अमोल पालेकर

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90s के कॉमेडी आईकॉन रहे अमोल पालेकर

मराठी मंच से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले एक सफल अभिनेता और निर्देशक अमोल पालेकर का जन्म 24 नवंबर, 1944 को बम्बई (अब मुम्बई) में हुआ और वहीं जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से उन्होंने अपनी पढ़ाई की। पढ़ाई के साथ-साथ अमोल पालेकर का थियेटर की ओर भी रुझान था। थियेटर में कैरियर के लिए संघर्ष करने के साथ ही अमोल एक बैंक में क्लर्क का काम भी करते थे।

अमोल पालेकर ने अभिनय में साल 1971 में सत्यदेव दुबे की मराठी फ़िल्म ‘शांतता कोर्ट चालू आहे’ से शुरुआत की। इनकी पहली हिंदी फ़िल्म ‘रजनीगंधा’ की सफलता ने इन्हें इसी तर्ज की कई कम बजट वाली कॉमेडी फ़िल्में दिलाई। बासु चटर्जी और ऋषिकेश मुखर्जी की ‘चितचोर’ (1976), ‘छोटी सी बात’ (1975) तथा ‘गोलमाल’ (1979) 70’ के दशक की सफल कॉमेडी फ़िल्में रहीं। अमोल पालेकर सशक्त और हल्के गुदगुदाते सभी भूमिकाओं में फिट जल्दी ही सिनेमा जगत में जाना-माना नाम बन गए। भीमसेन की ‘घरौंदा’ (1977), श्याम बेनेगल की ‘भूमिका’ (1976) और कुमार साहनी की ‘तंरग’ (1984) अमोल के अभिनय बहुआयामी कला छवि को दर्शाती हैं।

 अमोल एक अच्छे अभिनेता तो थे ही अच्छे निर्देशक भी हैं। अमोल पालेकर ने उनकी पहली फ़िल्म निर्देशित फ़िल्म मराठी भाषा की ‘आकृएत’ (1981) थी। इस फ़िल्म में इन्होंने अभिनय भी किया। किसी मनोरोग से पीडि़त व्यक्ति जो हत्याएं करता फिरता है का अभिनय निश्चित ही चुनौतीपूर्ण भूमिका थी। उनकी पहली निर्देशित हिन्दी फ़िल्म ‘अनकही’ (1984) थी। इसके बाद क्रमश: ‘थोड़ा-सा रूमानी हो जाएं ’(1989), ‘दायरा’ (1996) और ‘कैरी’ (2000) सरीखी उत्कृष्ट आलोचनात्मक फ़िल्मों का सफल निर्देशन किया। इसके साथ साथ उन्होंने टीवी यानि छोटे पर्दे के लिए ‘कच्ची धूप’ और ‘नकाब’ जैसे धारावाहिकों का निर्देशन भी किया। दायरा, अनाहत, कैरी, समांतर, पहेली , अक्स रचनात्मकता के हर रंग -रूप में ख़ास नजर आते हैं।

अमोल पालेकर की कुछ खास फिल्मे इस प्रकार हैं -अक्स,तीसरा कौन ,बात बन जाये,खामोश,झूठी,अनकही,आदमी और औरत,तरंग,रंग बिरंगी,प्यासी आँखें,जीवन धारा,रामनगरी,श्रीमान श्रीमती,नरम गरम,समीरा,अग्नि परीक्षा,चेहरे पे चेहरा,आँचल,अपने पराये,गोल माल,मेरी बीवी की शादी,दो लड़के दो कड़के,बातों बातों में,जीना यहाँ,दामाद,भूमिका,सफेद झूठ,अगर,घरौंदा,टैक्सी टैक्सी,चितचोर,छोटी सी बात,रजनीगंधा आदि इनकी आखरी फिल्म एक मराठी फिल्म ‘धूसर’ थी और आखरी टीवी सीरियल ‘एक नयी उम्मीद रौशनी’ था ।


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Mayapuri

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