आमिर खान के ‘सत्यमेव जयते’ के बाद…

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धारा 377 को लेकर खेमों में बट रहा है बाॅलीवुड
अब तक बाॅलीवुड में एक स्वर होता रहा है। लेकिन, आमिर खान के ‘सत्यमेव जयते’ के एक एपिसोड, जिसमें धारा 377 पर खुली बहस हुई है एपिसोड, के बाद बाॅलीवुड के लोग दो खेमों में बटे दिखाई पड़ रहे हैं। एक खेमा आमिर खान के साथ है जो  आई पी सी 377 के विरोध में है और दूसरा खेमा उन लोगों का है जो धारा 377 को सही मानते हैं। सही मानने वालों में एक हैं- डाॅ. जगदीश बाघेला,  जिन्होंने एक फिल्म बनाई है – ‘द इंटरनेशनल प्राॅब्लम’। इस फिल्म में बड़ी प्रमाणिकता के साथ सेक्शन 377 का समर्थन किया गया है।

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पाठकों को बता दें कि ‘377’ है क्या? कुछ दिनों से देश में एक खबर सुर्खियां बन रही हैं कि ‘होमो सेक्सुअलिटी’ और लेस्बियन- निटी को सामाजिक स्वीकृति मिले और इसे कानूनी जामा पहनाया जाए। यानि – होमोसेक्सुअल और लेस्बियन-पार्टनर (समलिंगी) स्वेच्छा से समाज में रह सकें, विवाह कर सकें और उनकी आजादी को कोई रोक टोक न हो। इस अधिकार को दिया जाए या न दिया जाए, यह विषय लम्बे समय से बहस का मुद्दा रहा है। खैर, कुछ समय पहले दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने इस मांग पर शिकंजा कस दिया, यह कहकर की यह एक सामाजिक अपराध है। हमारी संस्कृति इसे विद्रूप मानती है। अदालत ने धारा 377 के तहत इस क्रिया को रोकने के लिए कठोर दंड की व्याख्या की है। अब कुछ लोग इस धारा के विरोध में बहस छेड़े हुए हैं। आमिर खान के ‘सत्यमेव जयते’ का एक एपिसोड इसी विरोध को समर्पित था, जिसमें लोगों ने कैमरे के सामने खुलकर भाग लिया है। बाॅलीवुड के काफी ‘लोग होमो’- और ‘लेस्बिनियटी’ के लिए लुकी छिपी चर्चा में रहे हैं जो आमिर के साथ हैं।
और कुछ लोग हैं जो डाक्टर बाघेला की तरह ‘आमिर का विरोध’ कर रहे हैं। उनका मानना है होमोसेक्सुअलिटी और लेस्बियनिटी को रोकने के लिए सेक्शन 377 जैसे कानून का होना जरूरी है। बाॅलीवुड के काफी लोगों ने (नाम न जाहिर करने की शर्त पर) डा. वाघेला का समर्थन किया है। डा. जगदीश ने इस विषय को अपनी फिल्म ‘इंटरनेशनल प्राॅब्लम’ में बड़ी परिपक्वता से उठाया है। वह कहते हैं- ‘सोचने वाली बात है कि क्या यह प्राकृतिक है? अगर यह ‘प्राकृतिक’ होती तो जानवरों में भी होती। दुनिया का कोई भी जानवर होमो या लेस्बियन नहीं होता, फिर इंसान क्यों? इस विषय पर खुली बहस होना जरूरी है लेकिन मर्यादा और सामाजिक व्यवस्था को बनाये रखना भी तो कोई चीज है।’

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डा. वाघेला की फिल्म में इस विषय पर डाक्टरों की परिचर्चा के रूप में लम्बी बहस है, जो आमिर खान के ‘सत्यमेव जयते’ एपिसोड से बहुत पहले शूट किया जा चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट ने आमिर जैसों की दलील पर धारा 377 की मान्यता को खत्म करने की बात कहा था। फिर सामाजिक सोच वालों की गुहार पर उच्चतम न्यायालय ने इस अपराधिक सोच को संयमित रखने वाली धारा 377 को जरूरी बताया है। डा. वाघेला कहते हैं- ‘मेरी फिल्म में हमने इस विषय का दोनों पक्ष रखा है। अगर एप्पल कंपनी के प्रमुख खुद को ‘गे’ कहते हुए गर्व महसूस करने की बात कहते हैं तो हम सामाजिक-सोच की गुहार क्यों नहीं लगा सकते।’ डाक्टर आगे कहते हैं- ‘अगर पश्चिमी देशों में ‘भ्स्-ज्’ को छूट दी जा रही है तो इस्लामिक देशों में इसका विरोध भी तो है। हमें अपने समाज की चिन्ता करनी चाहिए।’ फिल्म ‘द इंटरनेशनल प्राॅब्लम’ में बताया गया है कि कैसे परिस्थितियों का शिकार होकर एक लड़की को लड़के जैसा और लड़के को लड़की जैसा बना दिया जाता है… और बाद में वे ही बच्चे ‘होमो’ या ‘लेस्बियन’ बन जाते हैं। जन्म से कोई वैसा नहीं होता। जो कुदरत के खिलाफ हो, उसे रोकने में कानूनी अड़चन क्यों खड़ी की जाए, यह हमारी फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को समझना चाहिए।’
फिलहाल आमिर खान के शो का एपिसोड, जिसमें धारा 377 पर चर्चा हुई है, पूरे देश में चर्चा है। बाॅलीवुड के बहुत से लोग होमो-लेस्बियनिटी को खुली छूट देने के विरोधी हैं। कुछ समर्थक हैं जो आमिर की तारीफ कर रहे हैं मगर वे भी जुबान बंद रखकर। यानि – इस विषय को लेकर पहली बार हुआ है जब बाॅलीवुड खेमों में बंट गया है।?


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Mayapuri

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