INTERVIEW: भारतीय लोग अच्छे मेहमान नवाज़ होते है – अभय देओल

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लिपिका वर्मा 

अभय देओल 2014 में फिल्म,”वन बय टू ‘ में बड़े परदे पर नजर आये  थे। अब  फिल्म, “हैप्पी भाग  जाएगी” से बड़े परदे पर वापसी कर रहे है, सो बेहद खुश है। “हैप्पी भाग  जाएगी” एक रोमांटिक कंडे है जो 19 अगस्त को बॉक्स ऑफिस पर अपना जलवा दिखलाने आ रही है। मुद्दसर अली द्वारा निर्देशित इस फिल्म में डायना पेंटी भी वापसी  कर रही है।

इसी फिल्म के प्रोमोशन्स के दौरान अभय देओल से हमारी संवादाता लिपिका  वर्मा ने भेंट की -पेश है  बातचीत के कुछ अंश –

आपने विदेश में पढ़ाई की है और आप अच्छे  रसोईया भी है  

जी हाँ! मैं  अपने कुछ दोस्तों के साथ रहा करता था विदेश में, वह सारे के सारे  बहुत अच्छे कुक है। सो मैंने उनसे स्वादिष्ट खाना  बनान सीख लिया है। आज ही यहाँ इंटरव्यू के लिए रवाना  होने से पहले मैंने स्वादिष्ट ग्रिल्ड चिकन और कुछ उबली हुई सब्जियां बना कर पेट भर खा कर यहाँ आया हूँ। दरअसल यहां हमारे पास कई सेवक होते ही जो हर तरह से हमारी देख रेख किया करते है और वह ना हो तो माँ तो होती है हमारी जो हमारे लिए भर पेट भोजन  बनाने के लिए त्तपर रहती है। happy-bhag-jayegi-

देओल परिवार के लड़के कुछ अच्छे डांसर्स नहीं है, लेकिन आप ने ज़िंदगी ना मिलेगी … में अच्छा खासा डांस  किया है यह कैसे मुमकिन हुआ?

ऐसी बात नहीं है कि मुझे नाचना पसन्द नही है,पर हाँ मुझे कुछ 10 दिनों की रिहर्सल जरुरी है। बल्कि इस फिल्म में -ज़िन्दगी ना मिलेगी – मैंने नाराजगी भी जतलाई थी क्योंकि उन्होंने मुझे  केवल 2 ही दिन दिए थे रिहर्सल के लिए। दरअसल में डांस यदि स्क्रिप्ट से मेल ना खाता हो तो मुझे ऐसा डांस करना कतई पसन्द ना होगा दूसरे डांस का मेरे किरदार पर उल्टा असर नही पड़ना  चाहिए। मैंने अपनी पिछली फिल्म, “हनी मून ट्रेवल्स” में जम के डांस किया है।  डांस से मुझे परहेज नहीं है पर कहानी की डिमांड  है तो मैं जरूर नाचना चाहूंगा।

आप विदेश में भी रह चुके है तो क्या वहां के लोग इमोशनल नहीं होते है ?

विदेश में अपनी पढ़ाई पूरी की है मैंने, किन्तु यह कहना गलत होगा कि विदेशी मूल-भूत  के लोग इमोशनल नहीं होते है। एक पिता का अपने पुत्र के प्रति प्रेम वैसा ही होता है जैसे की हमारे भारतवर्ष में। हाँ किन्तु यदि अपने माँ बाप को घर में कोई बच्चे ना  रखना चाहे तो यह वहां भी होता है। वहां मेरे बहुत ही इमोशनल दोस्त रहे है और आज भी मेरे सम्पर्क में है। हाँ, यदि कुछ अलग है तो हमारे यहां मेहमान नवाजी खूब जम कर की जाती  है किन्तु सर्विस अच्छी नहीं मिलती है। विदेशों में बेहतरीन सर्विस दी जाती है। हमारी और उनकी संस्कृति बहुत अलग है हम लोग देसी है। भ्रूण हत्या यहां होती है वहां नहीं, अपितु दोनों स्त्री -पुरुष हो समान अधिकार दिए जाते है।abhay-deool

डायना पेंटी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा ?

वह भी मेरी तरह कॉम्पेटीटिव नहीं है। वह दूसरी हीरोइन्स की तरह बिलकुल नहीं है जो आइटम नंबर और ड्रामा इत्यादि सब एकसाथ करना चाहेगी। दरअसल में डायना को इस फिल्म में – जब डांस करने को कहा गया तो उसने निर्देशक से 50 सावल पूछ डाले । मैंने भी उसे समझाया कि ऐसा नहीं है- एक लड़की होने की वजह से ही डांस करने को कह रहे है ,किन्तु यह कहानी का एक अहम  हिसा है। आपको डांस करना चाहिए। तब जाकर वह फिल्म में डांस करने के लिये राज़ी हुई। यह कहना ज्यादती नहीं होगा -हमारी फ़िल्मी दुनिया बहुत ही कॉम्पेटीटिव है।  ”

आपका फ़िल्मी  सफर कैसा रहा ?

अपने इस 10/12 साल के सफर में मैंने बहुत कुछ सीख लिया  है। कुछ गलतियां भी की है। अब उन गलितयों को कैसे सुधार पाता  हूँ यह तो समय ही बतलायेगा। आर्ट एवम कमर्शियल फिल्म्स दोनों ही करना चाहता हूँ किन्तु कुछ अलग कहानी  होनी चाहिए जो मुझे और मेरे फैंस को भी पसन्द आये। हमारी  आज की पीढ़ी में, ‘नंबर गेम” का महत्व कुछ ज्यादा हो गया है। कंटेंट के ऊपर  पैसो को महत्व दिया जा रहा है बॉक्स ऑफिस पर 200-300 करोड़ होना चाहिए यह भी एक कम्पटीशन ही है। किन्तु मुझे  लगता है की आने वाली पीढ़ी कंटेंट को ज्यादा भाव देगी। abhay-deol

अपने पिताजी को मिस करते है क्या आप? उन्होंने आपको क्या मन्त्र दिया था ?

जी हाँ, मुझे हमेशा लगता है कि मेरे पिताजी मेरे  साथ हमेशा से ही है। अगर आज वह ज़िंदा होते तो मेरी फिल्म, “हैप्पी भाग जाएगी” देख  बहुत प्रसन्न होते। उन्होंने हमेशा से मुझे यही  शिक्षा दी -किसी भी प्रतियोगिता का हिस्सा कभी मत  होना अपितु हमेशा  अच्छा काम करना


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Mayapuri

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