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अमिताभ बच्चन ने भारत रत्न लता मंगेशकर की तारीफें की 

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अली पीटर जॉन

लता मंगेशकर जिनको देश का हर उत्कृष्ट पुरस्कार मिल चुका है ,भारत रत्न से लेकर दादा साहब फाल्के पुरस्कार तक. लता जी सिर्फ देश में ही नहीं पूरी दुनिया में अपनी आवाज की वजह से जानी जाती है. लेखक, कवि,संत सब लता जी की तारीफें करते थकते नहीं हैं.

यह समारोह  स्वर कोकिला को श्रद्धांजलि देने के लिए बहुत ही सही अवसर था क्योंकि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन  जो कि  लता जी के बहुत बड़े फैन हैं वो खुद उनको यह सम्मान देने वाले थे.

संगीत के इस महान समारोह में अमिताभ बच्चन से लता जी  का परिचय कराने को कहा गया. उन्होंने समारोह के मुताबिक कपड़े पहने थे.उले कपड़ों में अमिताभ बिल्कुल संतलग रहे थे. सभी लोग अमिताभ द्वारा लता जी के बारे में सुनने को उत्सुक थे.

अमिताभ ने एक सवाल से बातें शुरू की कि, “मैं उस महान हस्ती का क्या परिचय दूं जो खुद में एक महान परिचय है. यह मेरे  दिमाग से परे है. मेरे पास शब्द नहीं है उनकी व्याख्या करने के लिए. पर मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगा.

लता जी का नाम खुद में ही उनके व्यक्तित्व के बारे में व्याख्या करता है. लता जिसका अर्थ है -सुर, ताल,संगीत.”

अमिताभ ने बताया कि लता जी को अनगिनत पुरस्कार मिले है. दुनिया भर के विभिन्न यूनिवर्सिटीज के द्वारा उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी दी गई है. पर ये सब फिर भी कम है लता जी की महानता को बयां करने के लिए.  उन्होंने आगे कहा कि जब भी वह अपने किसी पाकिस्तानी दोस्त से मिलते हैं तो वो उन्हें यही कहते कि उनके देश में सब कुछ है सिवाय ताजमहल और लता मंगेशकर के.

अमिताभ कविता के वाले मूड में थे और उन्होंने कहा कि लता जी  का भगवान से बहुत गहरा संबंध है  क्योंकि उनकी आवाज आत्मा और परमात्मा के बीच  के मिलन के समान है.

अमिताभ बच्चन ने कहा कि आत्मा और परमात्मा के बीच एक डोर होती है और वो डोर है लता मंगेशकर. अमिताभ बच्चन की मौजूदगी में यही उम्मीद होती है कि भीड़ की तालियों की गड़गड़ाहट से भवन गूँज उठेगा पर ऐसा हुआ नहीं. पूरी भीड़ बिल्कुल शांतिमय तरीके से बैठी हुई थी मानो जैसे अमिताभ बच्चन द्वारा लता जी की आवाज की व्याख्या सुनने में लीन हो.

अमिताभ जी उनको पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए आमंत्रित किया गया था. लता जी के सामने तीन नामों का प्रस्ताव रखा गया जिनसे वो पुरस्कार लेना पसंद करेंगी.और वो नाम थे- एपीजे अब्दुल कलाम,सचिन तेंदुलकर और अमिताभ बच्चन. लता जी ने कहा कि, “अगर अमिताभ का नाम है तो फिर किसी और नाम के बारे में क्यों सोचना?” मुझे अमिताभ बच्चन जी को निमंत्रण देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. वो हमेशा की तरह समय से पहले ही मौजूद थे और फिर लगभग 45 मिनट तक उन्होंने लता जी के बारे में बात की.  दर्शकगण बिल्कुल शांति से बैठे थे.  फिर लता जी ने बातें शुरु की. उनकी आंखों में आंसू थे. उन्होंने बस इतना ही कहा कि, “मैं क्या बोलूं इस महान भाषा के बादशाह के सामने?”.

मैं चाहता हूँ कि साल में 1 दिन लता मंगेशकर के नाम पर होना चाहिए.

लता जी सदाबहार है. उनको समय की कोई सीमा नहीं बाँध सकती है. वो इंसान और भगवान दोनों से बहुत करीब है. लता दीदी ही नहीं हैं , लता जी देवी हैं.

लता जी द्वारा गाए गए कुछ सदाबहार गीत-

लारा लप्पा लारा लप्पा, आयेगा आनेवाला, धीरे से आजा रे अँखियन में , आ जाओ तड़पते है अरमान , ठंडी हवायें लहरा के आयें , तुम ना जाने किस जहां में खो गये

,ए री मैं तो प्रेम दिवानी  ,ये जिंदगी उसी की है  ,ना मिलता गम तो बर्बादी,मन डोले मेरा तन डोले ,रसिक बलमा ,ऐ मालिक तेरे बंदे हम,यूं हसरतों के दाग,आजा रे परदेसी ,तेरे सुर और मेरे गीत ,अजीब दास्तान है ये  ,ओ बसंती पवन पागल, प्यार किया तो डरना क्या ,ओ सजना बरखा बहार आई  ,अल्लाह तेरो नाम ,कहीं दीप जले कहीं दिल , रुक जा रात ठहर जा रे चंदा, रात भी है कुछ भीगी भीगी, लग जा गले, बेदर्दी बालमा तुझको, पिया तोसे नैना लागे रे,यह समां समां है ये प्यार का, दिल का दिया जला के गया, रहे ना रहे हम,नैनों में बदरा छाए, चलो सजना जहां तक घटा चले, बिंदिया चमकेगी,रैना बीती जाए, जाने क्यों लोग मोहब्बत, इन्हीं लोगों ने, रुके रुके से कदम, ईश्वर सत्य है, ऐ दिल-ए-नादान , दिखाई दिए तुम आदि.

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