दिवाली हमारे लिए मिठाइयों का त्यौहार होता था – अक्षय कुमार

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बचपन में मनाई गई दीपावली की तुलना किसी भी दीपावली से नहीं हो सकती। उन दिनों दिवाली त्योहार का इंतजार सिर्फ इसलिए किया करते थे क्योंकि दिवाली पर सबसे ज्यादा लंबी स्कूल की छुट्टी मिलती थी। हम बच्चों को हमारे पापा पटाखे खरीदने के लिए पैसे देते थे और हम ढेर सारे पटाखे खरीदते भी थे, फिर भी पटाखों से हमारा जी नहीं भरता तो ढूंढते फिरते थे कि कहीं कोई अध्-जला या फिर ना जला हुआ पटाखा कहीं पड़ा हुआ मिल जाए। दीवाली हमारे लिए मिठाइयों का त्यौहार भी होता था। घर की बनी और दुकानों से खरीदी मिठाइयों के ढेर सारे डब्बे आते थे और पड़ोसियों से भी मिठाईयां आती थी। हम बच्चों की तो लॉटरी लग जाती थी। आज जब हम अपने बच्चों को दिवाली मनाते देखते हैं तो वह यादें ताजा हो जाती है। एक बच्चा जिस नजर और जिस तरह दिवाली को एंजॉय करता हैं वह हम बड़े कभी नहीं कर सकते। आज हम पार्टी मनाते हैं, एक दूसरे के पार्टी में शामिल होते हैं, कार्ड खेलते हैं, लेकिन वह बिंदासपना नहीं है। ढेर सारे रेस्ट्रिक्शन सा गए हैं। खैर, आप लोग खूब एंजॉय कीजिए दीपावली। लेकिन हां पटाखों से दूर ही रहिए, पर्यावरण शुद्ध रखना है ना?

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