तीस साल पहले, एक ऐसी भी गजब की शादी हुई थी

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मैं कभी शादी नहीं करना चाहता था, लेकिन मुझे शादी करनी पड़ी तीस साल पहले, एक ऐसी भी गजब की शादी हुई थीड़ी थी और इसलिए मैंने 16 अप्रैल 1991 को चार बंगलों के एक चर्च में शादी ली थी। यह मेरे लिए एक बड़ी जीत थी जो सीधे-सीधे सभी धार्मिक रीति-रिवाजों और संस्कारों को निभाने के लिए लंबे संघर्ष के बाद मैंने जीत ली थी। मेरी पत्नी उषा एक कट्टर हिंदू थी, वह अपनी बेटी, स्वाति के साथ ईसाई धर्म में परिवर्तित होना चाहती थी, विभिन्न चर्चों में मुझे मिले सभी पादरियो ने इस बात को बहुत मुश्किल बना दिया था, लेकिन एक अच्छे पादरी जिनसे मैं पहले कभी नहीं मिला था, उनका नाम फादर वैल था जिन्होंने इसे आसान बना दिया था और साथ ही उन्होंने उषा और स्वाति का धर्म परिवर्तन भी कर दिया था और उषा और मेरी शादी भी करा दी थी। – अली पीटर जॉन

शादी की रस्में शाम 6ः 30 बजे तक खत्म हो गईं और हमने घर जाने और शांति से उत्सव मनाने की योजना बनाई, लेकिन फिर मुझे एक के बाद एक सरप्राइज मिले थे।

मेरे मित्र गोपाल पांडेय की नई कार चर्च के गेट के बाहर खड़ी थी, जिसे गुलाबों से सजाया गया था और हमें उसमे बैठकर एक हॉल में ले जाया गया जिसके बारे में मुझे कुछ भी नहीं पता था, हॉल को भी बड़ी खूबसूरती से सजाया गया था और स्टेज पर दो विशाल सजी हुई कुर्सियाँ थीं और हमें उन पर बैठने के लिए कहा गया था और हमारे बगल में स्वाति के लिए भी एक कुर्सी की व्यवस्था की गई थी और म्यूजिक बजने लगा था और जो सोंग बज रहा था वह था, “जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड जाए, तुम देना साथ मेरा।” मैंने किसी व्यक्ति से पूछा कि, किसने ये सारी व्यवस्थाएँ की है और वहा कोई भी मुझे जवाब देने को तैयार नहीं था। जब मैंने ऋषि कपूर के करीबी दोस्त को देखा, तो उन्होंने मुझे बताया था कि कैसे ऋषि हॉल में यह देखने आए थे, कि क्या वह किसी भी तरह से कोई मदद कर सकते हैं और फिर वह म्यूजिक सिस्टम को फिक्स करने के बाद ही चले गए थे।

संगीत बजता रहा और ऋषि हॉल में चले गए जो पहले से ही फिल्मों, टीवी, थिएटर और प्रेस की मशहूर हस्तियों से भरा हुआ था। ऋषि ने सचमुच वातावरण में चार चाँद लगा दिए थे और वह मुझसे पूछ रहे थे कि क्या ऐसा कुछ है जिसमें वह कुछ मदद कर सकते है।

और जब मैं ऋषि से बात कर रहा था, तभी मुझे अमिताभ बच्चन का फोन आया और मैं सरप्राइज था, जिन्होंने मुझसे फोन पर कहा कि वह ठीक 8ः30 बजे हॉल में होंगे और जब मैंने उषा को अमिताभ के आने के बारे में बताया तो वह एक अजीब से शॉक में चली गईं और स्वाति हैरान लग रही थी। और जैसा कि अमिताभ ने कहा था, वह भी 8ः30 बजे हॉल में थे और हॉल दुल्हन की तरह सजा हुआ लग रहा था।

जल्द ही सुनील दत्त, यश चोपड़ा, गुलजार, जूही चावला, जैकी श्रॉफ, महेश भट्ट, एन चंद्रा, दिनेश ठाकुर, रीटा भादुड़ी और कई अन्य लोगों के नाम के साथ एक तरह का ‘तारे जमीन पर’ इवेंट लग रहा था। मैं यह समझने में नाकाम रहा कि मेरी शादी की खबर कैसे लीक हुई और 30 साल बाद भी मुझे नहीं पता की यह कैसे हुआ था।

समस्या तब शुरू हुई जब अमिताभ एक गुलदस्ता लेकर आए जो लगभग उनके जितना बड़ा था और उनके हाथ में एक लिफाफा था। कुछ शुभचिंतकों ने मुझे सभी उपहार स्वीकार करने के लिए एक विश्वसनीय आदमी रखने के लिए कहा। यश चोपड़ा अपने साथ लिफाफा लेकर आए और लिफाफों की संख्या बढ़ती रही। लेकिन रिसेप्शन समाप्त होने के बाद मुझे पता चला कि वह विश्वसनीय आदमी एक सबसे बड़ा बेईमान आदमी निकला था और सभी लिफाफे और अमिताभ द्वारा लाए गए गुलदस्ते को लेकर फरार हो गया था। गायब होने वाले लिफाफे का रहस्य मेरे सामने तब आया जब मैंने सभी चीजों को एक साथ रखा।

जिस व्यक्ति ने हॉल बुक किया था, वह एक दोस्त की आड़ में एक दुश्मन था और जिस व्यक्ति ने फरार होने की चाल खेली थी, वह उसका भतीजा था और चाचा और भतीजा कई वर्षों तक मुंबई में नहीं दिखे थे और अब मैं भी फिर से उस पुराने मुद्दों को उठाना नहीं चाहता था। चाचा को इसकी सजा मिली थी और उनका भतीजा मंगलोर की जेल में अपने द्वारा किए गए कई अपराधों के लिए सड़ रहा था।

किसी भी तरह, रिसेप्शन ‘समापन’ के समय से आगे बढ़ गया और हॉल का बिल मेरे कुछ दोस्तों द्वारा भरा गया था जो जानते थे कि दोस्ती का क्या मतलब होता है।

रिसेप्शन सुबह 3 बजे तक जारी रहा जब अनिल कपूर, बोनी कपूर और अमरीश पुरी जैसे मेरे अन्य दोस्त जिनको देरी हो रही थी, वह मुझे विश करने के लिए मेरे घर पहुंचे थे रिसेप्शन अभी भी जारी रहा जब सुभाष घई ने शामिल न हो पाने के लिए मुझसे माफी मांगने के लिए मुझे डिक्शनेरी का बेस्ट सेट गिफ्ट किया, रिसेप्शन तब तक जारी रहा जब तक कि देव आनंद ने मुझे एक विशाल गुलदस्ता और एक केक नहीं भेजा और मेरी शादी का पूरा ड्रामा एक भव्य अंत के करीब आया जब दिलीप कुमार मेरे पास मुझे बधाई देने आए थे। उषा और स्वाति से समारोह में ना आ पाने के लिए माफी मांगी थी क्योंकि वह निर्देशक के रूप में अपनी पहली फिल्म “कलिंगा” के लॉन्च की तैयारियों में व्यस्त थे। उन्होंने हमें बताया कि वह और सायराजी कुछ दिनों में हमारे घर जरुर आएंगे। लेकिन अफसोस, वे कुछ दिन कभी नहीं आए और अब शायद वे कभी आएंगे भी नहीं।

मैं कभी शादी करने वाला नहीं था जैसे की मुझे कहा जाता था। लेकिन मैंने एक अच्छा पति और एक बेहतर पिता बनने के लिए हर संभव प्रयास किया है। यह मेरी 30 वीं शादी की सालगिरह पर मेरा कन्फेशन और डेक्लरेशन है।

इसलिए मेरी सहायता करो और मेरे सभी मित्रों और मेरे शत्रुओं (अगर मेरे कोई है) के लिए भी मेरी प्रार्थना सुनो।

कैसे कैसे मैंने जिंदगी बिताई है, मेरे यारो, कभी कभी लगता है मेरी जिन्दगी एक लम्बा ख्वाब है, और अब मुझे ख्वाबों में रहने की आदत हो गई है, मैं करू भी तो क्या करू।

अनु- छवि शर्मा

तुम्हारे प्यार में हारना, मेरी जीत है…

-अली

ऐसा लग रहा है कि मैं एक बार फिर हारने वाला हूँ
प्यार में हारना मेरे लिए कोई नई बात नहीं है
प्यार में मेरी हारने की कहानियाँ अब किताबों में छपने लगी हैं
लेकिन मैंने प्यार करना कहां छोड़ा है?
प्यार तो मेरा धरम है, दुआ है, ईमान है, मन्नत है, सब कुछ है, जीना भी है, मरना भी है
मैंने कहा था मेरा प्यार तुमको अमर कर देगा, तुम अमर हो गयी, ऐ जिंदगी


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Mayapuri

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