रविवार की एक शाम धर्मेंद्र और उनकी कविताओं के साथ

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अली पीटर जॉन

पहली बार मैं इस शर्मीले शायर से मिला था जिसने बहुत अच्छी कविताएं लिखी थी और मुझसे कहा कि मैंने लिखने की कोशिश की और बस ये लिख दिया। ये उन्हें भी पता था कि  कविताएं लिखना सबके बस की बात नहीं है और यह शर्मीले शायर थे सुपरस्टार धर्मेंद्र। मुझे उनकी कविताएं इतनी पसंद आई कि मैंने उनसे लिखते रहने को कहा। अगली बार मैं उनसे उनके बंगले पर  मिला और  शायद उन्होंने मेरे सुझाव को सीरियस ले लिया था। उन्होंने मुझे अपनी बहुत सी लेखनी दिखाई.

उन्हें उनके छोटे भाई अजीत सिंह  देओल जो अभय देओल के पिता है उनकी बहुत अच्छी कंपनी मिली हुई थी ।  अजीत सिंह देवल भी बहुत अच्छी कविताएं लिखा करते थे और अपने भाई से एक्सचेंज भी करते थे। अजीत सिंह सफल अभिनेता नहीं थे और कुछ समय पहले उनका निधन हो गया।

धर्मेंद्र

धरम जी ऐसा मानते हैं कि उर्दू  सबसे सर्वश्रेष्ठ भाषा है दुख और खुशी दोनों ही भावनाओं को दर्शाने के लिए। उन्होंने अपनी सारी कविताएं उर्दू में ही लिखी है उर्दू भाषा उनके दिल के बहुत करीब है।

दो घंटे मैं और मेरे कुछ मित्र जो गायक और कंपोजर है  राजा का शेफ और रुबायत जहां, हम लोग धर्मेंद्र जी के आवाज में एक के बाद एक कविताएं सुनते रहे। सारी कविताएं एक से बढ़कर एक थी और मैं यह सोच रहा था कि क्या यह वही इंसान है जिसे हम लोग गरम धरम कहते हैं। धर्मेंद्र जी ने अपने जीवन से जुड़ी हर घटना के ऊपर कविताएं लिखी हैं ।उन्होंने एक कविता लिखी थी जब वो दिलीप कुमार से बहुत प्रभावित हुए थे और हर सुबह यही सोचते थे कि क्या वो दिलीप कुमार की तरह बन पाएंगे। उन्होंने  मुंबई में अपने स्ट्रगल के दिनों पर भी कविता लिखी है। प्यार पर,एक सामान्य इंसान पर ,किसान पर, अमीर गरीब के बीच झगड़े पर और अपने मातृभूमि पर, इन हर विषयों पर धरम जी ने कविताएं लिखी हैं।
मुझे उनके द्वारा लिखी कविता में सबसे अच्छी कविता लगी जो उन्होंने चर्चगेट स्टेशन पर लिखी थी। कविता  उन्होंने चर्चगेट स्टेशन से आने के बाद लिखी थी जब वहां उनका ऐसा स्वागत किया गया जैसे कोई बिछड़ा हुआ यार वापस आ गया हो। अब वो बहुत अच्छी कविता लिखने की क्षमता रखते हैं और एक अच्छे कवि को कोई रोक नहीं सकता।

धर्मेंद्र

सूर्य डूबने वाला था और अब उनके प्यार में डूबने का समय आ चुका था और यह प्यार है शराब जो वो हर शाम पीते हैं अपने पुराने दोस्तों के साथ कार्ड खेलते हुए। साथ में कुछ न्यूज़ और पुराने गाने भी सुना करते हैं। इसके बाद सोने चले जाते हैं और सुबह जल्दी उठते हैं और फिर जिम में व्यायाम करते हैं।

और जब यह महान धरम कविता सम्मेलन खत्म होने वाला था कि तभी एक सेवक ने हाथ में गुलाब लाकर धर्मेंद्र जी को दिया। यह गुलाब एक महिला है जो हर रविवार धर्मेंद्र जी के लिए लाती है चाहे वो कहीं भी क्यों ना हो। उस गुलाब को चूमते हुए धरम जी की आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने बताया कि यह करोड़ों लोगों का प्यार है जिनकी वजह से आज  वह सबके प्यारे धरम हैं।


धरम के अनुसार धरम
महान मां की ममता अजीम बाप की शफकत का अजीमो-शान इक एहसान हूं मैं,
इंसानियत का पुजारी, छोटों का लाड़ प्यार बड़ों का आदर सम्मान हूं मैं,
दुनिया सारा बन जाए एक कुनबा
एकता की हसरतों का अरमान हूं मैं,
मोहब्बत है खुदा और खुदा है मोहब्बत खुदा की मोहब्बत का इक फरमान हूं मैं,
प्यार मोहब्बत दुआएं आपकी
सींचती है जज्बात को मेरे,
इसलिए आज भी जवान हूं मैं,
खता अगर हो जाए बक्श देना यारों गलतियों का पुतला आखिर एक इंसान हूं मैं

मैं 84 साल के मोस्ट हैंडसम एक्टर के चेहरे पर झुर्रियां ढूंढने की कोशिश कर रहा था और उन  झुर्रीयों में मुझे हजारों कहानियां  छुपी दिखी।

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