एक नई कहानी फ़िल्म निर्माताओं के लिए “ये कैसा गोलमाल- 2021”

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इस स्तम्भ में हम एक नई कहानी देते हैं, कहते हैं बॉलीवुड में कहानी का अभाव है इसके लिए हम सीधे लेखक से आप तक कहानी पहुंचा रहे हैं।

पाठकों को मनोरंजन देने के साथ यह कहानी खासकर फ़िल्म-निर्माताओं के लिए भी है कहानी के लेखक हैं सुरेश गर्ग।

शरद राय

कई ग्राहक बंगला देखने आते हैं पर उस बंगले में रहने वाले भूत को देख कर भाग जाते हैं

Suresh Garg Story- Bhoot bhootni ki shaadi

परेश रावल अपनी पत्नी रेखा के साथ अमेरिका जाने की तैयारियां करते हैं पर बंगला उनके अमेरिका जाने में रुकावट बन जाता है, वह बिकने का नाम ही नहीं लेता है।

कई ग्राहक बंगला देखने आते है पर उस बंगले में रहने वाले भूत को देख कर भाग जाते हैं वो भूत किसी और को नज़र नहीं आता है, सिर्फ उन ग्राहको को दिखाई देता है जिन्हें वह डरा कर भगा देता है वो भूत नहीं चाहता कि यह बंगला बिके।

परेश रावल ने अब तक कई दलालो से सम्पर्क कर लिया है पर उस भूत के रहते हुए कोई भी दलाल उस बंगले को नहीं बेच पाते हैं। फिर वे अपने दलाल भाईयों की सलाह पर अमल करते हुए बंगले को किराये पर देने के लिए किरायेदार की तलाश करते हैं।

पर 500 करोड़ की कीमत का बँगला कहीं किरायेदार ही ना हडप ले  इसलिए वे भूत को मार कर वहां से भगाने की सुपारी देने के लिए इन दिनों बेरोजगार और बेघर चल रहे अजय, तुषार, अरशद, कुणाल और श्रेयस से मिलते हैं और भूत को मार कर भगाने की सुपारी देते हैं।

तब अजय कहता है कि भूत को बंगले से भगाने के लिए उन सभी का उस बंगले में रहना जरुरी है। “ हम मिल कर उस भूत को धूल चटा कर बंगले से भगा सकते हैं और हमारे साथ हमारी गर्लफ्रेंड भी उसी बंगले में रहेगी।

और वे लड़कियां भूत को भगाने में हमारी मदद करेगी। इसके लिए सेठजी आपको हम सभी को 10-10 हजार रुपया मंथली पगार देना होगा और हम सबका रहना खाना पीना घुमना फिरना सब फ्री, बोलो मंजूर है ?’’  परेश रावल फौरन रेडी हो जाते हैं और सबको बंगले पर आने का न्योता देते हैं।

तुषार और कुणाल को भूत का नाम सुनते ही दस्त लग जाते हैं और वे शुलभ कॉमप्लेक्स की तरफ भागते हैं। इन पांचों की दोस्ती मुंबई के शुलभ कॉमप्लेक्स में ही हुई थी।

ये पांचों फिल्म लाईन में कुछ बनने का सपना लेकर दूर दराज गावों से मुंबई आये थे और पैसा ना होने की वजह से जहू चोपाटी पर बने बाँकडो पर सो जाते और सुबह शुलभ कॉम्पलेक्स में फ्रेश होकर सब काम पर निकल जाते थे।

इन सभी के साथ एक बात कामन थी कि इन सबकी अपनी अपनी गर्लफ्रेंड हैं जो इनके साथ ही गाँवों से आई हुई थी। अजय पूरा प्लान बना कर सबको बताता हैं कि किस तरह हम मिल कर उस भूत को भगा सकते हैं।

तब अरशद कहता है “ भाई हमसे बड़ा भूत कौन हो सकता है, हम तो भूतो के भूत हैं और हमे देख कर बड़े-बड़े भूत भाग जाते हैं। फिर ये मच्छर भूत कहां टिकेगा हमारे सामने।“

तीन-तीन महीने की ऐडवांस पगार लेकर ये सभी लोग परेश रावल के बंगले में शिफ्ट हो जाते हैं- भूत को जिन्दा या मुर्दा भगाने की सुपारी लेकर। छत की दीवार में अपने बैड पर बैठा भूत इन सब की बाते सुन रहा है।

उसे जब यह पता चलता है कि इन सभी ने उसे इस बंगले से भगाने की सुपारी ली है तब वो भूत बहुत खुश होता है। वह अकेले रह-रह कर बोर हो गया था अब इन लोगों के रहने से कंपनी बनी रहेगी।

अब होता यह है कि भूत इन लोगों के सामने नहीं आता है, लेकिन ये लोग जो भी खाने पीने का समान लाते हैं या राजपाल जो भी खाना बनाता है उस पर यह भूत हाथ साफ करने लगता है।

इनकी शराब पीकर इनका खाना खाकर इन पर हुकुमत करता है। वो शाहरुख नाम का भूत जिसकी अकाल मौत हुई थी और कहते हैं जिसकी अकाल मौत होती है वह मरने के बाद भूत या भूतनी बनते हैं।

तीन महीने इस तरह गुजर जाते हैं जैसे कल की बात हो ! तीन महीने बाद परेश रावल बंगले पर आते हैं और पूछते हैं कि भूत भाग गया क्या?

तब सभी लोग एक स्वर में कहते हैं  -सेठजी यहाँ भूत है ही नहीं। 91 दिन हो गये हैं हमे यहाँ रहते हुए, पर एक बार भी भूत के दर्शन नहीं हुए हैं। आप फौरन इस बंगले को बेच कर अमेरिका चले जाइए।

हम लोग आज ही इस बंगले को खाली कर देते हैं। आप ग्राहक लेकर आइये, आज हम भी तो देखे आपका भूत कहां है? वो दिखने में कैसा है ?

परेश रावल दलालों को भूत के भाग जाने की खबर देकर ग्राहकों को लाने के लिए कहते हैं। जैसे ही ग्राहक उस बंगले में आते हैं कि भूत प्रगट होता है और ग्राहकों को डरा कर भगा देता है। ग्राहक के अलावा भूत किसी और को नज़र नहीं आता है।

ग्राहको के भागते ही परेश रावल उन सभी लड़कों को वहां रुकने के लिए कहता है। फिर एक बार सभी को तीन-तीन महीने की पगार एडवांस देकर भूत को भगाने की सुपारी देता है।

एक मोड़ पर भूत इन सबकी मदद करता है और इन सबसे दोस्ती कर लेता है। भूत उन सभी को सलाह देता है कि जब तक वो इस बंगले में हैं तभी तक तुम सब यहाँ टिके हुए हो।

जिस दिन तुम लोगों ने भूत को भगाया उसी दिन तुम्हें यह बंगला खाली करना पड़ेगा और पगार भी मिलना बन्द। अगर यहाँ रहना है तो गोलमाल तो करना पड़ेगा। वे सब भूत के साथ हो जाते हैं और सेठजी को घुमाते रहते हैं।

अब परेश रावल भूत को भगाने के लिए एक भूतनी का सहारा लेते हैं। जिसे वे एक तान्त्रिक से किराये पर लेते हैं इस शर्त के साथ की वो भूतनी उस भूत को अपने प्रेम जाल में फंसा कर उसे तांत्रिक के पास लेकर आयेगी।

अब कहानी में क्या-क्या मोड़ आते हैं और कैसे कहानी का अन्त होता है वही इस फिल्म का ऐंड हैं।

लेखक: सुरेश गर्ग


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