एक दुर्लभ वॉर जो 2 अक्टूबर को होने वाली है जिसके माध्यम से मनोरंजन में लोगों को शांति मिलेगी

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अली पीटर जॉन

मैं कभी-कभी जीवन प्रदान करने वाले के तरीकों को सोच कर हैरान हो जाता हूं. मुझे इतने दिनों तक जिंदा रखने के पीछे का एक कारण यह है कि मैं  हिन्दी फिल्म की इस विचित्र दुनिया के लोगों की दो से तीन पीढ़ीयों को देख सकूँ।

मैं 5 सालों के बाद यशराज स्टूडियो गया था क्योंकि वहां गेट पर सख्त सिक्योरिटी होती है. मुझे वहां पर बहुत से सवालों का जवाब देना पड़ता है जहां मैं कभी बेधड़क जाया करता था. कोई सवाल नहीं,कोई जवाब नहीं,कोई शक करती नजरें नहीं थी तब. यह कॉन्फ्रेंस रखी गई थी यशराज बैनर के तले आने वाली फिल्म ’वॉर’ के युवा लेखक और निर्देशक से मिलने के लिए,  जिनका नाम है सिद्धार्थ।

मैं सुंदर से युवा लड़के सिद्धार्थ को देखता रहा और अतीत की यादों में चला गया।

सिद्धार्थ हिंदी फिल्मों के महानतम लेखक में से एक इंदर राज आनंद के पोते हैं जिन्होंने 100 से भी ज्यादा फिल्में लिखी है. और उनकी फिल्मों की सबसे खास बात होती थी उनका संवाद जो आज तक सिनेमा प्रेमियों की जुबान पर है. इंदर अपने समय के सबसे ज्यादा पैसे लेने वाले लेखकों में से एक थे. वो मेरे गुरु के.ए.अब्बास के बहुत घनिष्ठ मित्र थे और इसकी वजह से मुझे उन्हें जानने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. उन्होंने मुझे एक नौकरी भी दी थी जिसमें मुझे जेम्स हार्ले चेज़ नोवेल्स को पढ़कर उसकी सिनॉप्सिस लिखनी थी और प्रत्येक सिनॉप्सिस के मुझे 25 रूपये दिए जाते थे. उसके बाद मैं उनके बेटे बिट्टू आनंद का बहुत अच्छा दोस्त भी बन गया जो कि निर्माता थे और उन्होंने शहंशाह फिल्म का निर्माण किया था जिसमें अमिताभ बच्चन,मीनाक्षी शेषाद्री और प्राण मुख्य किरदार में थे. टीनू आनंद जो कि अब्बास साहब के असिस्टेंट थे वो सात हिंदुस्तानी में सातवां हिंदुस्तानी बन सकते थे पर अंतिम क्षण में उन्होंने सत्यजीत रे के साथ काम करने का निर्णय लिया और अपने जाने से उन्होंने एक नए लड़के जो कोलकाता से आया था उसके लिए रास्ता खोल दिया जिसका नाम है अमिताभ बच्चन. जब सिद्धार्थ 8 साल के थे तभी इंदर राज का निधन हो गया था. सिद्धार्थ ने अपने पिता को भी बहुत कम उम्र में ही खो दिया था. सिद्धार्थ को सिनेमा से बहुत प्यार है. वो बहुत से निर्देशकों के असिस्टेंट भी रह चुके है. सिद्धार्थ ने बहुत सी फिल्मों के स्क्रीनप्ले भी लिखे हैं जैसे, हम-तुम।

उनकी प्रतिभा को लोगों ने बहुत जल्दी पहचाना और  उन्होंने अपनी फिल्म निर्देशन जल्द ही शुरू कर दी. सिद्धार्थ को यात्रा पर आधारित फिल्में बनाना बहुत पसंद है. उन्होंने सलाम नमस्ते,तारा रम पम, बचना ए हसीनों  अंजाना अंजानी और बैंग बैंग जैसी फिल्में बनाई हैं।

उन्होंने यह निर्णय लिया कि वो 5 साल का ब्रेक लेकर  दुनिया घूमेंगे और  किताबे पढ़ेंगे जिनके लिए उन्हें वक्त नहीं मिलता  था फिल्में बनाने के दौरान. और इन्हीं किताबों को पढ़ने की वजह से उन्हें अपनी आने वाली फिल्म ‘वॉर’ की भी स्क्रिप्ट मिली है.  फिल्म की शूटिंग बहुत से अलग-अलग देशों में हुई है. सिद्धार्थ ने इस स्क्रिप्ट पर बहुत लंबा काम किया है जो कि रितिक रोशन को बहुत पसंद आया. रितिक के साथ सिद्धार्थ ने इससे पहले बैंग-बैंग में भी काम किया था।

इस फिल्म के लिए सिद्धार्थ  को दो  हैंडसम लड़के  चाहिए थे और इसके लिए  उनको  रितिक रोशन को साइन करने में कोई दिक्कत नहीं हुई. रितिक रोशन साल में एक या दो फिल्में करते हैं और उनको साइन करना इतना भी आसान नहीं होता है. यह कहानी है दो जिगर वाले लड़कों की जिसमें एक है सुपरमैन और दूसरा है उसका आज्ञाकारी शिष्य. शिष्य के रोल के लिए सिद्धार्थ को टाइगर श्रॉफ बेस्ट ऑप्शन लगे कि क्योंकि टाइगर श्रॉफ फिल्म इंडस्ट्री के मुश्किल स्टंट करने वालों में से एक है. वाणी कपूर इस फिल्म को साइन करने से पहले थोड़ी असमंजस में थी पर स्क्रिप्ट सुनने के बाद उनको ऐसा लगा कि फिल्म में उनका किरदार भी बहुत महत्वपूर्ण है।

फिल्म को शूट करने में सिद्धार्थ को किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई क्योंकि यशराज फिल्म्स हमेशा से अपने निर्देशकों का साथ देते हैं. फिल्म के नाम के अनुसार ऐसा अनुमान लग रहा है कि फिल्म में बहुत से एक्शन सींस होंगे. और सिद्धार्थ  ने यह वादा भी किया कि फिल्म  में ऐसे एक्शन सींस है जो दर्शकों ने पहले कभी नहीं देखे होंगे. फिल्म का गाना ‘घुंघरू टूट गए’ पहले से ही बहुत ज्यादा मशहूर हो चुका है. सिद्धार्थ ने साफ-साफ कहां है कि घुंघरू टूट गए गाने का पुराने गाने से कोई लेना देना नहीं है बस पुराने गाने के दो शब्द इस गाने से मिलते हैं. उन्होंने ये भी बताया कि फिल्म 2 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है जिस दिन गांधी जी का जन्मदिन भी है. शांति की प्रतिमा माने जाने वाले  महात्मा गांधी के जन्मदिन के दिन सिद्धार्थ अपनी वॉर फिल्म रिलीज करने वाले हैं. और वो कहते हैं कि इस फिल्म का टाइटल वॉर रखना एक संयोग ही है।

खबरें ऐसी भी हैं कि बैंग बैंग का सीक्वल भी बनेगा पर अभी इसके बारे में कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है।

अभी फिलहाल सिद्धार्थ के लिए जो बात मायने रखती है वो ये है कि वो अपनी फिल्म वॉर से दुनिया में खुशियां बाँटें।

क्या वॉर इस बिगड़ी हुई दुनिया में शांति ला पाएगी? इसके लिए दर्शकों को 2 अक्टूबर तक इंतजार करना होगा. 2 अक्टूबर को यह जवाब मिल जाएगा कि क्या सिद्धार्थ आनंद जिनका नाम गौतम बुद्ध के नाम पर है,जो दुनिया में शांति फैलाने के लिए जाने जाते हैं,उस नाम के आधुनिक वर्जन साबित होंगे या नहीं?

इंदर राजा आनंद और बिट्टू आनंद, आप लोग कहां हो मेरे दोस्तों ? आप लोग जहां भी हो मैं आपसे यही कहना चाहता हूं कि सिद्धार्थ बहुत ही अच्छा और साहसी काम कर रहा है इस दुनिया में जहां आप लोगों ने कभी शासन किया था।

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