इस वर्ष दीपावली की धूम फिर से मचने वाली है – अमिताभ बच्चन

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full on 24 04 दीपावली का त्योहार अमिताभ बच्चन के बंगले में हर वर्ष बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। जब उनके सुपुत्र अभिषेक बच्चन की बिटिया रानी यानी अमिताभ की पोती आराध्या की पहली दीपावली थी तो वह दिवाली कुछ और ज्यादा जोर शोर से मनाई थी बच्चन परिवार ने। दो सौ से ज्यादा कंढ़ीले ( इको फ्रेन्डली पेपर लैन्टर्न) मंगवाकर पूरे बंगले को जगमगाया गया था। बॉलीवुड में यह सभी जानते हैं कि बच्चन परिवार को तीज त्योहारों से कितना लगाव है। होली दिवाली तो धूम धमाके से मनाते हैं ही और भी ढेर सारे त्योहार मनाने का कोई मौका नहीं चूकते हैं। अभिषेक और ऐश्वर्या के प्रथम विवाह वार्षिकी पर और ऐश्वर्या के प्रथम करवा चैथ पर भी बच्चन बंगले में जबर्दस्त उत्सव का माहौल था। पिछले साल की दीपावली पर अमिताभ बच्चन के घर पर जिस तरह से बॉलीवुड के सारे टॉप के स्टार्स ने आनन्द मनाया था, धूम धड़ाके किए थे और कुछ स्टार्स ने तो अपना अपना गु्रप बना कर ताश भी खेले थे उससे ऐसा महसूस हुआ जैसे यह दीपों का त्योहार जलसा (अमिताभ जी का बंगला का ही होकर रह गया है।

इस वर्ष दीपावली की धूम फिर से मचने वाली है अमिताभ बच्चन के आंगन में ऐसे में अमिताभ जी के दिल का हाल क्या है पूछने पर वे हमेशा की तरह अपनी खूबसूरत मुस्कान के साथ बताते हैं दिवाली हम सबके लिए एक बेहद स्पेशल त्यौहार रहा है बचपन में मनाई हर दीपावली की मीठी यादें मुझे मेरे जन्म स्थान इलाहाबाद में ले जाती है। मुझे याद है कि दीपावली से कुछ दिन पहले घर आंगन बगीचे की पूरी तरह साफ सफाई रंगाई पुताई खत्म हो जाती थी स्टोर रूम से मिट्टी के खूबसूरत दीये निकाले जाते थे हाथों से बनी रूई की बत्तियों को सजाया जाता था दिवाली की रात में उन्हीं मिट्टी की सैकड़ों दीपों में कड़वा तेल (सरसों का तेल) डाल डाल कर बत्तियाँ भिगोयी जाती और घर आंगन का कोना कोना रौशन कर दिया जाता था। मुझे याद है मैं अपने माता पिता के साथ बाजार जाता था वहाँ से बहुत सारी मिठाईयाँ और पारंपरिक लाई लावा, चीनी की बनी हाथी घोड़े चिडि़या लाते थे। हम बच्चों को पॉकेटमनी के तौर पर दो आना मिला करता था और हम दिवाली के दिन नज़दीक के पान की दुकानों में सजे पटाखों के डिब्बे खरीद लाते थे साइकिल से बार-बार पटाखों की दुकानों में जाने का क्या मजा था वह आज शब्दों से बता नहीं सकता। इन्हीं तीज त्योहार के साथ कब बड़ा हो गया पता ही नहीं चला हालांकि आज मैं पटाखे नहीं फोड़ता हूँ पर जब बच्चों को नाती नातिन पोती को पटाखे एन्जॉय करते देखता हूँ तो बचपन की हर बात याद आ जाती है। यह जो हमारे भारतीय तीज त्योहार है न सारे बहुत महत्वपूर्ण है इसे मनाते हुए मन में जो उत्साह श्रद्धा उमंग की लहर दौड़ती है वह हमें एक नई जिन्दगी देती है वर्ष भर की हर थकान मिटा देती है और अपने निकट संबंधियों दोस्तों से मिल बैठने का मौका देती है।

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यही कारण है कि हमें हर उत्सव दिल खोलकर मनाना चाहिए। उत्सव मनाने के लिए ज्यादा पैसों की दरकार नहीं होती है बहुत कम साधनों के साथ भी खुशी से हर दरकार नहीं होती है बहुत कम साधनों के साथ भी खुशी से हर त्यौहार मनाया जा सकता है। हाँ दिवाली की शुभ कामनाएं देते हुए मैं यह जरूर कहूंगा की खतरनाक पटाखों से बचें सेफ प्रदूषण रहित दिवाली मनाईये।


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Mayapuri

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