क्या फाल्के सम्मान देकर ‘बच्चन’ को बड़ा कर रही है सरकार?

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amitabh Bachchan (3)

कुछ समय पहले की ही बात है कि ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के सवाल-जवाब में एक प्रतियोगी ने अमिताभ से कहा था कि वह चाहता है कि बिग बी को ‘दादा साहब फाल्के’ और ‘भारत रत्न’ का सम्मान सरकार से मिले। उस समय अमिताभ के चेहरे पर मायूसी भरी खीझ के भाव छलके थे। उन्होंने बात को समेट दिया था यह कहकर कि – ‘मैं इसमें ही संतुष्ट हूं। मुझे नहीं चाहिए सम्मान।’ ‘मायापुरी’ में हमने इस बात का जिक्र किया था। और अब, पखवाड़ा ही बीता है कि केन्द्रिय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने अमिताभ को फाल्के सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा कर दी हैं। तो, क्या इतने समय तक अमिताभ को फाल्के-सम्मान न दिये जाने की कोई वजह थी (उनके समर्वी विनोद खन्ना और शशिकपूर को यह सम्मान पहले ही दिया जा चुका है)? या फिर पिछली सरकार के खामियाजे को पूरा करके यह सरकार ‘बच्चन’ को बड़ा कर रही है

…इकबाल बच्चन से बड़े होकर अमिताभ और फिर बरगद के पेड़ की तरह फैल चुके बिग बी के लिए फाल्के सम्मान में मिलने वाले स्वर्ण कमल मोमेन्टो, शाल और दस लाख नकदी रकम का क्या मूल्य बनता है, दर्शक समझते हैं। बेशक यहां हम नेहरू-गांधी-परिवार से बच्चन की दूरियों का भी जिक्र नहीं करना चाहेंगे। कहा जाता रहा है कि कांग्रेस के पिछले कुछ सालों के शासन में अमिताभ का कद छोटा करने की कोशिश की गयी थी। लेकिन, हम अपने पाठकों को जरूर बताना चाहेंगे कि फाल्के और अमिताभ की समानांतर चाल की कड़ी में कई विशेषताएं जुड़ी हैं। फाल्के अवॉर्ड की शुरूआत हुई थी 1969 में (फिल्मों के पितामह दादा साहब फाल्के की स्मृति स्वरूप में), यही समय था-1969-जब अमिताभ फिल्म इंडस्ट्री का दरवाजा खटखटा रहे थे। मृणाल सेन की उसी साल बनी फिल्म ‘भुवन सोम’ के वह नैरेटर थे। और उसी दौरान उन्होंने ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म ‘सात हिन्दुस्तानी’ के एक पात्र (अनवर अली) को पर्दे पर जीया था। फाल्के अवॉर्ड का यह पचासवां साल है इस साल का दादा साहब फाल्के आशीर्वाद अमिताभ को दिये जाने में आधी सदी बिता दी गई है। सदी के महानायक (स्टार ऑफ मिलेनियम) की उपाधि उनको पहले ही मिल चुकी है जो किसी निजी संस्था का चयन था। फाल्के अवॉर्ड सरकारी सम्मान का चयन है। इसी 11 अक्टूबर को वह उम्र के 77वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं और दो-तिहाई उम्र के दरवाजे पर खड़े बिग बी के प्रशंसकों के मुख से एक ही शब्द निकल रहा है- ‘इतनी देर से ?’ फाल्के नाम का पहला पुरस्कार देविका रानी को 1969 में दिया गया था। यह इस बार जो अमिताभ को दिया जा रहा है। 1919 में (1918 का सम्मान) 50 वें वर्ष में 49वां सम्मान होगा। यह सम्मान बिग बी को 66वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड समारोह में प्रदान किया जाएगा। ‘मायापुरी’ ने बिग बी के लिए ‘भारत रत्न’ दिये जाने की गुहार भी लगायी थी। चलिए, देर से ही सही माननीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर जी ने सारी विसंगतियों को तोड़कर पहल की है, उनका अभिवादन! और बच्चन साहब को बधाई!!

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