INTERVIEW: ‘‘मैं भी ऐसी ही प्रवृति का बंदा हूं जो एक बार साथ पकड़ता हूँ, तो उनके साथ आगे तक जाने की कोशिश करता हूँ’’ – अमित सिंह 

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लिपिका  वर्मा

अमित सिंह फिल्म ‘मिर्जा जूलिएट’ को बतौर प्रोड्यूस कर रहे हैं। अमित सिंह किसी तारीफ के मोहताज नहीं है क्योंकि खुद भी इन्होंने बतौर निर्देशक काफी टेलीविजन शोज की बागडोर संभाली है। अपने मित्र-निर्देशक राजेश राम सिंह को फिल्म ‘मिर्जा जूलिएट’ में बतौर निर्देशन करने की बागडोर अमित ने केवल इसलिए दे दी -क्योंकि उन्हें राजेश पर पूरा भरोसा है। और तो और राजेश के साथ उनका सम्बन्ध 2000 से पूर्व से ही चला आ रहा है। अमित का यह भी मानना है, फिल्मी दुनिया में रिश्तों पर ही भरोसा  टिका रहता है  और एक दूसरे के सहारे यानि एक टीम की तरह ही आगे बढ़ा  जा सकता है।

पेश है अमित  सिंह के साथ लिपिका  वर्मा की बातचीत के कुछ अंश –

अपनी जर्नी के बारे में कुछ बतायें?

देखिये मैंने कई सारे  टेलीविजन शोज निर्देशक की हेसियत से संभाले हैं। किन्तु इस फिल्म ‘मिर्जा जूलिएट’ से मैं बतौर निर्माता बन कर सामने आया हूँ। सो मैंने यही  बेहतर समझा -इस समय प्रोडक्शन का काम सीखना और सही ढंग से करना बहुत जरुरी है। वैसे पहले कुछ कुछ प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया हुआ है। लेकिन, इस फिल्म में केतन शेमारू जो की, फिल्म ‘मिर्जा जूलिएट’ के न केवल प्रेजेंटर है किन्तु डिस्ट्रीब्यूशन भी कर रहे हैं इस फिल्म का। मैंने इनके साथ रह कर बहुत कुछ सीखा  है। अगली फिल्म में और भी अच्छी तरह से काम किया जा  सकता है। सीखने की कोई उम्र नहीं होती है बस यही  मेरा मानना है और मुझे खुशी है कि  हमने शेमारू के साथ हाथ मिलाया। यह लोग फिल्मी दुनिया से बहुत सालो से जुड़े हुए हैं। और एक बार इनके साथ जो कोई भी जुड़ जाता  है फिर इन्हें छोड़  कर कही नहीं जा सकता है।darshan-kumar

तो अगली फिल्में भी आप इनके साथ ही बनायेंगे क्या?

देखिये, अभी  तो कुछ भी तय नहीं किया है। किन्तु मैं भी ऐसी ही प्रवृति का बंदा हूं जो एक बार जिसका साथ पकड़ता हूँ , तो उनके साथ आगे तक जाने की कोशिश करता हूँ।

तो क्या आप कैम्प्स में विश्वास करते हैं ?

कैंप क्या होते हैं ? यह मुझे नहीं मालूम. लेकिन हाँ रिश्ते बहुत मायने रखते हैं। अब मुझे और राजेश राम को ले लीजिए मैंने उनके साथ अपनी  पहली फिल्म ‘बेताबी’ (2000) बतौर  असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया था। आज उनके साथ ही अपनी पहली फिल्म ‘मिर्जा जूलिएट’ से डेब्यू भी कर रहा हूँ। फिल्म एक टीम वर्क से ही पूरी की जा सकती है। एक दूसरे  पर भरोसा रख कर ही आगे बढ़ा  जा सकता है।amit-singh

पिया ने किसी तरह से बेमतलब निर्माता को कभी परेशान किया था क्या?

जी नहीं मैं दरअसल में इनकी समय की पाबन्दी को लेकर कई बार डर जाता था। यह बिल्कुल समय पर तैयार होकर गाड़ी का इन्तजार किया करती। और जब कभी गाड़ी पहुँचने में लेट हो जाती तो भड़क जाया करती और मुझे फोन करके इस बात की डिटेल लिया करती। मुझे भी इस बात से खराब लगता था कई मर्तबा तो गाड़ी नहीं पहुंचने पर मैं खुद ही लेने जाया करता था। यह तो ओर की ही गलती थी सो  इस का खमियाजा भुगतना होता था। बाकि कभी किसी तरह से पिया ने कोई भी टैंट्रम न तो कभी सेट पर और अब प्रोमोशन्स हो रहे तब भी नहीं दिखाया है। इसी की वजह से पिया सफल जरूर होगी। बहुत ही मेहनती है और डिससिप्लिनड अनुशासित , भी है समय की तो पाबन्द  है ही।amit-singh_pia-bajpai

तो क्या पिया के साथ थ्री फिल्म डील साईन कर ली है आपने?

 हंस कर बोले मैंने इसे यही कहा है -भाई फिल्म जरूर करना यदि चार दूसरी फिल्में मिल गयी तो मेरे साथ एक फिल्म तो कर ही लेना। रहा फिल्म डील साईन करने के फेवर में -मैं बिल्कुल नहीं हूँ भाई।  सबकी अपनी किस्मत होती है और हम सब यहाँ काम करने आये  हैं। मेहनत करके सफल होना ही अच्छा होता है। मैं लगभग  20 वषो से फिल्मी दुनिया का हिस्सा हूँ और मुझे विश्वास है अपने कर्म पर , बस फिलहाल फिल्में बनाना  चाहता हूँ,  कुछ स्क्रिप्ट्स है जिन्हें तैयार करना है बस। … आगे की आगे  देखी  जाएगी!!

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Mayapuri