अब बेहतरीन काम करने का संघर्ष जारी है -सोहित विजय सोनी

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सोहित विजय सोनी

-शान्तिस्वरुप त्रिपाठी

संघर्ष ही जीवन है। हर क्षेत्र में सफलता की सीढ़ियां चढ़ने में हर इंसान को संघर्ष करना ही पड़ता है। मगर हालात व परिवेष के अनुसार कुछ लोगों के लिए यह संघर्ष काफी लंबा हो जाता है। कुछ लोगों के लिए यह संघर्ष काफी कष्टप्रद भी हो जाता है। मगर अंततः विजयश्री और सफलता उसी को नसीब होती है जो कि इमानदारी से अपने कर्मपथ पर निरंतर संघर्ष करते हुए आगे बढ़ता रहता है।

यह वह संदर्भ है, जिसके तहत हम टीवी अभिनेता सोहित सोनी की चर्चा कर सकते हैं। जिन्हे दर्शक सब टीवी के सफलतम सीरियल ‘‘तेनालीरामा’’ में पिछले तीन वर्ष से लगातार मणि के किरदार में देखते हुए उनके अभिनय की प्रष्ंासा कर रहे हैं। वैसे सोहित सोनी ‘‘तू मेरा हीरो’’, ‘पोलिस फैक्टरी’, ‘दिया और बाती हम’’, ‘भाभी जी घर पे है’, ‘भाग बकुल भाग’, ‘‘जीजाजी छत पे हैं’’, ‘शादी के स्यापे’’, ‘हप्पू की उलटन पलटन’’ जैसे सीरियलों में विभन्न किरदार निभाते हुए नजर आते रहे हैं। अब वह जल्द ही सीरियल ‘‘एक्सक्यूज मी मैडम’’ में एक शायराना अंदाज में बातें करने वाले डाक्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं।

सोहित सोनी की अभिनय यात्रा काफी कठिन रही है। फरीदाबाद से मुंबई तक की उनकी यात्रा में काफी व्यवधान रहे हैं। उन्होंने अब तक एंकरिंग से लेकर काफी काम किए हैं। बतौर अभिनेता सबसे पहले वह 2015 में ‘‘स्टार प्लस’’ के हास्य सीरियल ‘‘मैं तेरा हीरो’’ में हीरो के हास्य किरदार में नजर आए थे।

प्रस्तुत है सोहित विजय सोनी से हुई बातचीत के अंष..

सोहित विजय सोनी

सबसे पहले ‘‘मायापुरी’’ के पाठकों को अपने बारे में बताएं?

हम मूलतः गोंडा,उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। पर लंबे समय से फरीदाबाद, हरियाणा में रह रहे हैं। मैं बहुत ही मध्यमवर्गीय परिवार का बड़ा बेटा हूं। मेरे पिता जी प्रायवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। हमारे घर में शिक्षा का माहौल नही है। मेरी मम्मी की आदत है कि अपना मजाक उड़वाकर लोगों को हंसाना। मेरे अंदर भी मेरी माता जी के यह गुण विरासत में आ गए। तो मैं बचपन से ही उल जलूल हरकते किया करता था, मेरे दोस्त मेरा मजाक उड़ाते थे, पर उनके चेहरे पर मुस्कान भी आती थी। पढ़ने में भी तेज नहीं था, पर स्कूल जाया करता था।

मेरी मां का सपना था कि मैं बड़ा होकर डाक्टर बनूं। मुझे याद है जब मैं पांचवीं कक्षा में पढ़ता था, तभी मेरी मम्मी ने मुझे मोहल्ले के एक क्लीनिक में जाकर बैठा दिया था। एक सप्ताह बाद मेरे पिता ने मुझे वहां से हटाकर खान क्लीनिक में काम दिलवा दिया। मैंने खान क्लीनिक में झाड़ू लगाने से लेकर दूसरे छोटे काम करते हुए अपनी नौंवी कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की।

क्लीनिक की नौकरी और अभिनय?

जब क्लीनिक पर नौकरी कर रहा था, उसी दौरान टीवी पर ‘लाफ्टर चैलेंज’’ देखा, पर मुझे लगा कि यह हमारे जैसे लोगों के बस की बात नही है। मगर एक दिन जब मैंने इस कार्यक्रम में अपने फरीदाबाद के ही एक लड़के को देखा, तो मेरे अंदर इच्छा जागी कि मैं भी ऐसा कुछ कर सकता हूं। क्लीनिक पर मुझे प्रतिमाह दो सौ रूपए भी मिलने शुरू हो गए, पर मैं वहां से काम करना छोड़कर एक नर्सिंग रूम में काम करने लगा, जहाँ मुझे छह सौ रूपए मिलते थे। लेकिन मेरा मन नहीं लगता था। मेरे मन में तो लाफ्टर चैलेंज ही घूमता रहता था। मेरे दिमाग में यही बात घूमती रहती थी कि मुझे कुछ अलग तरह का मनोरंजन वाला काम कर लोगों का मनोरंजन करना है। फिर नर्सिंगरूम की नौकरी व स्कूल से बंक करके टीवी चैनलों के दफ्तरों के चक्कर लगाने लगा। रजत शर्मा के टीवी चैनल के कार्यक्रम में दर्शकों के बीच जाकर बैठा। वहीं पर मेरी मुलाकात सुनील पाल जी से हुई और दूसरी तरफ मुझे जनक अस्पताल में नौकरी मिल गयी।

2010 में मैंने तय किया कि मुझे परफ़ॉर्मर बनना है। जून 2011 के बाद मैं गुड़गांव के एक एम्यूजमेट पार्क में हर शनिवार व रविवार शौकिया एंकरिंग कर दर्शकों का मनोरंजन करता रहता। धीरे धीरे वहां से मुझे प्रति दिन डेढ़ सौ रूपए मिलने लगे, जो कि फरीदाबाद से गुड़गांव आने जाने में ही खर्च हो जाते थे। पर 2013 तक मैं इस एम्यूजमें पार्क से जुड़ा रहा। साथ में ऑडिशन भी देता रहा। 2013 में मुझे बीजेपी का एक विज्ञापन करने का अवसर मिला। इससे मेरा हौंसला बढ़ गया। उसके बाद मुझे कई इवेंट करने को मिल गए। मैने ‘अंजन’ टीवी पर कुछ काम किया। फिर मुझे सबसे पहले टीवी सीरियल ‘‘तू मेरा हीरो’’ करने का मौका मिला।

फरीदाबाद से मुंबई आना कब हुआ?

सच कहूं तो मैं पहली बार 2015 में दो दिन के लिए मुंबई आया था। यहां पर मेरे रहने की कोई जगह नहीं थी। मैं मुंबई में किसी को भी पहचानता नही था। मुंबई में मुझे एक इंवेंट की एंकरिंग के लिए ही आने का मौका मिला था, उसी वक्त फरवरी 2015 में मैंने अजय देवगन के साथ हाजमोला की एड के लिए नोवाटेल होटल में ऑडिशन दिया। मैंने अजय देवगन के सामने परफार्म किया और टॉप दस में चुना गया, पर तभी मेरी बहन की तबियत खराब होने के खबर मिली, तो मैं सब कुछ छोड़कर वापस फरीदाबाद लौट गया। वहां पर इवेंट में व्यस्त हो गया था। सितंबर में गणपति के दौरान एक लाइव शो को करने के लिए बुलाया गया। मैं मुंबई आया और एक मित्र दुबे के साथ आकर उनके मित्र के यहां रूका।


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Mayapuri

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