कंगना का दिल बाग बाग हो गया है

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कंगना रनोट को लेफ्ट राइट एन्ड सेन्टर भर भर कर तारीफों की बौछार मिल रही है अपने तनु और दत्तो के अभूतपूर्ण किरदार बखूबी निभाने के लिए लेकिन जब अमिताभ बच्चन जैसे भारतीय सिनेमा के लेजेन्ड की ओर से एक नहीं दो दो फूलों के गुलदस्तों के साथ दो दो प्रशंसा पत्र कंगना को मिले तो वह सचमुच खुशी से खनखना उठी क्योंकि अक्सर अमिताभ जब किसी कलाकार के अभिनय से अच्छा खासा प्रभावित होते हैं तब ही वे एक फूलों का गुलदस्ता और एक प्रशंसा पत्र उन्हें भेजते हैं पर यहाँ तो दो दो गुलदस्ते और दो दो प्रशंसा पत्र कंगना को भेजे गये, एक तनु के नाम एक दत्तो के नाम। कंगना खुशी से चहक कर कहती है, ‘‘मुझे अमिताभ जी ने फिल्म ‘क्वीन’ के लिए भी फूलों का गुलदस्ता और प्रशंसा पत्र भेजा था, जो उच्च दर्जे की अंग्रेजी भाषा (जो वे बोलते है) में लिखी गई थी, लेकिन इस बार उन्होंने एक कविता लिखी और वह भी हिन्दी में ताकि मैं अपने पैरेन्ट्स और दादी को भी पढ़कर सुना सकूं क्योंकि वे हिन्दी ज्यादा समझते हैं। मुझे महसूस हो रहा है जैसे यह दो प्रशंसा पत्र मेरे लिए मेडल की तरह है। मैं इन्हें फ्रेम करके रखूंगी जिन्दगी भर के लिये। मेरे पैरेन्टस फिल्म और एक्टिंग के बारे में ज्यादा नहीं समझते लेकिन बच्चन जी के पत्रों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि मैंने कुछ अच्छा किया है बच्चन जी ने मेरे परफाॅर्मेन्स के बारे में बारीकी से बताया है, उन्होंने लिखा है ‘‘बहुत कम ऐसा होता है जब किसी के परफाॅर्मेन्स से हमारी आँखें भर आती है, तुमने मुझे रूलाया और तनु की हमशक्ल दत्तो।’’ अमिताभ जी के पत्रों को पढ़ते पढ़ते मैं उस वक्त रो पड़ी जब मैंने पढ़ा कि उन्होंने लिखा है ‘मैं अपने आप को भाग्यशाली समझता हूं कि मैं उस उद्योग से जुड़ा हूं जिसमें कंगना बसती है’ ‘‘कंगना आगे कहती है कि वह बाॅलीवुड में बाहर से आई हुई होने की वजह से काफी समय से लोगों के मजाक का शिकार होती रही लेकिन अब मिस्टर बच्चन के फूलों ने ना सिर्फ मेरे कमरे को खुश्बू से भर दिया बल्कि मेरे मन को भी बाग बाग कर दिया।’’ प्रिय कंगना, तुम पर ऐसे ही फूल बरसते रहें।


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Mayapuri

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