INTERVIEW!! “रोमांस की जटिलता यदि जीवन को सुखमय बना दे तो उससे अच्छी चीज़ कुछ भी नहीं होती है” अभिषेक कपूर

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लिपिका वर्मा

निर्देशक अभिषेक कपूर की फिल्म रॉक ऑन, कायपोचे इत्यादि ने बॉक्स ऑफिस पर झंडे गाढ़े हैं पर फितूर क्या  रंग दिखलाती है यह तो भगवान ही जानें ? रेखा ने बीच में फिल्म छोड़ दी तो तब्बू ने बेगम का किरदार करने को  हामी भरी। कई सारी दिक्कतों के बाद यह फिल्म अब पर्दे पर रिलीज़ हो चुकी है। निर्देशक अभिषेक को इस फिल्म से बहुत उम्मीदें जुडी हैं, क्यूंकि यह उनकी पहली रोमांटिक फिल्म है।

एक अनूठी भेंटवार्ता में लिपिका वर्मा के ढ़ेर सारे सवालों का जवाब बड़ी सरलता से अभिषेक ने दिए –

“फितूर” ही क्यों रोमांटिक जोनऱ में ?

बचपन में, “ग्रेट  एक्सपेक्टेशेन्स यह किताब पढ़ रखी थी और हमेशा से ज़हन में था कि कभी कोई रोमांटिक  कहानी निर्देशित करूँगा तो इसी किताब की रोमांटिक कहानी को पर्दे पर पेश करूँगा। इस कहानी में प्यार की जटिलता बखूबी पेश की गयी है और वही एंगल मुझे भी बहुत अच्छा लगा।

रोमांस की जटिलता के बारे में आपका क्या कहना है ?

देखिये, यही एक रिश्ता होता है जहाँ पर दूसरा बन्दा आपकी पर्सनेलिटी पर हावी हो जाता है आपका व्यक्तित्व कंट्रोल करने लगता है। प्यार ही एक ऐसा रिश्ता है जहां पर एक दूसरे का स्पेस खो जाता है। यदि इस मोहब्बत  की खुशबू हो तो जीवन सफल हो जाता है पर यदि उसकी बदबू फैल जाये तो जीवन नष्ट हो जाता है। रोमांस में नजदीकियां हो तो बहुत अच्छा भी लगता है। यह रिश्ता एक अजीब रिश्ता होता है। हर कोई इस रिश्ते से गुजरने की इच्छा रखता है। रोमांस की जटिलता यदि दो जीवन को सुखमय बना दे तो उससे अच्छी चीज़ कुछ भी नहीं होती है।

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एक मर्द हमेशा चाहता है कि औरत उसका पहला प्यार हो ? जबकि औरत चाहती है कि मर्द उसका आखिरी प्यार हो। ..क्यों?

यह एक बायोलोजिकल मुद्दा है, आदमी हमेशा अपने आपको को अव्वल रखना चाहता है, यह उसकी दिमागी उपज है। इसे मेल सिंड्रोम कहा जा सकता है। यह सब हमारी सामाजिक तौर तरीके की वजह से होता आया है। प्यार में दिल हावी होता है जबकि दिमाग नहीं और यदि कोई भी दिमाग से सोच समझ कर प्यार करे तो वह प्यार नहीं एक समझौता होता है। दरअसल में प्यार में कोई फंडा नहीं होता है, जिसके पास प्यार ही नहीं है तो वह दूसरे को प्यार क्या देगा।

आजकल के बच्चे पन्ने की तरह प्यार बदलते हैं क्या कहना चाहेंगे?

ऐसा नहीं है। प्यार आज भी लोग जी जान से करते हैं। कौन नहीं चाहता कि उसका भी कोई साथी हो ? हर कोई एक साथी की तलाश में रहता है। बस तरीका अलग हो गया है आजकल मोबाइल है, वाट्स एप है और इंटरनेट की सहूलियत भी है सो फ़ास्ट फॉरवर्ड हो गया है रोमांस।

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रेखा के साथ आगे काम करने का चांस मिलेगा आपको ? मलाल है कि रेखा बीच में ही काम छोड़ कर चली गयी ?

देखिये, मैं जरूर चाहूंगा कि रेखा के साथ आगे भी काम करूँ पर मेरे चरित्र कहानी से आते है। पहले मैं कहानी पर काम करता हूँ यदि रेखा मेरे चरित्र के लिए सही होगी तो जरूर उनके पास जाऊँगा। मेरी कहानी का किरदार यदि बराक ओबामा भी होगा तो मैं उसे अप्रोच करूँगा। रही बात रेखा की फिल्म आधे अधूरे में छोड़ कर जाने की तो यह जरूर सोचता हूँ निर्देशक होने के नाते मेरा कोई तो गलत कदम होगा जिस से रेखा को ठेस पहुँची होगी।

अगली कौन से जोनर की फिल्म होगी ?

अभी कुछ सोचा नहीं है। क्यों नहीं पोलिटिकल जोनर भी हो सकती है मेरी अगली फिल्म।

 

 

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Mayapuri