मुझे अपनी उम्र से कोई प्रोब्लम नहीं- अजय देवगन

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अजय देवगन एक बार फिर अपने पुराने सुपरहिट अंदाज में नजर आए हैं। वह अपनी पहली फिल्म फूल और कांटे में बाइक पर स्ट्रेच करते नजर आए थे, और उसके बाद यह उनका सिग्नेचर स्टेप बन गया। जब भी अजय देवगन इस स्टेप को करते हैं तो फिल्म सुपरहिट हो ही जाती है। अजय देवगन दे दे प्यार दे के पोस्टर में ऐसा ही पोज करते नजर आ रहे हैं। दिलचस्प पोस्टर के साथ यह फिल्म भी बहुत ही दिलचस्प बताई जा रही है जिसमें अजय देवगन के साथ तब्बू और रकुल प्रीत सिंह हैं। अजय देवगन से हुई खास बातचीत:

फिल्म में आपने अपनी उम्र को लेकर खुलकर बात की है। एक्टर होने के नाते उम्र को न छिपाने की क्या वजह रही?

अब मेरी कोषिष यही रहती है कि अपनी असली उम्र से मिलते-जुलते किरदार ही निभाऊं। दे दे प्यार दे को अगर छोड़ दे तो इससे पहले भी मैंने 50 साल वाले किरदार निभाए हैं। मैं ही नहीं, दूसरे एक्टर्स भी ऐसा कर रहे हैं। वे पिता के रोल कर रहे हैं। सच तो यह है कि अब उम्र मैटर नहीं करती। अब ऐसे उम्रदराज किरदार लिखे भी जा रहे हैं और दर्शकों द्वारा इन किरदारों को खूब पसंद भी किया जा रहा है। इसलिए स्कोप बढ़ गया है।

क्या आपको अपनी उम्र से कोई प्रोब्लम नहीं है?

अगर ईमानदारी से कहूं तो मैं जब अपनी उम्र के अक्षय कुमार या सलमान खान से बात करता हूं तो पता चलता है कि किसी को भी अपनी उम्र से कोई प्रॉब्लम नहीं है। सारी दुनिया को तो पता है कि हमारी उम्र क्या है। जब हमारा जन्मदिन आता है तो सब तरफ यही सब तो छपता है कि यह 50 साल के हुए, वह 40 साल के हुए। विकिपीडिया में जाकर आप किसी की भी उम्र देख सकते हैं। मैं हमेशा से अपनी उम्र के नंबर को अपनाता हूं, वरना मैं फिल्म गोलमाल में भी कहता कि मेरी उम्र से जुड़ी लाइन हटा दो।

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क्या आपको लगता है कि रोमांस के मामले में भी अब सिनेमा बदल गया है?

दरअसल, पहले एक ही किस्म की फिल्में बनती थीं, जिसमें आपको यंग लड़की के साथ बस रोमांस ही करना होता था। आज से 30 साल पहले लगभग हर फिल्म में हीरो के लिए 4 गानें होते थे, नाच-गाना तो होता ही था। समय के साथ बहुत कुछ बदला है और यही बदलाव हमारी फिल्म की कहानी में आपको दिखाई देगा।

फिल्म में प्यार पर ही फोर्स किया गया है। इस बारे में आपका क्या कहना है?

आप जब फिल्म देखेंगे तो ट्रेलर से बिल्कुल अलग पाएंगे। हमने फिल्म के प्रोमो में बहुत सारी चीजें खोली भी नहीं हैं। आपको तो यह भी नहीं पता है कि तब्बू फिल्म में मेरी वाइफ हैं या पूर्व वाइफ हैं। यह सब आपको फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा।

अपनी आगामी फिल्मों के बारे में बताएं?

मैं तानाजी में योद्धा बना हूं जिसकी शूटिंग खत्म हो चुकी है। इसके बाद सईद नयीमदुन्न जो भारत के पूर्व कप्तान (जिन्होंने 1970 के एशियन खेलो में  कांस्य पदक जीता है और वह भारत के पूर्व कोच भी रह चुके है.) पर बन रही बायोपिक में दिखूंगा। यह कहानी सईद जी के कोचिंग कैरियर के इर्द-गिर्द घूमेगी। इसके लिए मैंने फुटबॉल भी खेली है। एक और फिल्म चाणक्य के जीवन के पर आधारित है।

तानाजी एक पीरियड फिल्म है। उस दुनिया को क्रिएट करना कितना मुश्किल रहा?

उस दुनिया को रचना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि उसके लिए बहुत सारा बजट भी चाहिए, वह सेंसिबिलिटी भी चाहिए, वह टेक्नॉलजी भी चाहिए, तो आपको बहुत सोच-समझकर ऐसी फिल्में करनी चाहिए। जब आपको लगे कि आप तैयार हैं, तभी करना चाहिए। हमें लगा कि हमने उस पर दो साल मेहनत की है और अब हम तैयार हैं, तब हमने काम शुरू किया। वरना, मैं कभी शुरू नहीं करता।

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आपके जीवन के ऊपर बायोपिक कब बनेगी?

मैंने जिंदगी में ऐसा कुछ किया ही नहीं जिसपे फिल्म बन सके।

टोटल धमाल के बाद दे दे प्यार दे, ताना जी, चाणक्य, अब्दुल रहीम की बायॉपिक, आपकी एक के बाद लगातार कई फिल्में आ रही हैं। एक साथ इतनी फिल्में कैसे कर पा रहे हैं ?

देखिए, मेरी अगली फिल्में थोड़ी पास आ रही हैं और ऐसा इसलिए क्योंकि मैंने कई फिल्में लगातार की हैं। यह अलग बात है कि करीब एक साल से मेरी एक ही फिल्म टोटल धमाल रिलीज हुई है वरना, मैं तो उतनी ही फिल्में कर रहा हूं।

आप मल्टीस्टारर फिल्में भी कर रहे हैं जबकि ज्यादातर एक्टर्स ऐसी फिल्मों से बचते हैं?

मैं तो शुरू से हर किस्म की फिल्में करता रहा हूं। जिनको इनसिक्यॉरिटी होती है, वे नहीं करते। मुझे तो सबके साथ काम करने में मजा आता है। मुझे कभी जिंदगी में ऐसी इनसिक्यॉरिटी नहीं हुई। वैसे मुझे लगता है कि मेरी जेनरेशन के जितने भी ऐक्टर हैं, वे सब सिक्यॉर हैं। हमें 28 साल हो गए काम करते-करते, अब काहे की इनसिक्यॉरिटी! अब तो सब अपनी-अपनी जगह पर अच्छा काम कर रहे हैं। लोगों को पता है कि मैं कैसा काम करता हूं, लोगों को पता है कि बाकी लोग कैसा काम करते हैं। 28 साल काफी लंबा समय होता है। आप तब से काम कर रहे हैं, आपने मल्टीस्टारर भी की हैं, सोलो फिल्में भी की हैं, लोगों ने आपके काम को सराहा भी है, तो इनसिक्यॉरिटी बचती नहीं है।

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क्या आपको लगता है कि अब कॉन्टेंट ही किंग है?

कॉन्टेंट हमेशा से किंग रहा है। अगर फिल्म अच्छी होती है, तभी चलती है। अगर आपकी फिल्म में स्टार है, तो वह एक लेवल तक फिल्म को ले जाएगा, उसके बाद अगर फिल्म अच्छी नहीं होती है, तो वह बैठ जाती है। जब कॉन्टेंट अच्छा होता है, तभी फिल्म चार-पांच हफ्ते तक चलती है और तभी बड़ा बिजनस करती है। बाकी, जिसको जो बोलना है, बोलता रहे कि आजकल ऐसी फिल्में चल रही हैं, वैसी फिल्में नहीं चल रहीं। दो साल पहले भी लोग कह रहे थे कि अब गोलमाल जैसी फिल्में नहीं चलतीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिक्चर अगर अच्छी है, लोगों को एंटरटेन करती है, तो चलती ही चलती है। पहले भी बहुत सारी बड़ी-बड़ी फिल्में, बड़े-बड़े स्टार्स की फिल्में फ्लॉप हुई हैं, क्योंकि ऑडियंस को फिल्म पसंद नहीं आई। ऐसा हमेशा से होता रहा है। यह कोई नया ट्रेंड नहीं है।

सुना है आप सेट पर प्रैंक्स बहुत करते हैं?

अब जब लोग मुझे जानते हैं और मुझसे ऐसा ही कुछ करने की उम्मीद रखते हैं, तो सच बता दूं कि मैंने वास्तव में ऐसा करना बंद कर दिया है। बल्कि सबसे मजेदार बात तो यह है भी है कि जब भी सेट पर कुछ गलत होता है तो कास्ट और यूनिट के सदस्य मुझ पर शक करना शुरू कर देते हैं।

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