एक्शन जैक्सन रिव्यु: अजय देवगन और प्रभु देवा की जोड़ी का असफल कारनामा

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फिल्म ‘एक्शन जैक्सन’ के रिलीज से पहले फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों ने कहा था कि यह प्रभु देवा स्टाइल की फिल्म है. मगर फिल्म देखने पर लगता है कि प्रभु देवा कहीं खो गए हैं. अथवा प्रभु देवा मान बैठे हैं कि वह कुछ भी परोस देंगे और लोग पसंद करेगे. कई दक्षिण भारतीय फिल्मों का हिंदी रीमेक कर सफलता बटोर चुके प्रभु देवा ने अपनी स्टाइल की फिल्म बनाते हुए चूचू का मुरब्बा बना डाला. विश्व सिनेमा देखने वालों को इस फिल्म के कई एक्शन दृष्यों को देखते समय अंग्रेजी फिल्मों की याद आ जाए, तो कुछ भी अजूबा नहीं होगा.

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सच यह है कि मनोरंजन के नाम पर एक्शन, काॅमेडी और नृत्य का फूहड़ तथा निम्नस्तरीय मिश्रण है फिल्म ‘एक्शन जैक्सन’. इस फिल्म में सिनेमाघरों के अंदर आम दर्षकों को खींच सकने वाले मूल मनोरंजन का भी अभाव है.

फिल्म के रिलीज से पहले प्रभु देवा ने कहा था कि उनकी फिल्म ‘एक्शन जैक्सन’ छह साल से 80 साल की उम्र के हर इंसान को पसंद आएगी. फिल्म को देखने के बाद लगता है कि उन्होंने यह फिल्म छोटे बच्चों को दिमाग में रख कर ही बनायी है. पर वह यह भूल गए कि आज के बच्चे इतने समझदार हैं कि उन्हें भी ‘एक्शन जैक्सन’ पसंद नहीं आएगी. छोटा बच्चा भी अच्छी कहानी सुनना चाहता है. यदि मान लिया जाए कि यह फिल्म बच्चों के लिए है, पर जिस तरह का भारी भरकम एक्शन और जिस तरह के बोल्ड दृश्य हैं, उन्हे देखकर एक सवाल उठता है कि क्या यह सब 15 साल से छोटे बच्चों को दिखाया जाना चाहिए? सेंसर बोर्ड ने किस आधार पर और क्या समझकर फिल्म को ‘यूए’ सर्टीफिकेट दिया, यह ना सिर्फ विचार, बल्कि बहस का मुद्दा हो सकता है.

यह कहानी है जय उर्फ एजे (अजय देवगन) की है, जो कि बैंकाक में बैठकर आपराधिक धन्दों में लिप्त गंजा माफिया डाॅन षिराज (आनंद राज) का दाहिना हाथ है. एजे पर षिराज की बहन मरीना (मनस्वी मम्गई) का दिल उस वक्त आ जाता है, जब वह अकेले ही षिराज के प्रतिद्वंदी गुंडों के चुंगल से सुकुशल वापस लेकर आता है. पर एजे षादीषुदा है और उसकी पत्नी अनुष्का (यामी गौतम) माॅं बनने वाली है. मगर मरीना हर हाल में एजे को पाना चाहती है. षिराज व मरीना की गलत हरकतों से तंग आकर एजे अपराधिक जिंदगी को त्यागकर अपनी पत्नी के साथ सकून की जिंदगी बिताने के लिए स्विटजरलैंड चला जाता है. इधर मरीना आत्महत्या करने का प्रयास करती है. तब षिराज पुनः एजे का पता लगाकर उसकी सकून भरी जिंदगी में तूफान खड़ा कर देता हैं. षिराज के गुंडे एजे की गर्भवती पत्नी अनुष्का को मारते हैं और उसे अधमरा छोड़कर चले जाते हैं. अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए वह अनुष्का को लेकर मुंबई आ जाता है. अनुष्का मुंबई के अस्पताल मे है और एजे यानी कि जय पुणे में एक होटल में नौकरी कर रहा है. जब पत्नी का अंतिम ऑपरेशन होना होता है, तो एक सप्ताह की छुट्टी लेकर मुंबई आता है. इधर मुंबई में एजे का हमशकल रिषि मारधाड़ लूटपाट के काम में अपने दोस्त मूषा (कुणाल राय कपूर) के साथ लगा हुआ है. रिषी के प्यार में ख़ुशी (सोनाक्षी सिन्हा) पड़ी हुई है. इधर षिराज को पता चलता है कि एजे मुंबई में है. तब एजे के कहने पर रिषि, एजे बनकर अपने दोस्त मूसा के साथ बैंकाक में षिराज के डाॅन में पहुॅच जाते हैं. मरीना व एजे की शादी की तैयारी शुरू होती है. अचानक मुंबई में षिराज के लिए काम करने वाला पुलिस अफसर जानकारी देता है कि एजे मुंबई में हैं, फिर वही एक्शन, मारधाड़ अंततः षिराज, उसकी बहन मरीना व सारे गुंडे मारे जाते हैं. एजे अपनी पत्नी अनुष्का के साथ वापस मुंबई लौट आता है. रिषि व ख़ुशी भी मिल जाते हैं.

यह कहानी हमने लिख दी. मगर फिल्म के लेखकों ने इतनी गड़बड़ स्क्रिप्ट लिखी है कि आधी फिल्म तक पता ही नहीं चलता कि कहानी का सिरा क्या है? फिल्म में हमशकल क्यों है, इसका भी कोई जिक्र नहीं है. जिस तरह की हरकतें एक भाई अपनी बहन से अपने सामने करवाता है, वह तो बहुत भद्दा और भाई बहन के रिश्ते पर कलंक सा लगता है.

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कंटेंट के नाम पर यह फिल्म शून्य है. यह एक स्क्रिप्ट विहीन फिल्म लगती है. फिल्म देखकर लगता है कि निर्देशक ने कुछ गाने फिल्म के लिए थे. फिर इन गानों को फिल्म में बिना सोचे समझे जोड़ते चले गए. फिल्म में गाने कब, क्यों, किस सिचुएशन में होने चाहिए, इसका कोई ठिकाना नहीं. यदि यह कहा जाए कि कुछ एक्शन दृष्यों और कुछ गानों को फिल्माने के बाद उन्हें जोड़ दिया गया है, तो कुछ भी गलत नहीं होगा. इस फिल्म में यामी गौतम ने क्या सोचकर अभिनय किया है? यह समझ से परे वाली बात लगती है. उनके हिस्से में पिटने और एक गाने में नृत्य करने के अलावा कुछ आया ही नहीं. एक खूबसूरत चेहरा चाहिए इसलिए सोनाक्षी सिन्हा हैं. संदीप चैटा का पाष्र्वसंगीत भी निराश करता है. कैमरामैन विजय कुमार अरोड़ा अवश्य बधाई के पात्र हैं.

कुल मिलाकर ‘एक्शन जैक्सन’ को खूबसूरत लोकेशन, कुछ बेहतरीन एक्शन दृश्यों से सजाया गया है, मगर फिल्म में आत्मा नहीं है. यह फिल्म हर उम्र के दर्षकों को निराश करेगी.

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Mayapuri