आदित्य ओम ने मैला उठाने वालों पर बनाई एक फिल्म “मैला”

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मैला उठाने वालों पर बनाई एक फिल्म "मैला"

बॉलीवुड में अब रियलिस्टिक सिनेमा और इशू बेस्ड फिल्मों का दौर है जहां देश और समाज के कड़वे सच को बड़े पर्दे पे पेश किया जा रहा है। तेलुगू और हिदी के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता और निर्देशक आदित्य ओम को निर्देशक और एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर छोटे शहरों और गांवों की कहानियों और समस्याओं ने हमेशा झिझोड़ा है। उनकी अगली फिल्म “मैला” भी देश की एक बड़ी समस्या पर बेस्ड है।

हालांकि भारत में कानून द्वारा प्रतिबंधित मैला उठाना ग्रामीण और शहरी भारत के कुछ हिस्सों में एक सामान्य काम था और अभी भी विपरीत दावों के बावजूद है। शायद ही कभी बॉलीवुड हो या कोई भारतीय फिल्म निर्माता हो शहरी भारत की चकाचौंध से निकल कर समाज के इस सड़े हुए पहलू पर प्रकाश डालने के लिए ग्रामीण भारत के शौचालय की ओर गया हो। फिल्म निर्माता आदित्य ओम ने यही किया है। उन्होंने हाल ही में मैला उठाने के विषय पर एक्सट्रेटा (मैला) नामक अपनी फीचर फिल्म पूरी की है। जिसे यूपी के बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र में फिल्माया गया। फिल्म मैला अगले साल की शुरुआत में अपना फिल्म फेस्टिवल का सफर शुरू करेगी। आदित्य ओम का कहना है कि सरकार के ईमानदार प्रयासों के बावजूद स्वच्छता कर्मचारियों की दुर्दशा दयनीय है और यह प्रथा अभी भी कुछ जगह पे प्रचलित है। फिल्म निर्माता ने आगे कहा कि उनकी फिल्म दुनिया के लिए एक चौंकाने वाली और आंख खोलने वाली मूवी होगी।

आपको बता दें कि आदित्य ओम की पिछली हिंदी फिल्म “मास्साब” ने फिल्म समारोहों में 25 से अधिक पुरस्कार जीते और अब वह थिएट्रिकल और डिजिटल रिलीज के लिए तैयार है। फिल्म में शिवा  सूर्यवंशी और रफी खान सहित कई स्थानीय कलाकारों ने उपयुक्त भूमिका निभाई है।

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