INTERVIEW: फिल्म ‘ओ के जानू’ में आज की युवा पीढ़ी की समस्या का चित्रण है: आदित्य रॉय कपूर

1 min


चैनल के वी जे से अभिनेता बने आदित्य रॉय कपूर की छवि एक रोमांटिक हीरो की बन चुकी है। श्रद्धा कपूर के साथ उनकी जोड़ी हिट है, पर वह दूसरी अभिनेत्रियों के साथ भी अभिनय कर रहे हैं। इन दिनों वह धर्मा प्रोडक्शन की शाद अली निर्देशित फिल्म ‘ओ के जानू’ को लेकर चर्चा में हैं।

आप इन दिनों कितना खुश हैं?

बहुत खुुश हूं। 2017 के नए वर्ष की शुरूआत हो चुकी है। इस वर्ष की मेरी पहली फिल्म ‘ओ के जानू’ प्रदर्शित होने जा रही है। मैं कुछ नर्वस हूं। कुछ चिंतित भी हूं। आखिर परीक्षा है। परीक्षा का डर सताता ही है।

अभी भी परीक्षा का डर सताता है?

स्कूल में जितना डर सताता था, उतना अब नहीं सताता। स्कूल दिनों में मैं पढ़ाई करता ही नहीं था, इसलिए परीक्षा का डर बहुत सताता था। पर अब करियर में इस बात का डर होता है कि फिल्म प्रदर्शन के लिए तैयार है, पता नहीं दर्शकों की क्या प्रतिक्रिया होगी? हम तो चाहते हैं कि हमारी फिल्म, हमारा काम लोगों को पसंद आए।तो मन की इच्छा के पूरे होने का एक डर तो सताता ही है।jaanu

 डरने से या चिंता करने से कुछ होता है?

बिल्कुल नहीं। फिल्म का प्रिंट आने के बाद तो कलाकार के तौर पर मुझे जो कुछ करना होता है, वह सब मैं कर चुका होता हूं। अक्सर मेरी मां भी मुझसे कहती हैं कि, ‘अब तुझे किस परीक्षा का डर सताता है? तुझे जो करना था, तूने कर लिया। अब जब फिल्म बन गयी है, सिनेमा घर में पहुंचने वाली है, उसमें तू कुछ बदलाव तो कर सकता नहीं। तो फिर डर या चिंता किस बात की? ’मैं भी अपनी मां की यह बात मानता हूं। मगर बोलना बहुत आसान होता है,पर उसे अमल में लाना कठिन होता है।

 फिल्म ‘ओ के जानू’ को लेकर क्या कहेंगे?

यह दक्षिण भारत की तमिल भाषा की फिल्म ‘ओ कधाल कंमनी’ का रीमेक है। यह एक रोमांटिक फिल्म है। जिसमें मेरी जोड़ी श्रद्धा कपूर के साथ है। इस फिल्म में वर्तमान समय की युवा पीढ़ी की करियर व प्यार को लेकर सोच व मानसिकता को लेकर कुछ बातें की गयी है।

 तो ‘ओ के जानू’ में करियर और प्यार के बीच टकराव की गाथा है?

वही है। आज के हर युवा की यही समस्या है।shradda_ok

 फिल्म ‘ओ के जानू’ के अपने चरित्र पर रोशनी डालेंगें?

इस फिल्म में मैंने 23-24 साल के युवक आदित्य का चरित्र निभाया है। वह एक साधारण सा युवक है। मगर बड़े बड़े सपने लेकर मुंबई पहुॅचा है। अपने सपने को पूरा करने के लिए वह अमरीका जाना चाहता है। उसका सारा फोकस अपने करियर को लेकर है। इसलिए वह प्यार के चक्कर में फंसना नहीं चाहता।

 इन दिनों हर कोई करियर को लेकर ज्यादा परेशान नजर आता है। ऐसा क्यों?

देखिए, करियर और पारिवारिक रिश्तों  में से किसे प्राथमिकता देना है, यह तो हर इंसान की अपनी सोच व परवरिष पर निर्भर करता है। आप किसी को गलत नहीं कह सकते। हो सकता है किसी के रिश्ते में दम ना हो, इसलिए वह रिश्ते की बजाय करियर को महत्व दे रहा हो। पर कुछ लोगों के लिए रिश्ते ज्यादा अहमियत रखते हैं। मैंने देखा है कि कुछ लोग रिश्तों के लिए अपने करियर को दांव पर लगा देते हैं।ok-shradda

 क्या आपने मौलिक फिल्म ‘ओ कधाल कंमनी’ देखी है?

शाद अली ने मुझे इस फिल्म का ऑफर देते हुए तमिल फिल्म ‘ओ कधाल कंमाई’ दिखायी। मैंने तमिल फिल्म देखी और तुरंत इससे जुड़ने के लिए हामी भर दी थी।

तमिल फिल्म ‘ओ कधाल कंमनी’ तो सफल फिल्म थी।एक सफल फिल्म के रीमेक में अभिनय करने का कितना दबाव था?

दबाब के साथ ही इस बात का आत्म विश्वास आ जाता है कि यह एक सफल फिल्म है। इसे लोग पसंद करेंगे। जिस कथा, विषय को लोगों ने पसंद किया है, जो पटकथा लोगों को पसंद आयी है, उसको करना आपका आत्म विश्वास बढ़ाता है। हम ज्यादा जोश के साथ काम करते हैं।

 मणि रत्नम और शाद अली की संजीदगी व वीजन के अंतर के चलते दोनों फिल्मों में क्या अंतर है?

शाद अली ने मौलिक फिल्म देखी थी।उन्हें बहुत पसंद आयी थी। वह इसे इसी तरह से बनाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने पटकथा में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं किए। हां! हर निर्देषक का अपना एक वीजन होता है। एक सोच होती है। उसके अनुरूप उन्होंने छोटे मोटे बदलाव जरूर किए हैं। जहां तक मैं समझता हूं, शाद अली के भी दिमाग में यह बात थी कि फिल्म इसलिए सफल हुई है,क्योंकि उसकी पटकथा अच्छी थी। हां! गाने के फिल्मांकन में थोड़ा सा बदलाव किया है।ok-jaanu

 एक कलाकार के तौर पर आप ‘आशिकी 2’ और ‘ओ के जानू’ में कहां क्या फर्क महसूस करते हैं?

दोनों की कहानी अलग हैं। दोनों के किरदार अलग हैं। ‘आशिकी 2’ में रॉक स्टार बना था, जिसे जबरदस्त शोहरत मिलती है। वह इस शोहरत से नफरत करने लगता है। उसे जिंदगी से नफरत हो जाती है। पर ‘ओ के जानू’ की कहानी अलग है। इस फिल्म में दो लोग एक ही जगह से आए हैं। दोनों अपने अपने करियर को लेकर आगे बढ़ रहे हैं तथा एक दूसरे में अपनी जगह भी ढूंढ़ रहे हैं। दोनों के लिए प्यार गंभीर मसला नहीं है। जबकि ‘आशिकी 2’ इससे बहुत अलग थी।

 ‘आशिकी 2’ के बाद ‘ओ के जानू’ में भी श्रद्धा कपूर आपकी हीरोइन हैं। उनके अंदर आपने क्या बदलाव महसूस किया?

कोई बदलाव नही आया। आज भी श्रद्धा कपूर की सोच बहुत सकारात्मक है। काम के प्रति उनका पैशन बढ़ा है। कम नहीं हुआ है। मुझसे कहीं ज्यादा फिल्में कर चुकी हैं। अनुभवी हैं। अब उनकी व्यस्तताएं  बहुत ज्यादा बढ़ गयी हैं। इसके अलावा कोई फर्क नहीं है।aditya-roy

 पिछले साल आपकी फिल्म ‘फितूर’ नहीं चली थी?

2016 मेरे करियर में काफी उतार चढ़ाव वाला वर्ष रहा। जब आप किसी फिल्म में अपनी आत्मा व अपनी सारी मेहनत लगा देते हैं और वह नहीं चलती है, तो कितनी तकलीफ होती है, इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं।

 कैटरीना कैफ के संग आपके लिंकअप की खबरें काफी गर्म हैं?

यह सब मीडिया की अपनी कहानियां हैं। कभी हम अपने दोस्त के साथ डिनर करने जाते हैं। तो मीडिया वाले उसी का बतंगड़ बना देते हैं। यह पूरी तरह से बकवास की जा रही है। क्या आप किसी दोस्त के घर तभी जाएंगे, जब उसके साथ आपका ‘लिंकअप’ हो। मैं इस मसले पर ज्यादा नहीं सोचता। मीडिया की बातों पर ध्यान देते हुए मैं लोगों से बात करना या दोस्ती करना बंद नहीं कर सकता।aditya-roy-kapoor_katrina

 तो आप के कहने का अर्थ यह हुआ कि आप सिंगल हैं?

ऐसा ही कहा जाना चाहिए। मैं फिलहाल अपने करियर पर ही ध्यान दे रहा हूं।

आपकी तमन्ना अभिनेता बनने की नहीं थी, तो फिर आप निजी जिंदगी में क्या बनना चाहते थे?

उम्र के साथ मेरे साथ चीजें बदलती रहीं। स्कूल दिनों मैं ब्रूसली जैसा कराटे चैम्पियन बनना चाहता था। फिर क्रिकेटर बनना चाहता था। कालेज में पहुॅचने के बाद मुझे लगा कि संगीत के क्षेत्र में कुछ करना है। मैं एक बैंड के साथ जुड़कर गिटार बजाने लगा। फिर मैं वीजे बन गया। फिर एक दिन फिल्म ‘लंदन ड्रीम्स’ में अभिनय करने का मौका मिल गया। अब मैं अपनी हर फिल्म के किरदार में खो जाता हूं।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये