महान अभिनेता धर्मेंद्र की एक आधुनिक गाथा

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Dharmendra

मैं जो कोई भी हूं, लेकिन मेरा मानना है कि, मुझे अपनी राय, विचार को रखने और अपनी पसंद नापसंद को बताने का अधिकार है और मुझे नहीं लगता है कि कोई भी शक्तिशाली, सर्वोच्च या दिव्य व्यक्ति मुझे रोक सकता है

नए साल के दिन सुबह में मैं बैठा था, और मेरामैन ऑफ 2020’ के बारे में सोच रहा था, और कई नाम ने मेरे दिमाग में घुमने लगे लेकिन मेरी यह तलाश धर्मेंद्र सिंह देओल नाम के साथ खत्म हुई

जो केवल सिर्फ एक वर्ष से लाखों लोगों का पसंदीदा है, बल्कि साठ से अधिक वर्षों से लाखों लोगों की पसंद रहे हैं और मेरा यकीन है की आगे भी रहेगें।

अली पीटर जाॅन 

पहली बार इस हैंडसम, स्ट्रोंग और प्यारे आदमी को  दादर के रंजीत स्टूडियो में देखा था

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मैंने पहली बार इस हैंडसम, स्ट्रोंग और प्यारे आदमी को कब देखा था? यह दादर के रंजीत स्टूडियो में था, जहां वह अपनी शुरुआती फिल्मों में से एक के लिए शूटिंग कर रहे थे।

जिसका नाममेरे हम दम मेरे दोस्तथा, मैं अपने पड़ोसी मिस्टर जेड डी लारी की वजह से स्टूडियो में आने के लिए भाग्यशाली था, जो अमर कुमार के असिस्टेंट थे।

जो फिल्म के निर्देशक थे जिसे प्रसिद्ध उर्दू लेखक राजिंदर सिंह (जिन्होंने बिमल रॉय कीदेवदासके लिए भी संवाद लिखे थे) बेदी ने लिखा था

मैं कॉलेज के पहले वर्ष में एक छात्र था और तब से ही इस नए अभिनेता की पर्सनालिटी पर मोहित था, जिसने देश को उसके पीछे दीवाना कर दिया था और लोग बस उसकी एक झलक पाने का इंतजार करते थे,

मैं सुबह 9 बजे श्री लारी के साथ स्टूडियो पहुंचा, जैसा कि श्री लारी ने मुझसे कहा था, उन्होंने मुझे जलेबियों के साथ मिश्रित गर्म दूध के साथ स्वादिष्ट नाश्ता पेश किया

यह ऐसा नाश्ता जो मैंने पहले कभी नहीं चखा था और फिर हम उस फ्लोर पर चले गए जहा धर्मेंद्र एक गीत की शूटिंग करने वाले थे,

मुझे बताया गया था कि धर्मेंद्र 10:30 के आसपास वहां  जाएगे और मुझे अभी भी यह नहीं पता कि मैंने हीरो के आने तक अपना समय कैसे बिताया होगा

जब वह आए, तब मैं मानो की ट्रान्स में चला गया, मैं विश्वास नहीं कर सकता था कि धर्मेंद्र मुझसे कुछ ही कदम दूर थे।

शूटिंग शुरू हुई और मैंने देखा कि धर्मेंद्र ने गाने की शूटिंग शुरू करने से पहले उन्होंने अपने फॉर्हेड कर्ल लगाने के लिए सारी मुसीबतें झेलीं, और इस साॅन्ग की पहली लाइन थीहुई शाम उनका खयाल गया’।

पहले शॉट को ओके होने में काफी समय लगा और फिर लंच ब्रेक हुआ, मिस्टर लारी ने मुझे अपने सपनों के नायक से मिलवाया और उन्होंने अपने मजबूत हाथों को मेरे सिर पर रखा और कहाखुश रहो बच्चे, आगे क्या बनना चाहते हो?”

बहुत कम कलाकार है जो धर्मेंद्र के जीवन की तरह की यात्रा से गुजरे हैं

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उस समय मुझे उनकी उपस्थिति ने इतना अचंभित कर दिया कि मैं उन्हें जवाब देना ही भूल गया और उन्होंने श्री लारी से मुझे दोपहर के भोजन के लिए साथ लाने को कहा और उस दोपहर का भोजन लाजवाब था।

मुझे कम ही पता था कि धर्मेंद्र सबसे बड़े सितारों में से एक होंगे और मैं उनके बहुत करीब रहूंगा और हम चालीस साल से भी ज्यादा समय तक दोस्त रहेंगे, सिर्फ नाम के दोस्त बल्कि एहसास के सही अर्थ में भी।

मैंने धर्मेंद्र को अपने सभी महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देखा है, और मैं अभी भी उन्हें देख रहा हूं क्योंकि वह एक मैराथन मैन, एक चमत्कारिक व्यक्ति जो अपने ही तरीके से एक महाकाव्य में आगे बढ़ते है।

बहुत कम कलाकार है जो धर्मेंद्र के जीवन की तरह की यात्रा से गुजरे हैं, उन्होंने अस्थिर आधार पर शुरुआत की और फिर धीरेधीरे हर कदम सावधानी से उठाया जिसके कारण उन्हें सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडरों में से एक के रूप में जाना जाने लगा।

जो किसी भी तरह की भूमिका में अच्छे हो सकते थे, वह पहले हीमैन थे, जो इमोशनल रोल, कॉमिक रोल और एक्शन रोल भी निभा सकते थे।

इस हैंडसम आदमी को इंडस्ट्री ने बहुत बड़ा आदमी बनाने की संभावनाएं बहुत कम देखीं, जब प्रतियोगिता में इतने सारे हीरो थे।

हालाँकि उन्हें केवल एक बहुमुखी अभिनेता के रूप में, बल्कि एक अभिनेता के रूप में भी उनके फैंस ने उन्हें स्वीकार किया।

मुझे यह विश्वास करना अटपटा लग रहा है कि, जिस आदमी को गुरपाल सिंहबाबाजैसे लोगों की दया पर रहना पड़ता था हालाँकि उनके कुछ दोस्त पंजाब के साहनेवाल से मुंबई आकर बस गए थे।

धर्मेन्द्र को अपने शुरुआती सफर में कई दिनों तक सही तरह से खाना मिलने के बाद और कभीकभी पानी के साथ मिश्रित गेहूं के आटे को खाने के बाद भी उन्होंने अपना संघर्ष नहीं छोड़ा और उन्हें सफलता मिली और फिर कभी उन्हें पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा।

उस व्यक्ति की सफलता की कहानी पर कोई कैसे विश्वास कर सकता है, जो राजधानी एक्सप्रेस से मुंबई आया था, और उसी ट्रेन से वापस जाने के लिए तैयार था।

जब उन्होंने महसूस किया कि वह हिंदी सिनेमा की दुनिया में खुद को बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं और अपने दोस्त मनोज कुमार के कहने पर वापस गए हैं और इंडस्ट्री में साठ साल के अपने लम्बे सफर के लिए अपनी शर्तों पर काम किया।

जहांआना और जानाजीवन का एक मान्य तरीका है? और कोई कैसे विश्वास कर सकता है कि, जो आदमी पंजाब का एक शर्मीला लड़का था, उसने अलगअलग जाॅनर में तीन सौ से अधिक फिल्में कीं थी और हर तरह दिलों पर राज कर रहे थे।

सभी बड़े बड़े निर्देशकों में से कुछ उन पर इतना विश्वास और भरोसा क्यों करते थे?

धर्मेंद्र का निजी जीवन भी काफी तूफानी रहा है

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हृषिकेश मुखर्जी, रामानंद सागर, प्रमोद चक्रवर्ती, रमेश सिप्पी और पिछले पांच दशक के कई अन्य प्रतिष्ठित निर्देशकों में से कुछ सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों ने उन्हें हमेशा अपनी फिल्मों के हीरो के रूप में क्यों चाहा है?

उन सभी अन्य निर्देशकों के बारे में क्या कहना है जिन्होंने उनके साथ फिल्में बनाने का सपना देखा था और क्या अब उनके सपने कुछ कारणों की वजह से सपना बन कर रह गए हैं?

उन सभी अभिनेत्रियों जैसे माला सिन्हा से लेकर नूतन, साधना, वहीदा रहमान, जया बहादुरी, रेखा, राखी, शर्मिला टैगोर, जयाप्रदा, श्रीदेवी और यहां तक कि दिवंगत जयललिता और अन्य कई अभिनेत्रियों के बारे में क्या कहना है जिन्हें उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला?

मुंबई और पूरे दक्षिण की इंडस्ट्रीज के बारे में क्या जो उन्हेंसभी नायकों से परे एक नायकके रूप में देखते थे? जैसा कि मैं देख रहा हूं, शायद ही कोई ऐसा हीरो रहा है जो इस मुकाम और हैसियत तक पहुंचा होगा

धर्मेंद्र का निजी जीवन भी काफी तूफानी रहा है, उन्होंने प्रकाश कौर से शादी की थी और इस शादी से उनके दो बेटे (सनी और बॉबी) और दो बेटियां थीं।

लेकिन अस्सी के दशक में उन्होंनेड्रीम गर्लहेमा मालिनी के साथ 15 से अधिक फिल्में कीं, और उन्हें उनसे प्यार हो गया और समाज द्वारा सभी आलोचनाओं और मीडिया के हमलों के बावजूद उन्होंने उनसे शादी कर ली।

धरम और हेमा की दो बेटियां हुई, ईशा और अहाना और अब धरम और हेमा दादादादी और नानानानी बन चुके हैं।

अपने जीवन के एक चरण में, धरम ने बहुत शराब पी ली थी, और नशे की हालत मेंमैं इंतकाम लूँगानामक एक फिल्म में उनके काम करने की कहानियाँ हैं,

मैंने उनके साथ ड्रिंक की और उन्होंने एक बार मुझे बताया था कि, “अली, लोग गिलास में पीते होंगे, बोतल से पीते होंगे, ड्रमो से पीते होंगे। हमने तो सारा समुन्द्र ही पी लिया” उन्होंने कुछ साल पहले ही पूरी तरह से शराब पीना छोड़ दिया है, और अब युवा लोगों को शराब का सेवन न करने के बारे में बताते हैं!

85 की उम्र में अपने बेटों सनी, बॉबी और अपने पोते करण सिंह देओल के साथअपनेके सीक्वल पर काम कर रहे हैं

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जब भी धरम से एक गलती के बारे में पूछा जाता है तो वह कहते है कि वह पछताते है कि यह राजस्थान में बीकानेर से भाजपा के टिकट पर राजनीति में प्रवेश करने और चुनाव लड़ने के लोभ के कारण है।

वह राजनीति की दुनिया में एक परम मिसफिट थे और कहा जाता है कि उन्होंने बीकानेर से एम.पी  होने के दौरान अपने खुद के पैसों को भी लगा दिया था, जिसके बाद उन्होंने अब राजनीति में कुछ नहीं करने की कसम खाई है।

और वह लोनावला में अपने फाॅर्म पर पिछले दस वर्षों से अपना टाइम बिता रहे हैं, और खेतों में एक किसान के रूप में काम कर रहे हैं और बगीचों में फल और सब्जियां उगा रहे हैं, और उनके पास स्थिर मवेशी हैं जो किसान की मदद करता हैं।

धरम कभीमिट्टी के बेटेके रूप में जाने जाते थे, अब उन्हें कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है, वह अपने खेत पर सर्वेक्षण करने वाले सभी चीजों के मालिक है और योग्य रूप से एकधरतीपुत्रके रूप में जाने जाते है।

हालाँकि वह अब 85 वर्ष के हैं, लेकिन जैसा कि उन्होंने अपनी एक कविता में कहा है, ‘अभी भी मैं जवान हूंऔर जो वे अपने बारे में कहते हैं, उस पर क्या आप विवाद कर सकते हैं?

वह 85 की उम्र में अपने बेटों सनी, बॉबी और अपने पोते करण सिंह देओल के साथअपनेके सीक्वल पर काम कर रहे हैं और जो एक ऐसी स्क्रिप्ट्स हैंजिस पर पर वह अभी भी विचार कर रहे हैं

मुझे बताओ, भारतीय सिनेमा के इतिहास में कौन सा अभिनेता इतने लंबे समय तक एक्टिव रहा है और अभी भी इतना हैंडसम और भविष्य से संबंधित जीवन और आशावाद से भरा है?

मैंने 30 साल पहले उनमे एक कवि को जन्म लेते देखा था, जब वह अपनी नई कविताएँ मुझे सुनाते थे और मुझसे मेरी राय पूछते थे और मैं अपने विनम्र तरीके से उन्हें कविता लिखने के लिए प्रोत्साहित करता रहता था,

मुझे यह जानकर बेहद खुशी हुई कि वह आज एक शक्तिशाली और बेहद संवेदनशील कवि बन गए हैं, जरा एक नजर डालिए और उस कविता को पढ़िए जो उन्होंने अपने बारे में लिखी है और आपको पता चलेगा कि कैसे एक गरम लेकिन नरम धरम के दिल की धड़कन सुनाई देती है!

महान माँ की ममता

अजीम बाप की शफ़ाकत का

अजीमशान एक एहसान हूँ मैं

इंसानियत का पुजारी,

छोटों का लाड प्यार,

बड़ों का आदर सम्मान हूँ मैं

दुनिया सारी बन जाए एक कुनबा

एकता की हसरतों का अरमान हूँ मैं

नेकी मेरी शक्ति है,

किसी बात से कभी डरता नहीं

ऐसा आत्मसम्मान हूँ मैं.

मोहब्बत है खुदा ओर खुदा है मोहब्बत

खुदा की मोहब्बत का एक फरमान हूँ मैं.

प्यार दुआएं है आपकी

सींचती हैं जज्बात को मेरे.

इसलिए आज भी जवान हूँ मैं.

खता अगर हो जाए,

तो बक्श देना यारों

गलतियों का पुतला,

आखिर एक इंसान हूँ मैं

अनु-छवि शर्मा


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