आखिर, ये रवि कपूर कौन थे?

1 min


Aakhir, ye ravi kapoor kaun tha ........ (3)

अली पीटर जाॅन

एक सफलता की कहानी के पीछे बहुत सी कहानियां होती हैं, विशेष रूप से फिल्म इंडस्ट्री में और जीतेंद्र की सफलता की कहानी उनमें से एक है! और मुझे उन शुरुआती दिनों में वापस जाने दे, जब एक निम्न मध्यम वर्गीय पंजाबी परिवार रामचंद्र नामक एक चॉल में रहता था, जो एक चर्च और एक पुराने सिनेमा घर के बीच में स्थित थी जिसे सेंट्रल सिनेमा कहा जाता था जहाँ मराठी फिल्में ज्यादातर दिखाई जाती थी, और हिंदी फिल्मों को एक बार ही दिखाया जाता था! यह एरिया गिरगाँव था, जो मिल मजदूरों और छोटे समय के सफेदपोश कर्मचारियों के साथ घनी आबादी वाला स्थान था!

कपूर परिवार एक ऐसा परिवार था जिसका उनके सभी पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध था, और इसका कारण था श्री अमरनाथ कपूर का बड़ा बेटा जो एक बहुत अच्छा डांसर था, जिसने दीवाली, दशहरा और विशेष रूप से गणेश उत्सव जैसे त्योहारों को खास बना दिया था! रवि कपूर वह लड़का था जो हर पुरुष, महिला और बच्चे का पसंदीदा था और पास के कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ता था, जिसे सेंट, सेबेस्टियन हाई स्कूल कहा जाता था, जहाँ से उन्होंने मैट्रिक किया था, जिसके बाद वह आगे कोई पढाई नहीं करना चाहते थे क्योंकि वह फिल्मों में एक अभिनेता बनना चाहते थे।

उन्होंने अपने पिता को अपनी महत्वाकांक्षा के बारे में बताया था! उनके पिता नकली ज्वैलरी के डीलर थे, जो उन्होंने प्रमुख फिल्म निर्माता को सप्लाई की थी! उन्होंने अपने पर्स में अपने बेटे रवि की एक छोटी सी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर रखी और कई फिल्म निर्माताओं को दिखाई! एक सुबह, वह महान फिल्म निर्माता डॉ वी.शांताराम के साथ थे, और उन्हें अपने बेटे की तस्वीर दिखाई और फिल्म निर्माता ने तस्वीर में उस लड़के को पसंद किया और अगली सुबह श्री कपूर को अपने बेटे को अपने साथ लाने के लिए कहा!

Aakhir, ye ravi kapoor kaun tha ........

उत्साहित पिता और पुत्र लालबाग के राजकमल स्टूडियो पहुंचे और डॉ.शांताराम ने रवि कपूर को एक एक्स्ट्रा एक्टर के रूप में काम करने की पेशकश की और उन्हें जयपुर में अपनी फिल्म सेहरा की शूटिंग में शामिल होने के लिए कहा! डॉ.शांताराम रवि कपूर का हौसला बढ़ाते रहे और अंत में उन्हें अपनी फिल्मगीत गाए पथरांे ने में अपनी बेटी राजश्री के साथ लॉन्च किया! लेकिन डॉ.शांताराम रवि नाम से बहुत खुश नहीं थे, और उन्होंने उन्हें जीतेंद्र नाम दिया और रामचंद्र चॉल के उस अज्ञात रवि कपूर से वह भारतीय सिनेमा के सबसे सफल सितारों में से एक बन गए थे!

और आज पांच दशक से अधिक समय बाद उस लड़के रवि कपूर, क्षमा करें जीतेंद्र ने पांच सौ से अधिक फिल्मों में काम किया है। उनके पास पाली हिल पर एक बंगला था, जो एक अंडरग्राउंड बंगला है औरकृष्णा के निर्माण के बाद अब वे वहाँ नहीं रहते हैं, जिसे कई लोगनया बकिंघम पैलेस कहते हैं, उनके पास एक समय पर हैदराबाद और आंध्र प्रदेश और चेन्नई के अन्य शहरों में बंगले थे, जब वह हिंदी फिल्मों में काम करने वाले सबसे व्यस्त हिंदी फिल्म स्टार थे, जिन्होंने पूरी साउथ इंडस्ट्री पर भी राज किया और शूटिंग की! वह लड़का रवि कपूर जिन्हें अब जीतेन्द्र के नाम से जाना जाता था जो एक प्रमुख निर्माता भी है औरबालाजी को भी एक बड़ा नाम बनाने में इनका योगदान रहा हैं!

आज रवि कपूर जब पीछे मुडके देखते होगे तो उनको यकीन नहीं होता होगा की एक चॉल में रहने वाला एक ऐसा स्तंभ बना हुआ है जिसको देखकर लोगांे को ख्वाबों पर और इंसान की मेहनत पर यकीन करने का दिल सिर्फ चाहेगा बल्कि ख्वाब को सच में बदलने के लिए महेनत करने पर भरोसा बढ़ जाएगा!


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये