INRERVIEW!! “एयरलिफ्ट” में कोई खून खराबा नहीं है” – अक्षय कुमार

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लिपिका वर्मा

अक्षय कुमार की फिल्म, “एयरलिफ्ट” के प्रोमोशन्स के दौरान लिपिका वर्मा से ढ़ेर सारी बातें की अक्षय और निमरत कौर ने जो पहली बारी अक्षय के साथ इस फिल्म में नजर आने वाली हैं

कुछ शॉकिंग बातें जो एयरलिफ्ट फिल्म के बारे में अक्षय ने हमें बतायी पेश हैं उन्हीं की जुबानी 

एयरलिफ्ट की कहानी असली है और निर्देशक राजा इस फिल्म से पहली बारी निर्देशन की बागडोर सम्भाल रहे हैं। लगभग एक लाख 70 हजार भारतीय नागरिक हैं जो बहुत ही अमीर थे बेघर हो जाते हैं। रंजीत कत्याल जो किरदार का नाम है वो उन्हें कैसे बचा पाता है यह इस कहानी द्वारा बताया गया है। आप सोचिये जो इतने अमीर होते हैं बेघर तो हो ही जाते हैं किन्तु उनके पास देश भी नहीं होता है। यह जो आदमी है बहुत बुद्धिमानी से किस तरह सब को टेरेरिस्ट से बचाता है यही कहानी में दिखाया गया है।

एक 15 साल का बच्चा बन्दूक की नोक पर एक भारतीय को मारना चाहता है यह सोचकर कि वह कुवैती नागरिक है और किस तरह वह राज कपूर के गाने गाकर अपनी जान बचाता है यह भी दिखाया है हमने फिल्म में। यह एक सच्ची कहानी से प्रेरित है।

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“एयरलिफ्ट” में खून खराबा नहीं दिखाया गया है। मेरा केरैक्टर जिस बन्दे पर आधारित है वह एक बहुत ही बुद्धिमान बिज़नेसमैन है और किस चालाकी से सब को टेरेरिस्ट के चंगुल से बचाता है यही जानकारी आज इस फिल्म द्वारा सब तक पहुंचेगी। 1990 में यह ऑपरेशन गुप्त रखा गया था और आज गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज भी हुआ है। यह काबिलेतारीफ कहानी भी है। इसलिए मुझे यह केरैक्टर करने में रूचि थी।

रंजीत कत्याल रियल नाम नहीं है। यह नाम मुझे रील पर दिया गया है।

निमरत कौर की जुबानी सुनिए अब –

ऐसा नहीं है कि अक्षय कुमार की फिल्म में हीरोइन्स को कुछ करने के लिए नहीं दिया जाता है। यह केरैक्टर मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं यह नहीं कहूँगी कि मैं चूजी हूँ पर हर केरैक्टर अपने आप में बेहतर होता है।

फिल्म में रंजीत कत्याल क्यों अपने परिवार के ऊपर सबको बचाने की कोशिश करता है यह फिल्म में जानना मेरे लिए जरुरी था।

पहली बारी अक्षय कुमार के साथ काम करने का मौका मिला मुझे ख़ुशी है इस बात की। उनसे बहुत कुछ सीखा है मैंने। मैं सिर्फ वन फिल्म ओल्ड हूँ और इस फिल्म में जितना भी मेरा रोल है जायज है। हर फिल्म में यदि हीरोइन्स का किरदार दो गाने गाए और कुछ सीन्स हो तो भी उस फिल्म में उस किरदार का कुछ न कुछ महत्व होता है।

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शुरू शुरू में मुझे अक्षय से डर लगा था। किन्तु वह डर केवल 5 मिनट का ही था। उन्होंने हंसी मजाक कर के मुझे इतना कम्फ़र्टेबल कर दिया कि किस तरह पुरे एक साल की शूटिंग खत्म हो गयी पता ही नहीं चला कि मैं उनके साथ पहली बार काम कर रही हूँ।

हमारी जोड़ी कुछ अलग ही है और पहली बारी इस जोड़ी को देखेंगे लोग हमें उम्मीद है कि हमारी कैमेस्ट्री भी बहुत अच्छी लगेगी सबको फिल्म में।

 

 

 


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Mayapuri

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