2020 ने बहुतों से उनकी सांसें छीनी मगर तुम्हारी बक्श दी – आरती मिश्रा

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मैं जिंदा हूँ

दुआ यह है की सबकी सांसें इसी तरह चलती रहे और दुआ है कि यह दुआ कुबूल हो

ओह सांसें चल रही हैं मेरी आंखें देख रही हैं मेरी कान सुन रहे हैं मेरे

शुक्रिया

शुक्रिया ऊपर वाले का की मैं जिंदा हूँ

“सोचो ज़रा ध्यान से सोचो” आरती मिश्रा

Aarti mishra

अक्सर हमें हर चीज़ के लिए आभारी होना चाहिए रहने के लिए छत है, खाने के लिए रोटी है, पहनने के लिए तन पर कपड़ा है. मगर इस साल तो आभार इस बात का है की हम जिंदा है।

हाँ इस साल ने, इस साल के बिगड़े हालातों ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया की यह ज़िन्दगी क्या खेल है।हम यहाँ छोटी-छोटी चीज़ों के लिए रोते हैं और कई लोग तो रोने के लिए जिंदा ही नहीं बचते इस साल ने हमें जान की कीमत समझा दी।

ऐसा लगता है मानो इस ज़िन्दगी से विशाल समुन्द्र में हमारी रोज़मर्रा की परेशानियां महज़ एक बूँद के समान हैं अब एक पानी बूँद एक पूरे समुन्द्र के आगे क्या ही है।

मगर फ़िर भी हम इन बूंदों सी परेशानियों में उलझे रहते है और वहां पूरा समुन्द्र बाक़ी पड़ा रहता है, 2020 को लगभग हर कोई कोस रहा है।

सोचो कितने खुशकिस्मत हो जो कोसने का मौक़ा मिल रहा है, जो कोसने के लिए जिंदा बचे हो वरना आस पास ज़रा नज़र घुमा कर देखो, जिन्हें तुम कल तक इस राह से गुज़रते हुए देख रहे थे वो आज अपनी किसी और ही मंजिल पर पहुँच गए हैं।

वो मंजिल जिसे उन्होंने खुद नहीं चुना मगर वक़्त खुद ही ले गया वो है मौत कल जिसके बारे में बातें कर रहे थे वो आज इस दुनिया में रहा ही नहीं जिसके साथ कल तक तुम बातें कर रहे थे वो आज खुद तुम्हारी बातों का मुर्दा बन गया है।

सोचो ज़रा ध्यान से सोचो

2020 ने बहुतों से उनकी सांसें छीनी मगर तुम्हारी बक्श दी ज़िन्दगी की सब परेशानियाँ हल हो जाए अगर यह साँसे चलती रहे।क्यों ना इस साल में रोने का कारण ढूँढने की बजाये हँसने का बहाना ढूंढा जाए।

दोनों में मेहनत उतनी ही लगेगी. मगर फर्क सिर्फ इतना है की एक से ज़िन्दगी कटेगी और दुसरे से जिंदगी जी जाएगी. तो एक ही तो ज़िन्दगी है तो क्यों न इसे काटने की जगह जिया जाए।

आने वाला साल भी ना जाने क्या-क्या तोहफे लाया होगा मगर एक बात तो मान ली है कल हो न हो आज है ना तो बस इस आज के लिए शुक्रिया कहो।

अपने ग़मों के लिए आंसू बहाने से अच्छा अपनी ज़िन्दगी की छोटी-छोटी खुशियों के लिए ख़ुशी के आंसूं बहाए जाए अपने आस पास के लोगों को सफ़र का हमराही समझा जाए।

जिस से मिलें उस से मुस्कुरा कर मिलें क्योंकि क्या पता वो इंसान कल हो न हो, या हम कल हो न हो तो हाँ शुक्रिया, शुक्रियाकि मैं जिंदा हूँ।


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Mayapuri

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