढ़ाई की है। उसे पता है कि कैसे उसकी बहन ने अभिनेत्री के तौर पर काम किया जब वह बच्ची थी और सोलह साल की उम्र में उसे बतौर गायिका पहला ब्रेक मिला। अपने बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने बारह साल की उम्र तक किसी तरह समय बिताया और फिर वह मुंबई आ गई जहां उनकी बहन ने बतौर गायिका अपने लिए नाम बनाना शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया, ‘किसी ने मेरी परवाह नहीं की, मेरी बहन ने भी मेरी परवाह नहीं की जबकि उसे पता था कि मैं अच्छा गा सकती हूँ। मैं एक म्यूजि़क डायरेक्टर से दूसरे म्यूजि़क डायरेक्टर के पास गई और उन सभी ने मुझे नकार दिया और मुझे अपनी बहन से संगीत सीखकर वापिस उनके पास आने के लिए कहा। तब मैंने फैसला किया कि मैं जो करूंगी, वह खुद से करूगी और किसी से मदद नहीं मानूंगी और यहां मेरा फैसला काम कर गया और अपने परिवार को पालने के लिए मेरे पास काफी काम था। मेरे लिए यह बहुत गंभीर संघर्ष था लेकिन मुझे लगता है कि यह मेरे लिए बहुत ज़रूरी था नहीं तो मैं वो आशा भोंसले नहीं होती, जो मैं आज हूँ। मेरे संघर्ष ने मुझे एक बहादुर महिला बनाया जो किसी भी संघर्ष का सामना कर सकती है। इस तरह की मैं तब थी और आज भी हूँ।’

आशा ने कभी अपनी निजी जि़ंदगी को रहस्य नहीं रखा। उन्होंने एक बार मुझे अपनी पहली शादी और अपनी जि़ंदगी के शुरूआती दिनों के रिश्तों के बारे में बताया। मुझे अभी भी उनके द्वारा कहा गया हर शब्द याद है। उन्होंने कहा था, ‘मेरी शादी भोंसले के साथ हुई जिसने अपनी जिंदगी में कुछ नहीं किया और वह अपने परिवार के लिए कोई मदद नहीं कर सका। उसका युवा दौर में ही देहांत हो गया और वह मुझे अकेला छोड़ गया। मुझे अपने दो बच्चों आनंद और वर्षा की देखरेख करनी थी। मैंने अपने करिअर में सफलता हासिल करनी शुरू की और वालकेश्वर की चॉल के एक कमरे से प्रभु कुंज में शिफ्ट हुई जहां पूरा मंगेश्कर परिवार रहता था और मेरी बहन ने मुझ पर दया करके मुझे रहने के लिए एक कमरा दे दिया जहां मैं अभी भी रहती हूँ।’ उन्होंने बताया कि कैसे लोग उनके और म्यूजि़क डायरेक्टर ओ पी नय्यर के रिश्ते के बारे में कहते थे। आशा ने बताया, ‘वह एक शख्स थे जिन्होंने मेरे असली टैलेंट को पहचाना लेकिन वह चमकीला पंजाबी था जो कुछ देकर कुछ वापिस भी चाहता था। मैंने कुछ समय तक उन्हें झेला लेकिन एक समय आया जब मेरे लिए उन्हें बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया। मैंने उन्हें धोखा दिया और वह गुस्से में थे और उन्होंने दूसरी आशा भोंसले को ढूंढने की कोशिश की लेकिन अपने अंत तक वह किसी और आशा भोंसले को नहीं ढूंढ सके।’ वह नय्यर से इतना गुस्सा थी कि वह उनके बुरे दिनों में भी उनकी मदद के लिए नहीं आई जब वह विरार के मध्यवर्गीय परिवार के रहम से जी रहे थे और इंडस्ट्री ने उन्हें पूरी तरह भुला दिया। जिस दिन उनका देहांत हुआ उस दिन वह शहर से चली गई और उन्होंने ओ पी नय्यर के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने लोगों द्वारा कहे गए ओ पी नय्यर के प्रति उसके व्यवहार के बारे में कहीं गई बातों पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि उसने कहा, ‘सिर्फ मुझे पता है कि मैंने उनकी वजह से क्या सहा है और मैं विश्व को अपने और उनके रिश्ते के बारे में बताना नहीं चाहती।’ ‘आर डी बर्मन, सिर्फ एक ऐसे आदमी थे जिन्होंने मुझे और मेरे व्यवहार को समझा। हमने बहुत अच्छी टीम बनाई और उन्होंने मुझसे शादी करने के लिए अपने परिवार को भी छोड़ दिया बेशक मैं उनसे सीनियर थी। वह मेरे सबसे करीब थे और मैंने उस प्यार के बारे में भी कभी नहीं सोचा था जो उन्होंने मुझे दिया।’ लेकिन उन्होंने पंचम की कहानियों के लिए अपने प्यार के बारे में खुलकर बताया। उनकी अचानक मृत्यु मेरे लिए दुनिया खत्म होने जैसा था लेकिन जब मैं उम्मीद छोड़ती थी तो मैं सिर्फ उनकी तस्वीर देखती थी और मैं उनकी आवाज़ रिकॉर्डिंग रूम में सुनती थी जिसमें वह चिल्लाते हुए कहते थे, ‘आओ बेबी, तुम कर सकती हो, तुम ऐसा कर सकती हो जैसा कोई नहीं करता।’ और यह मुझे आगे बढ़ने के लिए बहुत आत्मविश्वास दे देता था और मैं ज़्यादा अच्छा गाती थी। वह एक बार मेरे सपने में आए और उन्होंने मुझसे सफेद साडि़यों को पहनने से मना किया क्योंकि मैं विधवा नहीं थी, वह हमेशा मेरे साथ थे। उस रात के बाद मैंने शायद ही कभी सफेद साड़ी को पहना।’

आशा उन लोगों के लिए बहुत बड़ी मदद है जो गरीबी में रह रहे हैं या फिर म्यूनिसिपल अस्पतालों में बीमार पड़े हैं या फिर मर रहे हैं। मैं कुछ अस्पतालों में गया और उन्होंने मुझे यह बताने से मना कर दिया कि आशा ने इन लोगों की कितनी मदद की है। हमारी एक बार की बातचीत में उन्होंने मुझे बताया, ‘मुझे पता है कि गरीबी क्या है। मैंने लोगों को बिना मदद के मरते हुए देखा है। भगवान ने मुझे वह सब कुछ दिया जो मुझे चाहिए था और इसीलिए मुझे लगता है कि मुझे उन लोगों के लिए कुछ अच्छा ज़रूर करना चाहिए जिन्हें मुश्किल है।’

मंगेश्कर एक ही मंजिल में रहते है और हर किसी के अपने कमरे है लेकिन फिर भी यह कभी-कभी एक दूसरे से मिलते हैं। यह सब एक दूसरे के साथ तभी आते है जब यह अपने पिता और माता का जन्मदिन मनाते हैं। आशा को परिवार में विद्रोही कहा जाता है और वह सिर्फ उनसे तभी बात करते हैं जब उन्हें उनकी असली में ज़रूरत होती है क्योंकि उनमें से किसी एक ने कहा है कि आशा जी को समझाना बहुत मुश्किल है और वह किसी को कुछ भी कह सकती हैं। इसलिए किसी ऐसे से दूर रहना ही चाहिए जो किसी भी बात से समस्या निकाल सकती है।’ आशा ने अपनी जि़ंदगी जी है और वह अस्सी साल की उम्र में भी अपनी जि़ंदगी को भरपूर जीती है।

कुछ महीनों पहले मुझे उन्हें किसी समारोह के लिए आमंत्रित करने के लिए भेजा गया था। वह अपने पोते का जन्मदिन मना रही थी और हर मेहमान को बिरयानी खिला रही थी जो उन्होंने खुद बनाई थी। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं जिस काम के लिए भी आया हुआ हूँ, उसके बारे में वह बाद में बात करेगी और उन्होंने मुझे बिठाकर पहले बिरयानी खिलाई। मुझे वह बिरयानी खानी पड़ी क्योंकि मैंने उनके सनकीपन के बारे में काफी कुछ सुना हुआ था।

आशा भोंसला के बारे में मामूली बातें-

॰ उन्हें अफसोस है कि वह शिक्षित नहीं है। वह कहती है, ‘अपुन तो भाई अंगूठा छाप है, थोड़ी-सी पढ़ी-लिखी होती तो बड़ो-बड़ो की छुट्टी कर देती।’

॰ उन्होंने अपने अतीत को भुलाने का निश्चय किया जिसमें उनकी शादी और अफेयर्स शामिल थे (क्योंकि इससे उनकी जि़ंदगी में सिर्फ दुख होता)

॰ अपनी बड़ी बहन से प्रतियोगिता करने की बात पर एक महिला फिल्ममेकर ने फिल्म भी बनाई लेकिन दोनों बहनों ने फिल्म से कुछ भी संबंध होने से मना कर दिया जबकि फिल्म में उन दोनों के बीच की काफी सामानताएं दिखाई गई थी। दुर्भाग्यवश वह फिल्म फ्लाॅप रही।

॰ जब एक विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट की डिग्री से सम्मानित किया तो उन्होंने कहा, ‘यह अच्छा है, पढ़ो लिखो कुछ नहीं लेकिन यह लोग बड़ी-बड़ी पदवी देते हैं, अच्छा लगता है।’

॰ आशा ने अपनी बहन का पब्लिक मीटिंग में कभी मज़ाक बनाने का मौका नहीं छोड़ा। उनका परिवार उनकी इस हरकत से काफी गुस्सा होता था लेकिन लता ने इस आलोचना को हंसकर टाला।

॰ उनका सबसे पसंदीदा जोक- ‘मैं पंचम से पागलों की तरह प्यार करती थी लेकिन भाषा हमारे बीच हमेशा समस्या रही। काश मुझे बंगाली आती तो हम एक दूसरे को ज़्यादा अच्छी तरह समझ पाते और मैं उन्हें अपनी भावनाओं को ज़्यादा अच्छे ढंग से बता पाती।

॰ उन्हें बहुत अच्छा लगता है जब लोग उनके जन्मदिन यानि 8 सितंबर को मदर मेरी के जन्मदिन के साथ जोड़ते है, ‘अरे वो तो भगवान की माँ है, लेकिन उसकी महानता हर माँ में है और मुझे में ज़रूर है।’

॰ वह और उनकी बहन का एक ही गुरू है और वह है उनका छोटा भाई पंडित हृदयनाथ मंगेश्कर, जिसको वह हिटलर कहती है क्योंकि जब उनके रियाज़ की बात आती है तो वह बहुत कड़क है।

॰ वह सभी भारतीय भाषा को बोल लेती है लेकिन अंग्रेज़ी में उन्हें समस्या है। लेकिन उन्होंने पश्चिम के कई बड़े ग्रुप, बैंड और गायकों के साथ गाया है।

॰ बाकी सभी दूसरी औरतों की तरह वह भी देव आनंद को पसंद करती थी। उन्होंने चार्जशीट के दो गाने भी गाए जिसके लिए उन्होंने देव साहब से कोई पैसा नहीं लिया। जब देव उन्हें उनके चेक देने के लिए गए तो आशा ने कहा, ‘आपने हम को पचास साल से इतना सब कुछ दिया है, अब हम आपसे पैसे की बात करे तो हम से पाप हो जाएगा।’

॰ उनके दो बच्चे हैं। आनंद, उनका बेटा जिसने म्यूजि़क डायरेक्टर बनने के लिए कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हो सका। अब वह लंदन में रहता है और आशा जी के कांसर्ट को देखता है जो विश्व के अलग अलग हिस्सों में होते हैं। वह आशा के दुबई में पांच सितारा होटल को देखता है। उनकी बेटी वर्षा एक विवादस्पद पत्रकार है।

॰ आशा ने भारत की हर भाषा में करीब 10 हज़ार से ज़्यादा गाने गाए हैं।

॰ वह मीडिया के उन लोगों से बहुत गुस्सा है जो उनके और उनकी बहन लता के बीच विवाद खड़ा करते है। ‘आजकल यह छोटे-छोटे बच्चे पत्रकार बनकर आते हैं। उनको मालूम क्या है? वो जो सुनते आ रहे हैं वहीं हमसे बार-बार वही सवाल पूछते हैं। दिल करता है कि उनको पकड़कर बहुत मारूं लेकिन क्या करे हम जो भी करे वो बुरा और वो जो भी करे वो अच्छा। आज कल टीवी वालों और पत्रकारों का राज है और हम उनके हाथ में खिलौने होते जा रहे हैं। यह बकवास बंद करना होगा।’

॰ जब उनसे पूछो कि अस्सी साल की उम्र में उन्हें कैसा लगता है, वह कहती है, ‘उम्र कोई गिनने की चीज़ है? हम सब का हिसाब वो ऊपरवाला रखता है और जिसकी जि़ंदगी में जितना वक्त है उसे ना कम या ज़्यादा जी सकते हैं। इसलिए मैं कहती हूँ कि यही एक पल है, इसमें सारी जि़ंदगी का मज़ा ले लो। यही कहना पंचम का भी था।

॰ अगर उनसे पूछो कि क्यों वह अपनी जि़ंदगी में किसी की कमी महसूस करती है तो वह कहती है, ‘किसी को मिस करने या ना करने से क्या फायदा? जो गया वो गया, हाँ उनकी यादें हमेशा जि़ंदा रहती है और हम को ही जि़ंदा रखती है। और अगर एक इंसान को मैं आज भी याद रखती हूँ और जि़ंदगी भर रखूंगी वो हैं पंचम क्योंकि उसके जाने के बाद जि़ंदगी की हर सुबह, दोपहर और शाम खाली खाली रहती है। सिर्फ रात में कभी कभी हम दोनों मिलते हैं और सुबह तक बहुत सारी बातें करते हैं और अगर एक या कहीं जि़ंदगी है तो हम हमेशा साथ रहने का वादा करते हैं।’


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Mayapuri

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