INTERVIEW: 20 साल बाद भी,”हजरत” के किरदार को लोग याद रखेंगे – अदिति राव हैदरी

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लिपिका वर्मा 

अदिति राव हैदरी ने हमेशा से ही अलग तरह के किरदार निभाए है ” और वो अपने फिल्मी सफर से न केवल सन्तुष्ट है -किन्तु खुश भी।  फिल्म “वज़ीर” ने चाहे बॉक्स ऑफिस पर अपना झण्डा न गाड़ा  हो किन्तु अदिति को यह फिल्म बहुत पसन्द आयी है। अपना तर्क देते हुए अदिति ने ना  केवल इस बात की पुष्टि भी की किन्तु हमारे ढेर सारे सवालों के जवाब भी दिए –

पेश है लिपिका वर्मा के साथ एक अनूठी  बातचीत

आपकी फिल्म वज़ीर ने बॉक्स ऑफिस पर  कुछ  ख़ास जलवा नहीं दिखलाया था ,क्या कहना चाहेंगी आप ?

 पिछले वर्ष की कुछ फ़िल्में मुझे बहुत पसन्द आयी थी उनमें से -फिल्म,”बजरंगी भाईजान” फुल टू  एंटरटेनिंग फिल्म रही ,और पिछले साल की एक और फिल्म,”पीकू” भी बहुत अच्छी रही ,मुझे अपनी फिल्म ,”वज़ीर ” भी बहुत अच्छी लगी । यह बात अलग है कि फिल्म ,”वज़ीर” लोगों को बहुत पसन्द ना  आयी हो। मैं केवल ऐसी फ़िल्में ही करना पसन्द करती हूँ जिनकी कहानी ,निर्देशक और मेरा किरदार भी मुझे  अच्छा लगे।  मैं आप को एक बात बतला दूँ -मेरी फिल्म ,”फितूर” भी बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल नहीं दिखला पाई  ,,किन्तु मेरा किरदार पलट कर यदि मैं  20 वर्ष बाद भी देखूं तो मुझे अपने पर गर्व होगा। यह 15 मिनट का रोल ही सही , किन्तु किरदार में  दम था। उसी प्रकार मुझे अपनी फिल्म ,”वज़ीर” भी बहुत अच्छी लगी। “

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फिल्म “दी  लीजेंड ऑफ़ माइकल मिश्रा” क्या कॉमेडी जॉनर में आती है ?

 “दी  लीजेंड ऑफ़ माइकल मिश्रा” मैंने लगभग एक ढेढ साल पहले इस फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी थी और मुझे यह कहानी पसन्द आयी सो मैंने यह फिल्म तुरंत साईन कर ली। निर्देशक मनीष झा ने यह बहुत ही मजेदार फिल्म बनायीं है। किस एंगल से यह फिल्म कॉमेडी जॉनर में दिख पड़ती है यह तो आपको फिल्म देख  कर ही मालूम होगा।

बोमन और अरशद  वारसी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

 इन दोनों के साथ काम करना बहुत  मजेदार रहा ,दरअसल में कभी कभी तो जब यह दोनों डायलॉग्स बोलते थे सेट्स पर तो मुझे लगता की सही मायने में यह मजाक कर रहे है। यह दोनों इतने जोक्स किया करते की हँसते हँसते मेरे पेट में दर्द हो जाया करता। बोमन एवं अरशद   की वजह से सेट्स पर बिल्कुल भी गम्भीर वातावरण नहीं हुवा करता।  मजाक-मजाक में   फिल्म खत्म होगयी   हमें पता भी नहीं चला।

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अपनी साथी अभिनेत्रियां -हुमा क़ुरैशी  ,राधिका आप्टे इत्यादि को अपनी प्रतियोगी के रूप में देखती है ?

देखिये,हमे  न ही कोई फिल्म और न ही  उस में भाग लेने वाले को प्रतियोगी की श्रेणी में देखना चाहिए। जो प्रतियोगीता  की भावना  को लेकर आगे बढ़ते है उनकी सोच मेरे हिसाब से बहुत ही अटपटी है। मैं  अपने आप को ही अपना प्रतियोगी मानती हूँ। कोई भी रोल करने से पहले उसकी तैयारी पिछले रोल से बेहतर करने की भावना रखती हूँ। सीधी सी बात है यह सारी हेरोइनेस अपना सबसे बेस्ट देती है अपने हर एक चरित्र चित्रण को  और मैं भी यही कोशिश  करती हूँ कि  मुझे अपनी पिछले प्रदर्शन से बेहतर परफॉर्म  करना  है।

आप फिल्मों का चयन कैसे करती है ?आपको कॉमेडी,ड्रामा, रोमांटिक या फिर रोमांचक कथापट  पसन्द है ?

मुझे हमेशा अच्छे निर्देशकों के साथ काम करना पसन्द है। और उसके बाद फिल्म की कहानी  और जाहिर सी बात है मेरा किरदार कैसा है इन सब मुद्दो को जेहन में रख कर ही मैं  फिल्म साईन करती हूँ ?इन सभी चीजों  का मैं धयान  रखती हूँ ।फिर   किसी भी जॉनर की फिल्म क्यों  ना हो मैं  उसका हिस्सा बनने के लिए तैयार होती हूँ।  यदि मुझे यह एडल्ट कॉमेडी तो हमारे देश में होनी ही नहीं चाहिए  क्योंकि  उसे सही मायने में पेश नहीं किया जाता है।

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अपने फिल्मी सफर से आप ने क्या कुछ पाया ?

देखिये जब मैंने फिल्म  ,” दिल्ली 6 ” की थी तो मैं  बहुत छोटी  थी कॉलेज में पढ़ रही थी। मुझे कुछ ज्ञान भी नहीं था। दरअसल में मुझे एंटर्टेन्मन्ट   बहुत पसन्द है। मैं एक कल्चरल बैकग्राउंड से आती हूँ। आज जिस मुकाम पर मैं हूँ काफी सन्तुष्ट हूँ। मैं  अपनी मेहनत  के लिए जानी जाऊ यह मेरी मंसा  भी है।लोग कुछ सालों बात मुझे हज़रात (फिल्म ‘फितूर ‘ के किरदार का नाम) के नाम से जानेंगे तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी। अभी तो और मेहनत करनी है मैं उसके लिए तैयार भी हूँ। “

फिल्म,”और देवदास” की तुलना जितनी  भी  ‘देवदास” फ़िल्में बनी है उससे की जा सकती है क्या?

आप लोगों को  किसी  भी फिल्म की  किसी दूसरी फिल्म से  तुलना नहीं करनी चाहिए। हर फ़िल्मकार का अंदाजे बयान  अलग ही होता है। और सुधीर मिश्रा अपने अलग अंदाज के लिए जाने जाते है। दरअसल में फिल्म के किरदार देवदास के  किरदारों  के बुनियादी सार से जरूर प्रभावित है, किन्तु कहानी बहुत अलग है। मेरा किरदार कॉलेज ड्रॉपआउट का है और किस तरह मैं राजनीती  से प्रभावित हो जाती हूँ यह  आपको देखने को मिलेगा । जाहिर सी बात सुधीर  मिश्रा की फिल्म है तो यह अलग ढंग की ही बनायी जायेगी। और मैं इसका हिस्सा भी इसी लिए बनी  हूँ।

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दीपिका पादुकोण एवं प्रियंका चोपड़ा  ने हॉलीवुड में हमारे देश का नाम रोशन किया ही क्या कहना चाहेंगी आप? क्या उनके पदचिन्हों पर चलना पसन्द करेंगी?

दीपिका और प्रियंका ने हॉलीवुड में भी बॉलीवुड का झंडा फैराया है सो मैं इस बात के लिए उनका आदर करती हूँ। उनकी मेहनत नजर आ रही है। और यह साबित किया है इन दोनों ने कि हम किसी  से कम नहीं है। जहाँ तक मेरी बात है अभी तो पहले मैं अपना पैर बॉलीवुड में ठिक  तरह से जमा लूँ यही मेरे लिए बड़ी बात होगी।


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Mayapuri

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