के. पी. सक्सेना

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धर्मयुग और फिल्म पत्रिका मायापुरी के जरिए केपी ने घर-घर में एक खास मुकाम हासिल किया था। उनके कुछ जुमले तो इतने चुटीले होते थे कि पढ़ते-पढ़ते ही पाठक बेसाख्ता हंसने को मजबूर हो जाए। .

केपी सक्सेना का पूरा नाम कालिका प्रसाद सक्सेना था। बाद के दिनों में केपी ने ‘लगान’, ‘स्वदेश’ और ‘जोधा अकबर’ जैसी सुपरहिट फिल्मों के लिए संवाद लिखे। केपी को लगभग एक साल से जीभ का कैंसर था और दो बार उनकी सर्जरी भी हो चुकी थी।

केपी ना सिर्फ हिंदी में बल्कि उर्दू और अवधी में भी सिद्धहस्त थे। साहित्य में विशेष योगदान के लिए उन्हें सन् 2000 में पद्मश्री से नवाजा गया था।

केपी ने दूरदर्शन के लिए सीरियल ‘बीवी नातियों वाली’ लिखा था। केपी लेखक बनने से पहले रेलवे में स्टेशन मास्टर थे। इसलिए रेलवे को लेकर मजाक उनकी रचनाओं का अक्सर प्रमुख हिस्सा हुआ करता था। उनके व्यंग्य में आला दर्जे के ‘डिटेल्स’ व्यंग्य प्रेमियों का मन मोह लेते थे। लखनऊ की नफासत को बेहद उम्दा तरीके से उन्होंने अपनी रचनाओं में पेश किया।


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Mayapuri

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