अली पीटर जॉन की “विटनेसिंग वंडर्स” किताब का लां

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मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की इतनी बड़ी हस्तियाँ के द्वारा मुझे इतना सम्मान मिलेगा. मैं कौन हूँ? एक लड़का जो एक छोटी सी बस्ती में रहता था और उसे बस कंडक्टर बनना था. मेरा एक ख़वाब था और ओने पोस्ट ने मुझे मेरे गुरु ‘ख़वाजा अहमद अब्बास को धुंडने में मद्दद की और मैं आज जो कुछ भी हूँ सिर्फ उन्ही की बदौलत हूँ.

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मैं 40 सालों से फिल्मों, प्यार, ज़िन्दगी और सभी चीज़ों के बारे में लिखता आ रहा हूँ. मेरी कई बुक्स लांच हुई जहाँ एम.एफ.हुसैन, देव आनंद, बी.आर.चोपड़ा, विजय आनंद, विजय तेंदुलकर जैसी किस हस्तियाँ शामिल हुई. और भी कई हस्तियाँ है जो मेरी आत्मकथा “लाइफ- बिट्स एंड पीसेज” में उपस्थित हुए थे. नाना पाटेकर ने इस बुक का मराठी संस्करण को लांच किया था जिसमे विजय तेंदुलकर, जी.डी. मदगुलकर, मध् मंगेश कार्निक और अन्य लोग भी आये थे. वही सुभाष घी ने मेरी किताब “कॉफ़ी टेबल” को अपने कॉलेज व्हिस्त्लिंग वुड्स (WWI) में लांच और होस्ट भी किया था.

और अब मौली के जन्मदिन पर मेरी पहली बुक “विटनेसिंग वंडर्स” जो फिल्मों पर आधारित है उसे लांच किया गया. मौली, जिसे मैं पिछले 58 सालों से प्यार करता आया हूँ. यह टाइटल मेरे सपनों में आया और मैंने किताब का नाम “वित्नेस्सिंग वंडर” रख लिया. लेकिन असली वंडर तो वो है जिन्होंने मेरी बुक लांच सेरेमनी में आकर किताब का उपघाटन करने के लिए मान गए. मुझे सबको एक कॉल करनी है जिनकी वजह से मुझमें बदलाव आये और वह सब भी मेरी ज़िन्दगी के इतने बड़े दिन में साथ थे.

वह सभी बहुत ही महान लोग है और उन्होंने बहुत कुछ अचीव किया है. सुभाष घई जिन्हें मैं तब से जानता हु जब वह एक स्त्रुग्ग्लिंग एक्टर थे और अपनी पहली फिल्म ‘उमंग’ में ही असफल हुए, जिसके लिए उन्हें 650 रुपये महिना मिले थे और तीसरी क्लास के बीच अँधेरी से चर्चगेट आते जाते. वह 9 फिल्मों से निकाले गए जो उन्होंने हीरो के तौर पर साइन की थी.

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असरानी जो उसी फिल्म में सुभाष घई के को-एक्टर थे और दोनों के पास काम नहीं था,  फिर वह FTII वापस चले गए. नसीरुद्दीन शाह को मैंने पहली बार श्याम बेनेगल की “निशांत” में देखा था और फिर चर्चगेट स्टेशन के र देखा और मैं उन्हें अपने ऑफिस ले आया जहाँ मैंने उनका पहला इंटरव्यू बॉम्बे में किया और कुछ सालों बाद मैंने उन्ही के बेटे विवान शाह का इंटरव्यू किया जो फिल्म “हैप्पी न्यू ईयर” का हिस्सा थे. आज नसीर भारत और दुनियाभर में जाने जाते है. वही राज बब्बर जो एक थिएटर एक्टर है जो अपनी ज़िन्दगी अच्छी बनाने के लिए बॉम्बे आये और हर तरह के लक्ज़री कमरों में रहने वाले इस एक्टर ने “इन्साफ का तराज़ू” से एक बड़ी हित इस इंडस्ट्री को दी.

जाने-माने कॉपी राइटर, कमलेश पाण्डेय जिन्होंने फिल्मों में अपनी शुरुआत 1986 में की और पहली बार मुझे उनके बारे में लिखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. इनके बाद अब मैं अनुपम खेर के बारे में क्या कहूँ, वह बहुत ही बेहतरीन एक्टर है जो खेरवादी नाम की बस्ती में रहते थे और मैंने उन्हें पहली बार पृथ्वी थिएटर में देखा था और उनके उज्जवल भविष्य की भविष्यवाणी की थी. और आज वह अपने सफल मुकाम पर है. वह सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि हॉलीवुड में भी मशहूर है.

हाँ, मैंने इन सभी हस्तियों को करियर में बढ़ते हुए देखा है और आज वह सभी अपने-अपने मुकाम पर है. वह सभी विले पार्ले के सथाया ऑडिटोरियम में मौजूद रहे और मुझसे जुड़ी कई बातें कही और साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि मई किस तरह उनके करियर का हिस्सा बना. मैं बहुत डरा हुआ था और ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा ब्रेक डाउन हो जायेगा लेकिन उस शाम को मैंने जिया. कैसे एक साधारण सा इंसान जिसने कभी ऐसा कुछ सोचा भी नहीं था लेकिन भगवान की असीम कृपा से उन्हें यह मौका मिला और इस समारोह में इतने सारे लोगों का मुझे सम्मान देना बहुत बड़ी बात है.

किसी भी अवसर पर मैं अपने दोस्त अनंत नारायण महादेवन को कैसे भूल सकता हूँ, जो किसी भी समारोह के मास्टर है और इससे पहले कि मैं इस तरह के किसी बड़े फंक्शन को करने की सोचता वह पहले ही सोच चुके होते है. शुरुआत से उन्होंने जिस खूबसूरत तरीके से मेरी ज़िन्दगी को बनाया है वैसे कुछ ही लोग करते है और आज मैं कन्फेस करता हूँ और अनंत को शुक्रिया कहने के अलावा और कुछ नै बोल पाउँगा. वह हर इंसान की भावनाओं को अच्छे से समझ जाता है जो उनके साथ दिलसे बात करता हो.

मेरी ज़िन्दगी की इस यादगार शाम में मैं उन दो लोगों को कभी नहीं भूल सकता जिनके बिना आज की यह शाम नामुमकिन थी. वह है मायापुरी ग्रुप के ओनर आदरणीय पी.के. बजाज और उनके बेटे अमन बजाज जिन्होंने मेरी “विटनेस्सिंग वंडर्स” को ज़मीन और आकाश से मिला दिया और मेरी ज़िन्दगी बदल दी. और मैं क्या कह सकता हूँ अपने अगले दोस्त और हृदेश आर्ट्स के चेयरमैन अविनाश प्रभावलकर है, जिन्होंने इस दिन दिन को खूबसूरत बनाने के लिए नामुमकिन चीज़ों को भी मेरे लिए मुमकिन किया. उन्होंने कई बार मेरे लिए बहुत कुछ किया और हमेशा वह एक नए तरीके से मुझे ख़ुशी देते है.

मैंने यह किताब इंडियन फिल्म इंडस्ट्री को समर्पित की है जिसने मुझे आज तक बहुत कुछ दिया है. यह उन सभी लोगों के लिए मेरी तरफ से एक ट्रिब्यूट है जिन्होंने इस इंडस्ट्री को एक परिवार की तरह एक जुट रखा और इसमें जान डालने में खूब मेहनत की है. मैंने इस किताब पर कोई कीमत नहीं लिखी है क्योंकि मेरे हिसाब से इस किताब की कोई कीमत नहीं है और मैं चाहता हूँ कि इससे जितना भी पैसा आये उसे मैं उपासना ट्रस्ट को दान कर दूंगा, जो छोटे बच्चों का एक स्कूल बेल्गौम डिस्ट्रिक्ट, कर्नाटक के एक गाँव शिमोगा में चलते है.

 


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Mayapuri

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