अमिताभ बच्चन के जन्मदिन 11 अक्टूबर 2014 को उनसे खास बातचीत

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बॉलीवुड के सुपर स्टार अमिताभ बच्चन 72 साल के हो गए। 11 अक्टूबर को उनके जन्मदिन के खास अवसर पर उनसे उनके मुंबई, के जुहू स्थित जनक बंगले में कुछ पत्रकार मित्रों के साथ मुलाकात हुई। उन्हे जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के बाद उनसे हुई कुछ बातचीत इस प्रकार रही…
आपके जन्म दिन का आपके लाखों- करोड़ों प्रंशसको को इंतजार रहता है, पर आपको किसके जन्मदिन का इंतजार रहता है?
– मुझे मेरे परिवार के हर सदस्य के जन्मदिन का इंतजार रहता है।खासकर बच्चों के जन्मदिन का।

शायद यह पहली बार हुआ है, जब करवा चौथ और आपका जन्मदिन एक ही दिन आया है?
– मेरी जानकारी में भी यह पहला मौका है, जब मेरा ‘जन्मदिन’ और ‘करवा चौथ’ एक ही दिन पड़ा हो।

कभी आपने जया बच्चन जी के लिए करवा चौथ का व्रत रखा?
– मैं पहले व्रत रखता था।मगर अब स्वास्थ्य अनुमति नहीं देता। हर दिन मुझे कुछ दवाईयां लेनी ही पड़ती है। आप को भी पता है कि हमारी बहुत पुरानी मेडिकल हिस्ट्री है। खाली पेट दवाईयां ली नहीं जा सकती। लेकिन भावनाएं व श्रद्धा अभी भी बरकरार हैं।

Amitabh's birthday

हर जन्मदिन पर आपको बहुत से उपहार मिलते रहे हैं। पर ऐसा कोई यादगार उपहार, जिसे आपके माता पिता ने आपको दिया था, जो आज भी आपको याद हो?
– यही कि उन्होंने मुझे जन्म दिया। इस बात के लिए मैं अपने आपको गौरवशाली महसूस करता हूं। उन्हीं के आशीर्वाद से मैं काम कर रहा हूं। आज जो कुछ मुकाम मैंने पाया है, वह सब उन्हीं के आशीर्वाद का परिणाम है। आखिरकार जन्मदिन बच्चों के लिए ही होता है। दावत वगैरह की जाती है।

आज आपको सुबह सुबह कुछ खास उपहार मिलने वाला था?
-जी हां! आज सुबह सबसे पहले मुझे मेरी पोती आराध्या ने मुझे मेरे जन्मदिन पर बधाईयां दी।मेरे लिए यही आज की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

अभिषेक के मुकाबले आराध्या के साथ आपकी बांडिंग कैसी है?
– मुझे लगता है कि ऐसा हर जगह होता है कि पोते पोती के साथ दादा जी का संबंध ज्यादा प्रगाढ़ होता है। अभिषेक और श्वेता जब छोटे थे, तब हमारे पास इतना समय नहीं होता था। खैर,समय तो आज भी हमारे पास नहीं होता है। उस वक्त जब हम सुबह काम पर निकलते थे, तो अभिषेक और श्वेता सोते रहते थे। लेकिन रविवार के दिन या छुट्टियों में जरूर मुलाकातें होती थीं, बातचीत होती थी। जब हम शूटिंग के लिए आउटडोर जाते थे, तो उन्हें अपने साथ ले जाते थे, जिससे हमें उनके साथ कुछ समय बिताने का मौका मिले। इन दिनों भी कुछ ऐसी स्थितियां हैं कि मैं दिन रात काम करता रहता हूं। पूरे चार पांच दिन बाद आज सुबह आराध्या से मिला हूं। दिन रात काम चल रहा था। के बी सी की शूटिंग चल रही थी। कुछ कैम्पेन और एंडोर्समेंट पर काम चल रहा था। सुबह जब मैं जा रहा होता हूं, उस वक्त आराध्या सो रही होती है। फिर वह स्कूल चली जाती है। पर हमारी कोशिश होती है कि आराध्या के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिता सकूं। क्योंकि मुझे उसके साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगता है।

कभी आपने अपनी आत्मकथा लिखने की बात सोची?
– नहीं!

संसार में ही नहीं फिल्म जगत में भी हर दिन नए नए बदलाव आ रहे है। भविष्य में क्या होगा? क्या इसका कोई अहसास आप कर पा रहे हैं?
– इसका जवाब देना बड़ा मुश्किल है। 30 साल पहले हमने कभी सोचा नहीं था कि टीवी हमारे सामने इतना बड़ा माध्यम बनकर उभरेगा। यूं तो हमें पता था कि टीवी एक बहुत प्रभावशाली माध्यम है। पर पिछले 15 साल में टीवी ने अपने आपको बहुत प्रबल बना लिया है। अब इंटरनेट भी उतना ही प्रबल होता जा रहा है। भविष्य का कुछ पता नहीं चल सकता। क्योंकि आए दिन नए आविष्कार होते रहते हैं। फिर यह सारे यांत्रिक अविष्कार हैं। तो इनको लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता। मेरा ऐसा मानना है कि फिल्में हमेशा रहेंगी। मूल मंत्र फिल्म ही रहेगा। सारी चीजें वही से निकलेंगी। मैंने सुना है कि टीवी भी 85 प्रतिशत फिल्मों पर केंद्रित हो गया है। सोशल मीडिया हो या इंटरनेट, वहां भी ज्यादातर सामग्री फिल्मों की ही होती है। तो फिल्म मूल मंत्र रहेगा। पर दूसरी भाषाएं प्रबल होती रहेंगी।

धारावाहिक ‘‘युद्ध’’ करने का अनुभव क्या रहा?
– इस धारावाहिक को जितनी टीआरपी मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली। दर्शकों ने इसे ज्यादा पसंद नहीं किया।

क्या वजह रही?
– यही कि लोगों ने इसे नहीं देखा। लेकिन इस धारावाहिक में काम करने का मेरा अनुभव अच्छा रहा। मुझे वहां जाकर काम करना अच्छा लगता था। मुझे लगता है कि धीरे – धीरे यह सारा माहौल बदलेगा। लोग चाहेंगे कि टीवी पर और ज्यादा बेहतरीन काम हो। हम भी निरंतर टीवी पर कुछ न कुछ काम करते रहेंगे। पर ‘युद्ध’ में काम करने का हमारा जो अनुभव रहा, वह बहुत अच्छा रहा है।

एक वक्त वह था, जब टीवी पर एक धारावाहिक के हजार से अधिक एपीसोड प्रसारित होते थे। पर अब तो दो तीन माह के अंदर ही धारावाहिक का प्रसारण बंद हो जाता है। क्या आपको लगता है कि अब धारावाहिको की गुणवत्ता खराब हो गयी है?
– ऐसा नहीं है। लोगों को बड़ी तेजी से बदलाव चाहिए। मैंने पहले ही कहा कि रफ्तार बढ़ गयी है। अब दर्शक कहते है कि ‘बोल दिया, अब आगे कहो, क्या है? ’लोगों के पास समय नहीं है। जरुरत है कि ठहराव आ सके। ऐसा मेरा मानना है। हो सकता है कि मेरा यह मानना गलत भी हो।

टीवी में किस तरह के बदलाव की जरूरत है?
– बदलाव यही कि लोग चाहते हैं कि वह चीज बने, जो वह चाहते हैं। ऐसी चीज टीवी पर बने, जिसकी तरफ दर्शकों का ध्यान आकर्षित हो। दर्शक प्रतिक्षण कुछ नया चाहता है। इस बात को मैंने महसूस कर लिया। इसके बावजूद टीवी पर बहुत से धारावाहिक काफी लंबे समय से चले आ रहे हैं।

WITH AMITABH BACHCHAN ON HIS BIRTHDAY-11-10-2014 AT JANAK BANGLOW

आप अभिनय जगत के साथ साथ सोशल मीडिया जगत में भी सुपर स्टार बने हुए हैं। अब आगे क्या करने वाले हैं?
– ऐसा कुछ नहीं सोचता। जब कोई चीज आकर्षक होती है। मुझे अच्छी लगती है, तो मैं उस पर काम करता हूँ। लोग उसे पसंद करते हैं, तो हम उनका धन्यवाद अदा करते हैं। लेकिन इस इरादे से मैंने कभी कोई काम नहीं किया कि यह काम मैंने कभी किया नहीं, तो चलो इसे भी करके देखते हैं। या मैंने कभी कोई काम यह सोचकर नहीं किया कि मुझे इससे इतने प्रशंसक मिलेंगे। सोशल मीडिया से मेरा जुड़ाव इत्तफाकन हुआ। अब तो ब्लॉग, ट्वीटर व फेसबुक मेरे साथ तमाम लोग जुड़े हुए हैं।

ट्वीटर फेसबुक और ब्लॉग आप खुद लिखते हैं या?
– सब कुछ मैं खुद ही लिखता हूं। मैं खुद ही जवाब देता हूं। ब्लॉग खुद लिखता हूं। फोटो भी स्वयं ही चुनता हूं। मेरी कोई टीम नही है। तीनों काम मैं स्वयं ही करता हूं। जब ब्लॉग पर बैठता हूं, उस वक्त जो मन में आता है, वह लिख देता हूं।

अभिषेक बच्चन ने हाल ही में एक कबड्डी टीम ली है। आपको लगता है कि इससे खेल को बढ़ावा मिलेगा?
– खेल को बढ़ावा मिला। परिणाम आप देख ही रहे हैं। कबड्डी की मैच को जितनी सफलता मिली, उसको लेकर किसी ने नहीं सोचा था। जब स्टार टीवी और स्टार स्पोर्ट्स पर इन मैचों का प्रसारण हुआ, तो अब यह धारणा बनी है कि क्रिकेट के बाद भारत देश में कबड्डी सबसे प्रबल खेल है। और अब फुटबॉल की टीम भी ली है जो 12 अक्तूबर से शुरू हो गया है। धीरे -धीरे हर भारतीय खेल को महत्व मिलने लगेगा।

आजादी के बाद आज आप अपने देश को कहां पाते हैं?
– हमारा सबसे बड़ा नौजवानों का देश है। 67 साल की आजादी में हमने बहुत कुछ पाया है। हम बहुत आगे बढ़े हैं। मुझे तो अपने देश पर गर्व है।

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Mayapuri