78 वें वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ओरिजोंटी सेक्शन में प्रातिस्पर्धा करने वाली आदित्य विक्रम सेनगुप्ता की फिल्म “वंस अपॉन ए टाइम इन कलकत्ता” बनी एक मात्र भारतीय फिल्म

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राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता आदित्य विक्रम सेन गुप्ता की बंगला भाषा में तीसरी फिल्म ‘‘वंस अपॉन ए टाइम इन कलकत्ता” का 1 सितंबर से 11 सितंबर, 2021 तक होने वाले 78वें वेनिस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में विष्व प्रीमियर होगा। इस वर्ष इस फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा बनने वाली यह पहली भारतीय फिल्म है, जो कि ओरिजोंटी (क्षितिज) में प्रतिस्पर्धा खंड का हिस्सा बनी है। अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में नवीनतम सौंदर्य और अभिव्यंजक प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाली फिल्मों को समर्पित ओरिजोंटी (क्षितिज) एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता खंड है।

आदित्य विक्रम सेन गुप्ता की पहली फिल्म “लेबर ऑफ लव” के बाद अब उनकी तीसरी फिल्म “वंस अपॉन  ए टाइम”,  वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वापसी का प्रतीक है। फिल्म “लेबर आफ लव” का प्रीमियर वेनिस डेज सेक्शन में हुआ था।इतना ही नही इस फिल्म ने किम की-डुक और लॉरेंट कैंटेट जैसे दिग्गजों की फिल्मों के साथ षिरकत कर सर्वश्रेष्ठ डेब्यू का फेडोरा पुरस्कार जीता था। आदित्य विक्रम सेन गुप्ता की दूसरी फिल्म “जोनाकी” का प्रीमियर 2018 में संपन्न इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल रॉटरडैम में हुआ था। सच्ची घटनाओं से प्रेरित आदित्य अपनी तीसरी कथात्मक विशेषता में कलकत्ता को श्रद्धांजलि देते हैं,जिसकी कहानी एक शोक संतप्त माँ के जीवन का अनुसरण करती है। जो एक नई पहचान, प्रेम और स्वतंत्रता को खोजने की सख्त कोशिश कर रही है। लेकिन जल्द ही उसे पता चलता है कि वह शहर में एकमात्र भूख से पीड़ित सफाईकर्मी (मेहतर) नहीं है।

फिल्म “वंस अपॉन  ए टाइम इन कलकत्ता” में श्रीलेखा मित्रा और ब्रत्य बसु जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ सत्रजीत सरकार, अरिंदम घोष, रीतिका नोंदिन शिमू और अनिर्बान चक्रवर्ती के साथ-साथ युवा नवोदित कलाकार शायक रॉय ने अभिनय किया है। तो वहीं फिल्म में आदित्य के पिता त्रिदीब सेनगुप्ता सहित कुछ गैर-पेशेवर अभिनेताओं ने भी अहम किरदार निभाए हैं।

फिल्म “वंस ए टाइम इन कलकत्ता” के 38 वर्षीय निर्देषक आदित्य विक्रम सेन गुप्ता किसी परिचय के मोहताज नही है। वह भारतीय फिल्म निर्माता, कलाकार और संगीतकार हैं।उनकी पहली फिल्म ‘वर्डलेस आशा जौर माझे’ यानी “लेबर ऑफ लव” 2014 में प्रदर्षित हुई थी, जिसका विष्व प्रीमियर ‘वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के ‘वेनिस डेज’ खंड के तहत हुआ था और आदित्य विक्रम सेन गुप्ता को “सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म निर्देषक” के ‘‘फेडिओरा” पुरस्कार से नवाजा गया था। इस फिल्म को 2015 में ‘‘स्वर्ण कमल के साथ दो रास्ट्रीय पुरस्कारों से भी नवाजा गया था। फिलहाल यह फिल्म ‘अमेजॉन प्राइम वीडियो’ पर स्ट्रीमम हो रही र्है। फिर उनकी दूसरी फिल्म “जोनाकी” का प्रीमियर रॉटरडैम के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में हुआ था। इस फिल्म को 2018 में दो पुरस्कारों से नवाजा गया था। फिलहाल ‘जोनाकी’ नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है। अब आदित्य जिस षहर को अपना घर मानते हैं यानी कि कलकत्ता को श्रृद्धांजली देने के मकसद से अपने कैरियर की तीसरी फिल्म ‘‘वंस अपॉन ए टाइम इन कलकत्ता” बनायी है।जिसका निर्माण भारत, फ्रांस व नॉर्वे के बीच एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग से किया गया है। आदित्य विक्रम सेन गुप्ता इन दिनों अपनी चैथी फिल्म पर काम कर रहे हैं।

‘‘पाल्मे डी” की ओर से पुरस्कृत फिल्म “नूरी बिल्गे सीलन” के छायाकार गोखन तिर्याकी ने इस फिल्म को अपने कैमरे से फिल्माया है। जबकि फिल्म के संगीतकार मषहूर डच संगीतकार मिन्को एगर्समैन है।

वेनिस फिल्म फेस्टिवल में अपने कैरियर की तीसरी फिल्म के साथ वापसी करने को लेकर रोमांचित व उत्साहित लेखक ,निर्देशक,एडीटर आदित्य विक्रम सेन गुप्ता कहते हैं-  “वेनिस किसी भी फिल्म निर्माता के लिए एक स्वप्निल उत्सव है। इस फेस्टिवल में हम अपनी एक बंगाली फिल्म के साथ सत्यजीत रे की जन्म षताब्दी के मौके पर वापसी करने का अवसर पाकर बेहद आभारी और उत्साहित हैं।”

फिल्म के निर्देषक आदित्य विक्रम सेन गुप्ता फिल्म के संबंध में चर्चा करते हुए कहते हैं-‘‘यह फिल्म कलकत्ता शहर और उसके लोगों के लिए व्यक्तिगत अहसास और भावनाओं की परिणति है।खासकर जब यह तेजी से बदलती दुनिया को पकड़ने की कोशिश करती है। मैंने इस फिल्म में वास्तविक पात्रों और वास्तविक घटनाओं का सहारा लेकर अतीत के कम्युनिस्ट शहर की विभिन्न परतों को कुरेदते हुए एक ऐसी मानवीय स्थिति का चित्रण करने का प्रयास किया है,जो काफी दुःखद है और अभी तक आशा और खुशी से भरी है।यह फिल्म लगातार बढ़ते महानगर में सांस लेने के लिए हांफ रहे लोगों की आकांक्षाओं और संघर्षों पर प्रकाश डालती है। दर्शकों के लिए मैंने रंगीन पात्रों के साथ, कलकत्ता के गंदे पानी में एक वास्तविक झलक बनाने की कोशिश की है,जहां सभी बिना डूबे अपना खुद का एक कोना खोजने की बहुत कोशिश कर रहे हैं।’’

फिल्म की कहानीः

फिल्म “वंस अपॉन  ए टाइम इन कलकत्ता’की कहानी के केंद्र में इला है। अपनी बेटी के खोने के बाद इला न केवल एक माँ के रूप में अपनी पहचान खोती है, बल्कि यही उसका अपने पति के साथ रहने का एकमात्र कारण भी है। जब उसे बैंक द्वारा होम लोन देने से मना कर दिया जाता है, तो उसका बॉस,जो कि एक विशाल पोंजी स्कीम का मालिक है, उसे एक ऐसा प्रस्ताव देता है, जिसे स्वीकार करने के लिए वह संघर्ष करती है। इला अपने सौतेले भाई के साथ फिर से रिष्ता जोड़ना चाहती है, ताकि वह अपने परिवार के पुराने थिएटर के आधे हिस्से को पुनः प्राप्त कर सके, लेकिन उसका सौतेला भाई ऐसा करने से साफ साफ मना कर देता है। इला का सौतेला भाई इला के अंधेरे भाग्य व भविष्य के लिए इला को ही दोषी ठहराता है। इन्ही परिस्थितियों के बीच इला के बचपन का प्रेमी पुनः अवतरित होकर उसे एक नई शुरुआत करने के लिए उत्साह, आशा व उम्मीद की किरण दिखाता है। जैसे ही इला उस जीवन को जीना शुरू करती है, जिसका उसने अपने लिए सपना देखा था, उसे अहसास होता है कि वह भूख से भरे शहर की एकमात्र सफाईकर्मी नहीं है।

“विशबेरी फिल्म्स” द्वारा प्रस्तुत, ‘‘कैथरीन डसार्ट प्रोडक्शंस (फ्रांस)’’ और ‘‘डुओफिल्म एएस (नॉर्वे)’’ के सहयोग से ‘‘फॉर फिल्म्स” द्वारा निर्मित फिल्म को कान्स एल ‘एटलियर, एनएफडीसी फिल्म बाजार, सोरफोंड और सीएनसी सिनेमा डू मोंडे का समर्थन है।

 


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