अचला सचदेव – जो बीस साल की उम्र में ही फिल्मी मां बन गई!

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052-35 Achala Sachdev

मायापुरी अंक 52,1975

फिल्मालय स्टूडियो में अचला सचदेव ऑफिस के बाहर लॉन में ही मिल गई। वह अपने मैकअप रूम की ओर जा रही थी। हमने दुआ सलाम किया और साथ हो लिए। वह सफेद क्लप की हुई साड़ी में बड़ी आकर्षक लग रही थी। हमने कहा

अचला जी, आप इतने आकर्षक व्यक्तित्व के बावजूद असली उम्र से बड़ी उम्र के रोल क्यों करती हैं? क्या आपको हर फिल्म में एक प्रकार के रोल करते हुए ‘बोरियत’ नहीं होती?

हमारा ‘प्रोफेशन’ ही ऐसा है कि न करें तो क्या करें? हालांकि मैं एक प्रकार के रोल करते-करते बोर हो गई हूं। मैं भी प्राण, ओमप्रकाश और प्रेमनाथ की तरह विभिन्न प्रकार की भूमिकाएं करना चाहती हूं किंतु लोग वही घिसी पिटी भूमिकाएं देते हैं। कभी रोल सुनाने के लिए कहो तो रोल तक नही सुनाते। अचला ने भी अपनी मजबूरी बताते हुए कहा। आप को यह जान कर आश्चर्य होगा कि मैं बीस की उम्र में मां के रोल कर रही हूं।

आपने अब तक किसी ऐसे स्टार की मां का रोल भी किया है जो उम्र में आपसे बड़ा हो? हमने पूछा।

क्यों नहीं, मैंने राजकपूर अशोक कुमार, करण दीवान की मां के रोल किये है। और उसी राजकपूर के साथ पिछले दिनों ‘कल और आज कल’ में पत्नी का रोल किया। और पांच-छ: फिल्मों में अशोक कुमार की भी पत्नी बन चुकी हूं। अचला सचदेव ने बताया।

हमने प्राय: देखा है कि सैट पर जो मान और आदर स्टार्स को दिया जाता है, कैरेक्टर आर्टिस्टों को वैसा ट्रीटमैंट नहीं मिलता, ऐसा क्यों है। जबकि देखा जाए तो फिल्में कैरेक्टर आर्टिस्टों पर ही चलती है जैसे ‘विक्टोरिया न. 203’ ‘धर्मा’ ’बिदाई’ आदि! क्या आपने स्वयं ऐसा महसूस किया है कि आपके साथ गलत व्यवहार हो रहा है? हमने पूछा।

यही सही है कि कैरेक्टर आर्टिस्ट ही फिल्मों को चलाते हैं। इसके बावजूद सेल वैल्यू स्टार्स की अधिक होती है। और शायद इसीलिए हमारी कद्र कम की जाती है। मुझे याद है कि मैं एक फिल्म में जया भादुड़ी के साथ काम कर रही थी तो एक आदमी आकर मुझसे मैकअप रूम खाली करवा दिया क्योंकि वह रूम जया भादुड़ी को चाहिये था। उसके बदले में मुझे एक दूसरा और गंदा-सा मैकअप रूप दिया गाय। यही नहीं फिल्म ‘चोर सिपाही’ के लिए जब मुझे कंपनी वाले साइन करने आये तो मैंने रोल सुनाने को कहा। इस पर वह बोले हमें पता होता कि आपको भी रोल सुना कर ही साइन करना पड़ेगा तो हम दुर्गा खोटे को ना साइन कर लेते मुझे उनका रवैया इतना बुरा लगा कि मैंने वह फिल्म छोड़ दी। ऐसी ही बात ‘आलिंगन’ की शूटिंग के दौरान हुई मेरी बहन का देहांत हो गया था। लेकिन निर्देशक ने मुझे छुट्टी नहीं दी। और मुझे गैर जरूरी तौर पर पांच दिन खंडाला रोके रखा और उसके बाद जो शूटिंग की उसमें मेरे संवादों पर Close Up हीरोइन का बताया। इसलिए मुझे फिल्म देखकर बड़ा दुख हुआ। क्योंकि एक तो मैं बहन की मौत के बावजूद शूटिंग करने गई। दूसरे जिस कार से मुझे खंडाला भेजा गया उसका ड्राइवर बड़ा अनाड़ी था जिसके कारण कार का एक्टिडैंट हो गया। और मुझे मजबूरन ट्रक में बैठकर खंडाला जाना पड़ा और उसके बाद भी मेरा काम कट कर दिया अचला सचदेव ने दुख भरे स्वर में कहा।


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Mayapuri

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