अमिताभ बच्चन ने अपने पैरलेल सिनेमां ‘भुवन शोम’ को पहली मर्तबा आवाज दी थी

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के रवि (दादा)

अमिताभ का लीवर 25 फीसदी ही काम कर रहा है। फिर भी यह टीवी पर, फिल्मों में, विज्ञापनों में, आयोजनों में, सरकारी गतिविधियों में, ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर सर्वव्यापी है।

वह बहुत कम उम्र में वायु सेना में शामिल होना चाहते थे।

सात हिंदुस्तानी, आनंद, प्यार की कहानी, रास्ते का पत्थर, बंधे हाथ, एक नजर, बंसी बिरजुमेंका अमिताभ नया , लेकिन भावुक। इसे शैलीबद्ध नहीं किया गया था। उन्होंने देश के पहले पैरेलल सिनेमा ‘भुवन शोम’ को अपनी आवाज दी थी। लेकिन उन्होंने खुद पैरेलल सिनेमा से मुंह मोड़ लिया। लेकिन उसका स्वाद उच्च स्तर का है। उनके पसंदीदा कलाकार दिलीप कुमार और वहीदा हैं। वह महान सतार बजाते हैं और कविता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत भी करते हैं। देव आनंद या राजेश खन्ना के विपरीत, वह सिर्फ आत्म-प्रेम में डूबे नहीं हैं। वह अन्य लोगों के प्रदर्शन के लिए फूल और पत्र भी देते है। उन्होंने सबसे अधिक डबल-ट्रिपल भूमिकाएँ निभाई हैं। यह आज भी प्रासंगिक लगता है। बाबू मोशाई की किताब ‘शहंशाह अमिताभ’ में आपको उनके बारे में एक अलग ही विश्लेषण पढ़ने को मिलेता हैं । अमिताभ बच्चन को तमाम माध्यमों, और चहेतो की और से अनगिनत शुभकामनाएँ!

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Mayapuri