INTERVIEW: झूठ नहीं बोल पाती हूँ ओवरएक्टिंग की वजह से पकड़ी जाती हूँ मैं – अलिया भट्ट 

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लिपिका वर्मा 

अलिया भट्ट इतनी छोटी सी उम्र में बहुत ही समझदार हो चुकी है। और यह इतनी ज्यादा कर्मठ हो गयी है कि अकेले ही अपनी आने वाली फिल्म, ‘डियर ज़िन्दगी’ के प्रोमोशन्स में सुबह से शाम तक का वक़्त देकर भी थकती नहीं है। निर्देशक/निर्माता करण जौहर की फिल्म,”स्टूडेंट्स ऑफ़ दी ईयर” से बॉलीवुड की दुनिया में कदम रख कर अलिया ने यह साबित कर दिया कि -वो न केवल एक बेहतरीन अभिनेत्री है किन्तु अलग-अलग किरदार निभा कर वह फ़िल्मी दुनिया में नाम, शौहरत और काम की मोहताज नहीं है।

पेश है अलिया के साथ लिपिका  वर्मा की बातचीत के कुछ प्रमुख अंश

आप फिल्म के प्रोमोशन्स को कैसे देखती है ?

देखिये, मुझे बहुत बातें करना पसन्द है। सो सरल सी बात है – मैं बहुत बातूनी लड़की हूँ। बातें  करते हुए मुझे जरा भी थकान महसूस नहीं होती है। अभी लगातर तीन दिन से, “डियर ज़िन्दगी” मेरी फिल्म जो 25 नवम्बर को रिलीज़ है, उसकी प्रोमोशन्स लगातार तीन दिनों से कर रही हूँ। मुझे मजा आता है आप लोगो से बातचीत कर । alai-hahtr

शाहरुख़ खान से आप कितनी मिलती जुलती है ?

हमारे सोचने का अंदाज़ लगभग एक जैसा ही है। हमारी आदते भी काफी मिलती जुलती है। दरअसल, में हमारी भावनाओ का सार भी एक जैसा ही है। जब हम, “डियर ज़िन्दगी” के सेट्स पर बैठ कर बातें किया करते तब मुझे इस बात का एहसास भी हुआ था। वैसे एक-आद बारी उन्होंने मेरी कुछ बचकानी हरकतों पर प्यार से मुझे डांट भी लागई थी। alia_srk

कोई एका सीक्रेट हो  शाहरुख़ का जो शेयर करना चाहेंगी आप?

जी हाँ, उनकी एक आदत है कि- वो खाना सेट्स पर नहीं खाते है। इस से उन्हें एसिडिटी हो जाती है। और अचानक उनके पेट से गुर- गुर की आवाजे आती है। सो हमे शूटिंग के बीच में उन्हें कुछ न कुछ खाने को देना होता था। मैं अक्सर उन्हें खाने के लिए बोला भी करती थी।

फिल्म,”डियर ज़िन्दगी” फिल्म आपके कन्धे पर – उसकी सफलता का बोझ है। इतनी छोटी सी उम्र में आप जीवन एन्जॉय करने की बजाय  काम में लगी हुई है, क्या कहना चाहेंगी आप ?

आप लोग उम्र को बहुत महत्व देते है। कोई भी किसी भी उम्र में वो सब कर सकता है जो उसे करने का मन हो। और मुझे फिल्मों में काम करना बहुत ही अच्छा लगता है। सो मेरी यही सलाह है नोजावानो से -जो कुछ भी करो मन लगा कर करो और जीवन में आगे बढ़ो । और जहां तक फिल्म की सफलता का सावल है -निर्देशक के ऊपर  यह दारोमदार होता है। मेरे कंधे पर कोई भी दबाब नहीं है। ऐसा नहीं लिखा है कही पर भी कि- इस उम्र में या उस उम्र में हम काम नहीं कर सकते है या फिर यह उम्र सिर्फ खेलने और एन्जॉय करने की है। srk_alia

आपकी उम्र के नोजवानों को क्या सलहा देना चाहेंगी आप?

जिस तरह से मेरा सफर रहा है, वह आप से अलग हो सकता है। सबकी अपनी -अपनी जर्नी होती है। अपनी पीढ़ी के लोगो को यही कहना है मेरा -अपना काम भावुकता से करें। सफलता आपके कदम चूमेगी। मुझे इस बात का गर्व है कि-मैं अपना भार अपने माता-पिता के कन्धे पर नहीं डालती हूँ। मुझे उनके लिए भी कुछ करने की इच्छा हो तो मै कर पाती हूँ। उनके घर खर्च में भी मैं हाथ बटा लेती हूँ। और इस बात से उन्हें बहुत ख़ुशी भी मिली है। मैंने अपने पैसों से अपना घर बनाया है और उसकी डिजाइनिंग भी खुद की है सो एक अलग ख़ुशी मिलती है मुझे। आप भी जिस किसी कार्य को करना चाहते हो- बस जी जान से कीजिये और सफलता जरूर मिलेगी आपको।

सोनम को आवर्ड मिला फिल्म,” नीरजा” के लिए आपको नहीं मिला उड़ता पंजाब के लिए, क्या कहना है आपको?

मैंने यह नहीं कहा की यदि मुझे आवर्ड नहीं मिला तो में उदास हो गयी। लोगों ने सोनम को “नीरजा” में  पसन्द किया,तो सही है। सोनम ने “नीरजा” में बेहतरीन अभिनय किया है। cwvspw-viaaoc_n

डियर ज़िन्दगी” फिल्म में आप सही-गलत चुनती है,कठिनाईयों का सामना करना पड़ा होगा। रियल लाइफ में सही गलत चुनना हो तो कैसे चुनेगी ?

यह बहुत कठिन सावल है। चलिए मैं फ़िल्मी जवाब  दे देती हूँ- जब सही या गलत चुनने में मुश्किल हो तो-अपनी आंखे बंद करो और तुम्हे जवाब मिल जायेगा!”

आप फिल्मों में अभिनेत्री न होती तो क्या करती? मैंने बचपन से फ़िल्मी माहौल ही देखा है। सो यदि अभिनय में न होती तो फिल्म निर्माण करने में अपना हाथ जरूर आजमाती। निर्देशन नहीं क्र सकती हूँ मेरे हिसाब से पूजा (बहन) निर्देशन अच्छा ख़ासा कर सकती है।

 आप क्या अच्छा कर सकती है?

सब मेरी अभिनय क्षमता की तारीफ करते है। लेकिन एक चीज़ जिस में -मैं बहुत ख़राब हूँ -वह है मैं झूठ सही तरह से नहीं बोल पाती हूं। पकड़ी जाती हूँ। क्योंकि झूठ भी मैं बहुत एक्टिंग कर के बोलती हूँ। alia

हाल फ़िलहाल एक झूठ जो अपने अपनी माता जी से बोला हो?

दरअसल में -मेरी हर बात मेरी माँ को बखूबी पता होती है। मैं उनसे कुछ भी नहीं छुपाती हूँ। पर हाँ दिन भर की थकी -हारी घर पहुँच कर जब मै जिम जाना चाहती हूँ तब वह मुझ पर बहुत भड़कती है। सो इस बारी भी जब मैं अपनी फिल्म ,”डियर ज़िन्दगी” से लेट घर पहुची और कुछ देर बाद जिम जाना था तो मैंने माँ से सीधे सीधे झूठ कहा -मुझे एक मीटिंग में जाना है। तब जाकर में जिम पहुंची और अपनी दिनचर्या का व्यायाम कर अपनी दिन भर की  थकान दूर की मैंने। “


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Mayapuri

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